Submit your post

Follow Us

नोटबंदी के समय सरकार ने क्या दावे किए थे और उनका क्या हश्र हुआ

2.02 K
शेयर्स

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 30 अगस्त को 2016-17 की अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया कि नोटबंदी की वजह से 15.44 लाख करोड़ रुपए के जो नोट चलन से बाहर हो गए थे, उनमें से 15.28 लाख करोड़ रुपए वापस आ गए हैं. सिर्फ 16 हज़ार करोड़ रुपए के नोट ही बैंकों में वापस नहीं किए गए, जो बाहर हुई कुल करेंसी का 1.3% हैं. RBI के इन आंकड़ों ने केंद्र सरकार के कालेधन और भ्रष्टाचार के उन दावों को सिर के बल खड़ा कर दिया है, जिनके आधार पर 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का फैसला लिया गया था. अब सवाल ये उठता है कि इस पूरी कवायद का अर्थव्यवस्था को क्या फायदा हुआ.

आइए, हम सरकार के उन दावों की पड़ताल करते हैं, जो नोटबंदी के समय किए गए और उनका क्या हश्र हुआ.

#1. 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा करते हुए कहा था कि कालेधन से लड़ने के लिए ये फैसला बेहद जरूरी है. देशवासियों को कुछ परेशानी झेलनी पड़ेगी, लेकिन इस यज्ञ में सबको सहयोग करना पड़ेगा.

अंजाम- RBI के आंकड़े बताते हैं कि 4 नवंबर 2016 तक 17.97 लाख करोड़ रुपए की कीमत के नोट सर्कुलेशन में थे. 8 नवंबर को कुल 15.44 लाख करोड़ के नोट अमान्य किए गए, जिनमें से 15.28 लाख करोड़ कीमत के नोट वापस आ गए हैं. हजार रुपए के 632.6 करोड़ रुपए के नोटों में से 8.9 करोड़ नोट यानी 8,900 करोड़ रुपए वापस नहीं आए, जो कुल नोटों का महज़ 1.3% है. इससे दो परिस्थितियों की तरफ इशारा करता है.

नोटबंदी की घोषणा के समय नरेंद्र मोदी
नोटबंदी की घोषणा के समय नरेंद्र मोदी

अगर RBI के पास वापस आया सारा पैसा सफेद है, तो सरकार को ये स्वीकार करना चाहिए कि देश कालेधन से मुक्त हो गया है और देश में कालाधन था ही नहीं.. देश की कुल अर्थव्यवस्था को देखते हुए 16 हजार करोड़ बेहद छोटी रकम है, जिसके लिए इतनी बड़ी कवायद बेमानी नज़र आती है. वहीं अगर सरकार इससे इनकार करती है, तो इसे इस स्वीकरोक्ति की तौर पर देखा जाना चाहिए कि कालेधन के कुबेरों ने सरकार को झांसा देते हुए कालाधन बैकिंग सिस्टम में वापस डाल दिया है. क्या इसे नोटबंदी की असफलता नहीं माना जाना चाहिए!

#2. 8 नवंबर को ही नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हमें अपने देश की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए त्याग करना होगा, जिसका भविष्य में हमें बड़ा फायदा होगा.

अंजाम- नोटबंदी के वक्त बैंकों के बाहर लंबी कतारें थीं. देशभर में 100 से ज्यादा ऐसे मामले आए, जहां कतारों में खड़े लोगों की जान चली गई. अगर ये नोटबंदी का परिणाम माना जाए, तो ज़ाहिर है कि देश ने बड़ा त्याग किया है. हालांकि, RBI की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘नोटबंदी का ये मकसद नहीं था कि कितना पैसा सिस्टम में वापस आ जाएगा. कालेधन पर हमले, कम कैश करेंसी, बड़े टैक्स बेस, डिजिटाइजेशन और आतंकवाद को झटका देने में हमें उम्मीद के मुताबिक परिणाम मिले हैं.’

modi

ये सही है कि नोटबंदी के फैसले के बाद लोग डिजिटल इकॉनमी की तरफ बढ़ रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों पर पथराव की घटनाएं भी कम हुई हैं, जो कालेधन और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के सीधे कनेक्शन की तरफ इशारा करती हैं. लेकिन यहीं हमें याद आता है बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी का वो ब्लॉग, जिसमें उन्होंने यूपीए सरकार को गरीब-विरोधी बताते हुए उस फैसले का विरोध किया था, जिसमें 2005 से पहले के बड़े नोटों को बंद करने का प्रस्ताव रखा गया था.

