अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप हूती विद्रोहियों के साथ जो हित साधना चाहते थे, वो पूरा हो चुका है. यमन में ईरान समर्थित विद्रोही गुट हूतियों ने कहा है कि वो रेड सी में अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे. कुछ दिन पहले डॉनल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में बताया था कि हूतियों और ट्रंप प्रशासन के बीच बात हुई. उन्होंने दावा किया था कि हूती अमेरिका से दुश्मनी मोल लेना नहीं चाहते. अब दूसरे पक्ष ने भी ये साफ कर दिया है.
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Houthis-Saudi Arabia conflict: हूती विद्रोहियों ने बताया कि जब उन्होंने यमन के पश्चिमी तट पर अपनी बढ़त बनाई, तब वॉशिंगटन की तरफ से बातचीत की पहल हुई. हूतियों ने अपने मैसेज में ये भी साफ किया कि सऊदी अरब का साथ देने वाले देश भी उनके निशाने पर होंगे.

एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हूती पॉलिटिकल ब्यूरो के एक सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने AP से बात की. ज़ूम पर इंटरव्यू कॉल के दौरान उन्होंने कहा,
‘हम ये कन्फर्म करते हैं कि रेड सी में अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं किया जाएगा. इसके अलावा और किसी देश को भी हम निशाना नहीं बना रहे हैं. हमारी लड़ाई केवल पड़ोसी देश सऊदी अरब से है.’
उन्होंने अपने मैसेज में ये भी साफ किया कि सऊदी अरब का साथ देने वाले देश भी उनके निशाने पर होंगे. अल-बुखैती ने बताया कि जब हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट पर अपनी बढ़त बनाई तब वॉशिंगटन की तरफ से बातचीत की पहल हुई.
AP की एक और रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान ने पिछले हफ़्ते अमेरिका और हूतियों के बीच बातचीत की मेज़बानी की थी. हालांकि, अल-बुखैती ने सीधी बातचीत की पुष्टि नहीं की है. उन्होंने ओमान के ज़रिए अप्रत्यक्ष बातचीत की बात मानी है. ओमान ने ही हूती और ट्रंप प्रशासन के बीच 2025 के युद्धविराम में मध्यस्थता की थी.
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रिपोर्ट के मुताबिक, अल-बुखैती ने कहा कि अगर कोई देश सऊदी अरब के साथ मिलकर यमन के ख़िलाफ़ हमले में शामिल होता है, तो विद्रोहियों में कई मोर्चों पर जंग लड़ने की क्षमता है. उन्होंने साफ किया कि सऊदी अरब पर हूती हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक रियाद यमन में विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाकों पर लगी दस साल पुरानी नाकेबंदी खत्म नहीं करता. साथ ही रेड सी में हूती-कंट्रोल्ड पोर्ट्स तक जहाज़ों को पहुंचने की इजाज़त नहीं देता.
अल बुखैती का कहना है कि अगर ये मांगे पूरी हो जाएं तो बातचीत की जा सकती है. उन्होंने एक और बात पर गौर फ़रमाया. उन्होंने कहा कि हूतियों के मिलिट्री ऑपरेशन का मकसद बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद करना नहीं है. बल्कि ये सुनिश्चित करना है कि ये समुद्री रास्ता सभी के लिए खुला हो, यमन के लिए भी.
यमन में विद्रोहियों ने सबसे अहम बंदरगाह शहर मोखा और रेड सी के मेन आइलैंड पर अपना कब्ज़ा कर लिया है. इससे उन्हें बाब अल-मंडेब से गुज़रने वाले जहाजों की आवाजाही पर बेहतर नज़र रखने में मदद मिलती है, जहां से आमतौर पर दुनिया का लगभग 12% व्यापार होता है. अल-बुखैती ने बताया कि फिलहाल मोमेंटम हूतियों के फेवर में है.
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