यमन में हूती लड़ाकों के अचानक तेज हुए अभियान ने सऊदी अरब के सामने नई मुश्किल खड़ी कर दी है. इसी बीच अमेरिका और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में हुई गोपनीय बातचीत ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है. रिपोर्टों के मुताबिक बातचीत का फोकस लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा पर रहा. अगर दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की समझ बनी है, तो इसका सीधा असर सऊदी अरब की रणनीति पर पड़ सकता है.
अमेरिका-हूती बातचीत से सऊदी अरब की बढ़ी चिंता, लाल सागर में बदला समीकरण
US-Houthi deal: यमन में हूतियों के बढ़ते सैन्य दबदबे के बीच अमेरिका और हूती प्रतिनिधियों की ओमान में हुई गोपनीय बातचीत ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हूतियों ने अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाने का आश्वासन दिया, लेकिन सऊदी शिपिंग को लेकर स्थिति अलग बताई गई है.

Reuters ने 16 सितंबर की रिपोर्ट में पांच सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों की बैठक मस्कट स्थित अमेरिकी दूतावास में हुई थी. ओमान ने इस बातचीत को कराने में मदद की. हूती प्रतिनिधिमंडल में मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्देलमलिक अल-अजिरी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल बताए गए. रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों ने अमेरिकी अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि वो अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे और 2025 में अमेरिका के साथ हुए संघर्षविराम का पालन करेंगे.
सऊदी जहाजों को लेकर अलग तस्वीर
मामले का सबसे अहम हिस्सा सऊदी अरब से जुड़ा है. रॉयटर्स से बात करने वाले एक यमनी सूत्र के मुताबिक हूतियों ने अमेरिकी, इजरायली और दूसरे वाणिज्यिक जहाजों पर हमला नहीं करने की बात कही, लेकिन सऊदी जहाजों को इस आश्वासन से अलग रखा. हालांकि अमेरिका या हूतियों की ओर से ऐसी किसी औपचारिक डील की पुष्टि नहीं की गई है.
The Guardian ने भी रिपोर्ट किया कि मस्कट बातचीत के बाद अमेरिका ने यमन में हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के साथ सीधे सैन्य अभियान में उतरने से दूरी बनाए रखी है. अमेरिका की ओर से फिलहाल लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता को अपने प्रमुख हितों में बताया गया है.
लाल सागर का इलाका क्यों अहम है?
हूतियों ने हाल के अभियान में यमन के लाल सागर तट के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण मजबूत किया है. रॉयटर्स के मुताबिक इसमें मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंदेब के पास स्थित पेरिम द्वीप भी शामिल हैं. बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच बेहद अहम समुद्री रास्ता है. यहां किसी भी तरह की सैन्य या व्यापारिक रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है.
समाचार एजेंसी AP के मुताबिक सऊदी अरब इस समय हूती हमलों के बीच अपने मिसाइल डिफेंस संसाधनों को लेकर भी दबाव में है और उसने पश्चिमी तथा क्षेत्रीय सहयोगियों से मदद मांगी है. अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई से बच रहा है, हालांकि खुफिया सहयोग और अन्य सहायता जारी रहने की बात सामने आई है.
क्या वॉशिंगटन ने रियाद से दूरी बनाई?
फिलहाल इसे अमेरिका-सऊदी रिश्तों में किसी स्थायी बदलाव के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी. लेकिन इतना साफ है कि वॉशिंगटन हूतियों के साथ सीधे संवाद का रास्ता खुला रख रहा है. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी अमेरिका और हूतियों के बीच सीधे संपर्क की पुष्टि की है.
यानी तस्वीर फिलहाल इतनी भर है कि अमेरिका हूतियों से बातचीत कर रहा है, हूती अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को लेकर कुछ आश्वासन दे रहे हैं और सऊदी अरब को अपने खिलाफ चल रहे अभियान का सामना ज्यादा हद तक खुद करना पड़ सकता है. औपचारिक समझौते की पुष्टि होने तक इससे आगे की किसी भी व्याख्या को सावधानी से देखना होगा.
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