यूपीए सरकार के इस फैसले पर उस समय के RBI गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि ये प्रस्ताव नोटबंदी का नहीं, बल्कि कम प्रभावी नोटों को ज्यादा प्रभावी नोटों से बदलने का था.

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन
RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन

#3. जेटली ने 12 नवंबर 2016 को कहा था कि सरकार जनधन खातों पर निगाह रखेगी, पुरानी करेंसी से खरीदे गए सोने पर निगाह रखेगी. सरकार की तरफ से अपनी तरफ से कालेधन की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना भी चलाई गई.

अंजाम- दिसंबर तक इस बात के पुख्ता सबूत थे कि टैक्स-चोरों ने अपना पैसा बैंक में जमा करके लीगल करा लिया है. सरकार भी जानती है कि कई पुराने बिलों और बड़ी खरीदी का सहारा लिया गया. बैंक अधिकारियों की मदद से भी ढेर सारी पुरानी करेंसी को नई करेंसी में बदल लिया गया. यानी भारत की लेजेंड्री ‘जुगाड़ क्षमता’ के आगे सरकार की कवायद दम तोड़ गई. सुप्रीम कोर्ट में नोटबंदी के फैसले का बचाव करते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दावा किया था कि करीब 4-5 लाख करोड़ रुपए सिस्टम में वापस नहीं आएंगे. अब इसका कोई ओर-छोर नहीं है.

वित्तमंत्री अरुण जेटली
वित्तमंत्री अरुण जेटली

गरीब कल्याण योजना के तहत भी सरकार को सिर्फ पांच हजार करोड़ रुपए ही वापस मिले हैं. इससे ज्यादा सफलता तो सरकार को उन दो योजनाओं से मिल गई थी, जो सरकार नोटबंदी के फैसले से पहले लाई थी. एक बार विदेशी कालेधन के लिए और दूसरी बार IDSI के लिए, जिससे सरकार को 65 हजार करोड़ रुपए मिले थे.

#4. 14 नवंबर 2016 को गोवा में मोपा एयरपोर्ट के शिलान्यास कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘मैंने सिर्फ 50 दिन मांगे हैं. 30 दिसंबर तक मुझे मौका दीजिए. अगर 30 दिसंबर के बाद मेरी कोई कमी रह जाए, कोई गलती निकल जाए, मेरा कोई गलत इरादा निकल जाए, तो आप जिस चौराहे पर मुझे खड़ा करेंगे, मैं खड़ा होकर देश जो सजा देगा, वो भुगतने के लिए तैयार हूं.’

अंजाम- मार्च 2017 के बाद ऐसे मौके कम ही आए हैं, जब प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी के फैसले पर कुछ कहा हो. अधिकांश मौकों पर रेवेन्यू सेक्रेटरी हंसमुख अधिया, आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव शक्तिकांत दास, RBI गवर्नर उर्जित पटेल और वित्तमंत्री अरुण जेटली ही फैसले का बचाव करते और इसके फायदे गिनाते नज़र आए हैं.

शक्तिकांत दास
शक्तिकांत दास

हां, 15 अगस्त को अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया था, ‘नोटबंदी के फैसले से दो लाख करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति सिस्टम में लौटी है, जिससे इनकम टैक्स फाइल करने वालों की तादाद दोगुनी होकर 56 लाख हो गई है. साथ ही, हवाला में लगीं तीन लाख फर्जी कंपनियों का पता चला है.’ यहां ये भी देखा जाना चाहिए कि नोटबंदी से तीन लाख करोड़ रुपए के कालेधन के बाहर रह जाने का अनुमान था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

#5. 15 नवंबर को जब बैंकों और पोस्ट ऑफिस के बाहर लाइनें लगी थीं, तब पीएम मोदी ने कहा था कि गरीब चैन की नींद सो रहा है और अमीर को नींद की गोलियां खानी पड़ रही हैं.

