1. एयर इंडिया में 49% FDI
एयर इंडिया लंबे समय से घाटे में है और सरकार के लिए उसे पालना महंगा साबित हो रहा है. कहा जाता रहा है कि इंडियन एयर को निजी हाथों में दे दिया जाए तभी उसके दिन बहुर सकते हैं. इसीलिए इस बदलाव ने ही सबसे ज़्यादा दिलचस्पी पैदा की.

एयर इंडिया - सरकार का सफेद हाथी, जिसका नाम महाराजा है. (फोटोः रॉयटर्स)
अब तक कानून ये था कि कोई विदेशी एयरलाइन भारत सरकार से इजाज़त लेकर किसी भारतीय एयरलाइन में 49% तक निवेश कर सकती थी. लेकिन एयर इंडिया में निवेश की अनुमति नहीं थी. अब इस शर्त को खत्म कर दिया गया है. अब एयर इंडिया में भी 49% तक निवेश की अनुमति दे दी गई है. लेकिन सरकार ने साफ किया है कि एयर इंडिया का नियंत्रण फिलहाल निजी हाथों में देने का उसका इरादा नहीं हैं.
2. सिंगल-ब्रांड रिटेल में 100% FDI
सिंगल-ब्रांड रिटेल माने एक ऐसा स्टोर जिसमें एक ही कंपनी के उत्पाद मिलते हैं. यानी एप्पल, आइकिया वगैरह. इसमें पहले 49% तक का विदेशी निवेश हो जा सकता था. इससे ज़्यादा के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी. अब ये अनुमति वाली शर्त खत्म कर दी गई है. अब विदेशी कंपनियां सीधे निवेश कर पाएंगी.

एप्पल स्टोर. जहां किडनी बेचकर पैसे जुटाने वाले लोग फोन खरीदने जाते हैं. (फोटोः रॉयटर्स)
पहले ये नियम था कि इन कंपनियों को हर साल अपना 30 फीसदी माल हिंदुस्तान से ही खरीदना होता था. अब ये शर्त खत्म हो गई है. अब हिंदुस्तान आने वाली कंपनियों को बस इतना करना है कि हर साल पहले से ज़्यादा माल हिंदुस्तान से खरीद कर विदेशों में अपने स्टोर भेजना है. स्टोर खोलने के पांच साल बाद से इन पर पुराना नियम लागू होगा और इन्हें अपना 30 फीसदी माल हिंदुस्तान से खरीदना होगा.
3. रियल एस्टेट ब्रोकिंग में 100% FDI
सरकार ने ये साफ कर दिया है कि रियल एस्टेट और रियल एस्टेट ब्रोकिंग अलग-अलग हैं. इस कंफ्यूज़न के चलते बाहर से आने वाली ब्रोकिंग फर्म भारत में काम करने से हिचकिचाती थीं. अब रियल एस्टेट ब्रोकिंग में 100 फीसदी FDI लाया जा सकेगा.

रीयल एस्टेट. अमरीका के राष्ट्रपति बनने के तरीकों में से एक. (फोटोः रॉयटर्स)
4. 'मेडिकल डिवाइस' वाला कंफ्यूज़न दूर हुआ
FDI एक्ट में फार्मा सेक्टर में निवेश से जुड़े नियम भी हैं. अब FDI एक्ट के मुताबिक मेडिकल डिवाइस की परिभाषा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के हिसाब से बदलती रहती है. इससे भी कंफ्यूज़न पैदा होता था. अब FDI के संदर्भ में मेडिकल डिवाइस की परिभाषा वही रहेगी, जो FDI एक्ट में लिखी है. उम्मीद की जा रही है कम कंफ्यूज़न वाले माहौल में ज़्यादा कंपनियां भारत में मेडिकल डिवाइस बनाना शुरू करेंगी.

पेसमेकर. जब प्यार से दिल न धड़के तो इसे लगाते हैं. (फोटोः रॉयटर्स)
5. पावर सेक्टर को ज़्यादा पावर
जैसे स्टॉक एक्सचेंज होता है शेयर के लेन-देन के लिए, वैसे ही बिजली के लेन-देन के लिए पावर एक्सचेंज होते हैं. अब इनके दो प्रकार होते हैं - प्राइमरी और सेकेंडरी. अब तक विदेशी कंपनियां सिर्फ सेकेंडरी एक्सचेंज में 49% निवेश कर सकती थीं. अब से वो प्राइमरी एक्सचेंज में भी निवेश कर पाएंगे.

बिजली का खंबा. (फोटोः रॉयटर्स)
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