''...therfore we have come here, we approached Mr Amit Shah and through him, this press conference is conducted...''एकबारगी सुनने पर यही लगता है कि इस वाक्य में एक बेहद अहम कीवर्ड था - अमित शाह. अगर ये सही था, तो पूरा तर्जुमा यूं बना,
''...तो हम यहां आए, मिस्टर अमित शाह से मिले, और उन्हीं के सहयोग से ये प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है...''ट्विटर पर ऐसा बहुत सारे लोगों को लगा. कांग्रेस नेता शकील अहमद का ट्वीट आपने ऊपर देखा ही. हम यहां नीले तिलकधारी कुछ और उदाहरण दे रहे हैं-
सबकी सुई अमित शाह पर अटक गई. क्योंकि अमित शाह सोहराबुद्दीन शेख फर्ज़ी मुठभेड़ केस में अभियुक्त थे. तो इस बात पर लाज़मी तौर से ऐतराज जताया जाने लगा कि एक जज का परिवार एक ऐसे अभियुक्त की मदद क्यों लेगा, जिस पर बिना साक्ष्य ही सही, जज पर दबाव डालने और अंततः उनकी मौत के पीछे होने का संदेह हो. अटकलें लगने लगीं कि कहीं लोया का परिवार सचमुच दबाव में तो नहीं.
'अमित शाह' नहीं 'अमीत सर' असल बात ये थे कि लगभग सभी से (शुरुआत में हम से भी) सुनने में गलती हुई थी. लोया परिवार के दोस्त दरअसल अमीत सर कह रहे हैं, जो अमित शाह जैसा सुनाई देता है. अमीत सर माने लॉ फर्म नाइक एंड नाइक के अमीत बी नाइक. नाइक एंड नाइक मुंबई की टॉप लॉ फर्म में गिनी जाती है. अमिताभ बच्चन भी इसके क्लाइंट हैं. अनुज की प्रेस कॉन्फ्रेंस नाइक एंड नाइक के दफ्तर में ही हुई थी. लोया की मौत पर संदेह को लेकर लोगों की अपनी-अपनी राय है. लेकिन एक बात तय है. अनुज की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के पीछे अमित शाह नहीं थे. प्रत्यक्ष तो कतई नहीं. और न ही उनका नाम वहां लिया गया. ये भी पढ़ेंः
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