अंजाम- 8 नवंबर से अब तक अगर किसी ने बैग में पैसे भरे किसी शख्स को बैंक के बाहर लाइन में खड़े देखा हो, तो हमें ज़रूर बताए. जो नोट बदलवा रहे थे, उनकी भावना यूट्यूब के उस वीडियो में दिखती है, जब न्यूज रिपोर्टर के सवाल का जवाब देते हुए एक शख्स गालियां बकने लगता है.

यूट्यूब वीडियो में दिखने वाला शख्स
यूट्यूब वीडियो में दिखने वाला शख्स

#6. 18 नवंबर को इकनॉमिक टाइम्स के एक इवेंट में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जब देश की 86% करेंसी को बदलना हो और उसे सर्कुलेशन को बाहर करना हो, तो इस फैसले को इससे बेहतर तरीके से लागू नहीं किया जा सकता. कालेधन की पैरलल इकॉनमी 70 सालों से भारत का हिस्सा थी.

अंजाम- सुप्रीम कोर्ट के वकील और IT मामलों के जानकार विराग गुप्ता कहते हैं, ‘पहले व्यवस्था बनाई जाती है, लेकिन मोदी सरकार पहले फैसला लेती है, फिर व्यवस्था बनाती है.’ नोटबंदी के मामले में ये दिखा भी. सरकार को अर्थव्यवस्था में नकदी के रूप में मौजूद काले धन को लेकर पहले से कोई अनुमान नहीं था. जेटली ने 16 दिसंबर, 2016 को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में ये बात मानी भी थी.

उधर बैंकों में इतने कर्मचारी नहीं थे कि देश की 86% करेंसी को एक झटके में बदला जा सके. एटीएम मशीनें पहले से रीकैलिबर नहीं की गई थीं और एटीएम में पैसे भरने वाली टीम जरूरत के मुकाबले सिर्फ 30% ही थीं. सरकार ने फैसले का एग्जिक्यूशन कितना बेहतर किया, आप समझ सकते हैं.

atm

जहां तक कालेधन की पैरलल शैडो इकॉनमी का सवाल है, तो हमें 2010 की वर्ल्ड बैंक की स्टडी की तरफ जाना चाहिए, जिसके मुताबिक 1999 में भारत की जीडीपी में पैरलल इकॉनमी 20.7% थी, जो 2007 तक बढ़कर 23.2% हो गई थी. वहीं अमेरिका की ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी की ‘विकासशील देशों में गैर-कानूनी धन का प्रवाह 2004-2013’ टाइटल वाली रिपोर्ट के मुताबिक 2004 से 2013 तक 33.3 लाख करोड़ रुपए का कालाधन भारत से बाहर गया.

अब जबकि सिर्फ 16 हजार करोड़ रुपए की करेंसी वापस नहीं आई है, तो कैसे माना जाए कि देश में कितना कालाधन है. क्या ये मान लिया जाए कि ये सारा कालाधन नेपाल, भूटान और दूसरे देशों में पड़ा हुआ है. ये मानना भी मुश्किल है, क्योंकि इन 16 हजार करोड़ रुपए में से पांच हजार करोड़ तो वो हैं, जो महाराष्ट्र कॉपरेटिव बैंक के पास पड़े हैं और गिने नहीं गए हैं. कॉपरेटिव बैंकों ने नोटबंदी के बीच में ही पुराने नोट लेना बंद कर दिया था. उन्हें डर था कि भारी तादाद में पुराने नोट जमा कराके कालेधन को सफेद बनाने का प्रयास किया जा सकता है. ये कुल पैसा अगर 16 हजार करोड़ से ज्यादा का निकला, तो सरकार के पास कोई जवाब नहीं बचेगा. जितना पैसा गिना गया है, उतने में RBI को सात महीने का वक्त लगा है.

pms

#7. नोटबंदी के फैसले के बाद जब बीजेपी के नेताओं और मंत्रियों पर ये आरोप लगने लगे कि वो अपने चहेतों को नोट बदलवाने में मदद कर रहे हैं या अंधाधुंध चंदा ले रहे हैं. इस पर 29 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सभी सांसदों और विधायकों से 8 नवंबर से 31 दिसंबर तक के उनके बैंक अकाउंट के स्टेटमेंट पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के पास जमा कराने के लिए कहा था.

अंजाम- प्रधानमंत्री मोदी के इस आदेश के बाद न तो उन्होंने और न उनकी पार्टी ने कभी ये बताया कि इस आदेश का क्या हुआ. देश को ये नहीं पता है कि बीजेपी सांसदों और विधायकों के बैंक स्टेटमेंट्स में क्या नतीजा निकला था.

#8. 28 दिसंबर 2016 को बीजेपी के स्टेट जनरल सेक्रेटरी एएन राधाकृष्णन ने लेखक एमटी वासुदेवन नैयर के उस बयान पर सवाल उठाया था, जिसमें नैयर ने कहा था कि नोटबंदी की वजह से आम आदमी को तकलीफ उठानी पड़ी है.

अंजाम- इसके लिए हमें 2013 में लौटना पड़ेगा, जब यूपीए के फैसले के खिलाफ बीजेपी ने तर्क दिया था कि देश में अधिकांश लोगों के पास खाते नहीं हैं और वो इतने पढ़े-लिखे नहीं हैं कि डिजिटल बैंकिंग को अपना सकें. ये बात 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने से 6 महीने पहले की है. अगर तब देश तैयार नहीं था, तो 2016 तक भी हालात कुछ खास नहीं बदले थे. स्टूडेंट्स से लेकर दिहाड़ी मजदूरों तक को अपना काम छोड़कर कतारों में लगना पड़ा. जिनके घर शादी थी, वो कैश का इंतजाम नहीं कर पाए. देश में कई ऐसे लोग हैं, जो अब तक पुराने नोट नहीं बदलवा पाए हैं. इसमें केरल का ये मामला तो बेहद दर्दनाक है.

lines

#9. 7 फरवरी को संसद में पहली बार नोटबंदी के बारे में बोलते समय प्रधानमंत्री ने कहा था कि नोटबंदी देश के भले के लिए की गई है और इसमें राजनीतिक निहितार्थ नहीं खोजे जाने चाहिए. ये फैसला बेहद सटीक वक्त में लिया गया, जब देश की अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही थी.

अंजाम- नोटबंदी के राजनीतिक निहितार्थ पर बात करना बेमानी है, क्योंकि इससे कई बातें लपेटे में आती हैं. देश की जितनी पार्टियों और नेताओं ने इसका विरोध किया था, उन्हें परोक्ष रूप से भ्रष्टाचारी, कालेधन का समर्थक और बीजेपी-विरोधी करार दिया गया था. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस कवायद को संगठित लूट और कानूनी लूट बताया था. उनके मुताबिक नोटबंदी याद रखी जाने वाली प्रबंधकीय विफलता थी. बदले में डॉ. सिंह को ‘रेनकोट पहनकर नहाने’ जैसे निचले स्तर के बयानों का सामना करना पड़ा.

नोटबंदी के फैसले के कुछ महीने बाद ही यूपी में विधानसभा चुनाव होने थे. उस दौरान सबसे बड़ा नुकसान झेला बीएसपी ने, जिसका अधिकांश चंदा कैश में आता है. कालेधन के खिलाफ आवाज उठा रही सरकार के पीछे खड़ी ‘दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी’ ने ये पहल करने में कोई ठोस स्टैंड नहीं लिया था. हां, 17 दिसंबर को रेवेन्यू सेक्रेटरी हंसमुख अधिया ने ये घोषणा जरूर की थी कि पॉलिटिकल पार्टियों के खातों में पुराने नोटों से कितना भी चंदा जमा कराया जा सकता है और उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.

manmohan-singh
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह

जहां तक सही वक्त का सवाल है, तो नोटबंदी के बाद की पहली तिमाही में GDP को तगड़ा नुकसान झेलना पड़ा था और नवंबर 2016 से अगस्त 2017 तक GDP में 1% की गिरावट आ चुकी है.

#10. 5 फरवरी को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें कैशलेस सोसायटी बनानी होगी. 100% कैशलेस सोसायटी संभव नहीं है, लेकिन हमें लेस-कैश सोसायटी से शुरुआत करनी होगी. RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने भी इसका समर्थन किया था.

अंजाम- वित्तमंत्री अरुण जेटली के मुताबिक नोटबंदी से डिजिटल ट्रांजैक्शंस में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि इंडिया कैश बेस्ड इकॉनमी है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में रोजाना करीब तीन लाख करोड़ का लेनदेन होता है, जिसमें से 80 फीसदी ट्रांजैक्शंस कैश में होते हैं. डिजिटल ट्रांजैक्शन को लेकर एक आंकड़ा ये है कि अक्टूबर 2016 से मई 2017 तक डिजिटल ट्रांजैक्शंस में 56% की बढ़ोतरी हुई और 11 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन हुए.

cash

अब आगे क्या करने की सोच रही है सरकार

RBI की रिपोर्ट आने के बाद जेटली ने कहा है कि सारे पैसे की घोषणा के बाद अब उनके पास जांच का रास्ता खुल गया है. अब सरकार को पता है कि किस शख्स ने कितना पैसा दबा रखा था, पैसे की घोषणा नहीं की थी और अब जमा कर दिया है. अब सरकार ऐसे लोगों के खातों की जांच करेगी.

बुधवार को सरकार की प्रेस रिलीज के मुताबिक 18 लाख ऐसे अकाउंट्स की पहचान हुई है, जिनकी ऑपरेशन क्लीन मनी के तहत स्क्रूटनी की जाएगी. नवंबर 2016 से मई 2017 तक 17,526 करोड़ रुपए आय के अज्ञात स्रोतों से आए हैं. 1003 करोड़ रुपए सीज किए गए हैं. तीन लाख रजिस्टर्ड कंपनियों के ट्रांजैक्शन रडार पर हैं. एक लाख कंपनियों को लिस्ट से हटा दिया गया है. 37 हजार कंपनियों की पहचान हुई है, जो कालेधन को छिपाने और हवाला ट्रांजैक्शन में शामिल थीं. नोटबंदी की वजह से इनकम टैक्स रिटर्न की संख्या बढ़ी है. पिछले साल अगस्त में 9.9% के मुकाबले इस साल 24.7% की बढ़त थी.

black-money

वहीं शक्तिकांत दास की जगह लेने वाले आर्थिक मामलों के नए सचिव सुभाष गर्ग का कहना है कि नोटबंदी के कुछ शॉर्ट टर्म नुकसान हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करेगा. ये फैसला अर्थव्यवस्था के हित में है, इसलिए अब ये बहस खत्म कर देनी चाहिए.

इस पर RBI का क्या कहना है

RBI की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक संदिग्ध ट्रांजैक्शंस बहुत बढ़े हैं. पिछले साल जहां बैंकों ने 61,361 मामलों को रिपोर्ट किया था, वहीं इस साल ऐसी 361,214 शिकायतें आई हैं. RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर. गांधी कहते हैं कि लगभग सारा पैसा वापस आने का मतलब है कि अब कालाधन भी सिस्टम में आ गया है. इससे गेंद टैक्स डिपार्टमेंट के पाले में आ गई है. अब उसे अपना काम करना है.

पर अब तो सरकार के सामने और बड़े सवाल हैं

नोटबंदी के बाद की पहली बड़ी आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद सरकार के सामने कुछ और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

क्या कालाधन हजार और 500 के नोटों के अलावा 100 और 50 के नोटों में भी था, जो अब भी लोगों के पास है?
क्या कालाधन देश में सिर्फ प्रॉपर्टी और सोने की शक्ल में ही है?

सोने और प्रॉपर्टी का सवाल इसलिए विकराल है

क्योंकि देश के प्रॉपर्टी मार्केट को पहले ही कालेधन का पार्किंग लॉट कहा जाता रहा है. डिमांड न होने के बावजूद नए प्रॉजेक्ट आते जा रहे हैं, फ्लैट की कीमतें बढ़ती जा रही हैं और लोगों को तयशुदा वक्त पर फ्लैट्स की डिलीवरी नहीं मिल रही है. वहीं सोने में इन्वेस्टमेंट होने की वजह से पूंजी रुक जाती है. एक जगह जमा हो जाती है, जिसका अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं होता. दुर्भाग्यवश हमारे देश में ऐसे लोगों की भारी तादाद है, जो सोने में निवेश करते हैं.

gold

तो क्या करना चाहिए सरकार को

जब सरकार नोटबंदी जैसा बड़ा कदम उठा सकती है, उस पर लगातार विरोध झेल सकती है, तो अब उसे प्रॉपर्टी के मार्केट पर अटैक करना चाहिए, जहां बहुत कालाधन होने की आशंका है. रेरा एक्ट को एक अच्छी शुरुआत माना गया था, लेकिन इसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. हालांकि, पीएम मोदी पहले ही इस तरफ इशारा कर चुके हैं, अब उनके एक्शन लेने का इंतज़ार है.

लोगों से उनके बैंक लॉकर्स की जानकारी मांगी जानी चाहिए. अगर किसी चपरासी या क्लर्क के बैंक लॉकर में ढेर सारी प्रॉपर्टी के कागज और सोना बंद है, तो उसे उसका डिक्लेरेशन करना चाहिए. सरकार को पता चले कि कहां खाया जा रहा है, कितना खाया जा रहा है और कैसे खाया जा रहा है. पूंजी जितनी बद्चलन हो, उतना ही अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर है. सरकार को इसके लिए पूरी कोशिश करनी चाहिए.

बहरहाल, नोटबंदी पर सरकार के पास कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है. ये फैसला 400 ML के उस ग्लास की तरह है, जिसमें 200 ML पानी भरा है. कोई इसे आधा भरा बता रहा है, तो कोई आधा खाली. बाकी जैसा कि जेएनयू के इकॉनमिक्स के रिटायर्ड प्रोफेसर अरुण कुमार कहते हैं, ‘आर्थिक समस्या को राजनीतिक समस्या में बदलने में वक्त लगता है. देखना होगा नरेंद्र मोदी के सामने ये कैसे आता है.’

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

गंदी बात

'इस्मत आपा वाला हफ्ता' शुरू हो गया, पहली कहानी पढ़िए लिहाफ

उस अंधेरे में बेगम जान का लिहाफ ऐसे हिलता था, जैसे उसमें हाथी बंद हो.

PubG वाले हैं क्या?

जबसे वीडियो गेम्स आए हैं, तबसे ही वे पॉपुलर कल्चर का हिस्सा रहे हैं. ये सोचते हुए डर लगता है कि जो पीढ़ी आज बड़ी हो रही है, उसके नास्टैल्जिया का हिस्सा पबजी होगा.

बायां हाथ 'उल्टा' ही क्यों हैं, 'सीधा' क्यों नहीं?

मां-बाप और टीचर बच्चों को पीट-पीट दाहिने हाथ से काम लेने के लिए मजबूर करते हैं. क्यों?

फेसबुक पर हनीमून की तस्वीरें लगाने वाली लड़की और घर के नाम से पुकारने वाली आंटियां

और बिना बैकग्राउंड देखे सेल्फी खींचकर लगाने वाली अन्य औरतें.

'अगर लड़की शराब पी सकती है, तो किसी भी लड़के के साथ सो सकती है'

पढ़िए फिल्म 'पिंक' से दर्जन भर धांसू डायलॉग.

मुनासिर ने प्रीति को छह बार चाकू भोंककर क्यों मारा?

ऐसा क्या हुआ, कि सरे राह दौड़ा-दौड़ाकर उसकी हत्या की?

हिमा दास, आदि

खचाखच भरे स्टेडियम में भागने वाली लड़कियां जो जीवित हैं और जो मर गईं.

अलग हाव-भाव के चलते हिजड़ा कहते थे लोग, समलैंगिक लड़के ने फेसबुक पोस्ट लिखकर सुसाइड कर लिया

'मैं लड़का हूं. सब जानते हैं ये. बस मेरा चलना और सोचना, भावनाएं, मेरा बोलना, सब लड़कियों जैसा है.'

ब्लॉग: शराब पीकर 'टाइट' लड़कियां

यानी आउट ऑफ़ कंट्रोल, यौन शोषण के लिए आमंत्रित करते शरीर.

औरतों को बिना इजाज़त नग्न करती टेक्नोलॉजी

महिला पत्रकारों से मशहूर एक्ट्रेसेज तक, कोई इससे नहीं बचा.

सौरभ से सवाल

दिव्या भारती की मौत कैसे हुई?

खिड़की पर बैठी दिव्या ने लिविंग रूम की तरफ मुड़कर देखा. और अपना एक हाथ खिड़की की चौखट को मजबूती से पकड़ने के लिए बढ़ाया.

कहां है 'सिर्फ तुम' की हीरोइन प्रिया गिल, जिसने स्वेटर पर दीपक बनाकर संजय कपूर को भेजा था?

'सिर्फ तुम' के बाद क्या-क्या किया उन्होंने?

बॉलीवुड में सबसे बड़ा खान कौन है?

सबसे बड़े खान का नाम सुनकर आपका फिल्मी ज्ञान जमीन पर लोटने लगेगा. और जो झटका लगेगा तो हमेशा के लिए बुद्धि खुल जाएगी आपकी.

'कसौटी ज़िंदगी की' वाली प्रेरणा, जो अनुराग और मिस्टर बजाज से बार-बार शादी करती रही

कहां है टेलीविज़न का वो आइकॉनिक किरदार निभाने वाली ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी?

एक्ट्रेस मंदाकिनी आज की डेट में कहां हैं?

मंदाकिनी जिन्हें 99 फीसदी भारतीय सिर्फ दो वजहों से याद करते हैं

सर, मेरा सवाल है कि एक्ट्रेस मीनाक्षी शेषाद्री आजकल कहां हैं. काफी सालों से उनका कोई पता नहीं.

‘दामिनी’ के जरिए नई ऊंचाई तक पहुंचा मीनाक्षी का करियर . फिर घातक के बाद 1996 में उन्होंने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री को बाय बोल दिया.

ये KRK कौन है. हमेशा सुर्खियों में क्यों रहता है?

केआरके इंटरनेट एज का ऐसा प्रॉडक्ट हैं, जो हर दिन कुछ ऐसा नया गंधाता करना रचना चाहता है.

एक्ट्रेस किमी काटकर अब कहां हैं?

एडवेंचर ऑफ टॉर्जन की हिरोइन किमी काटकर अब ऑस्ट्रेलिया में हैं. सीधी सादी लाइफ बिना किसी एडवेंचर के

चाय बनाने को 'जैसे पापात्माओं को नर्क में उबाला जा रहा हो' कौन सी कहानी में कहा है?

बहुत समय पहले से बहुत समय बाद की बात है. इलाहाबाद में थे. जेब में थे रुपये 20. खरीदी हंस...

सर आजकल मुझे अजीब सा फील होता है क्या करूं?

खुड्डी पर बैठा था. ऊपर से हेलिकॉप्टर निकला. मुझे लगा. बाबा ने बांस गहरे बोए होते तो ऊंचे उगते.