क्या भारत पर अब अमेरिका 100% टैरिफ लगाने जा रहा है? क्योंकि अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाला एक बिल पास कर दिया है. इस बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को ये ताकत दी गई है कि वो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक का टैरिफ लगा सकते हैं.
भारत पर लगेगा 100% टैरिफ? अमेरिकी संसद में पास हुआ नया बिल पूरा खेल बदल देगा
अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाला एक बिल पास कर दिया है. इस बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को ये ताकत दी गई है कि वो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक का टैरिफ लगा सकते हैं. जानिए क्या कहता है ये बिल, और अब आगे क्या होने वाला है.

और कहा जा रहा है कि इस लिस्ट में भारत और चीन का नाम खास तौर पर हो सकता है. लेकिन, इस बिल में किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है. बिल के Section 113 में वॉल्यूम के आधार पर रूस के पांच सबसे बड़े तेल और गैस खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान था.
यहां एक और ज़रूरी बात समझिए. अभी भारत पर 100% टैरिफ नहीं लगा है. इस बिल के पास होने का मतलब सिर्फ इतना है कि अगर ये बिल कानून बनता है, तो ट्रंप के पास ऐसा 100 फीसदी टैरिफ लगाने की पावर होगी. इसका इस्तेमाल करना या न करना ट्रंप के हाथ में होगा.
असल में, अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले बिल को मंजूरी दे दी है. बिल के सपोर्ट में 262 वोट पड़े और 159 सांसदों ने इसका विरोध किया. इस बिल के सपोर्ट में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों के साथ कई डेमोक्रेट सांसदों ने भी वोट किया.
इस बिल का नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है. ये बिल पिछले महीने 7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट से भी पास हो चुका है. वहां इसके पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट पड़े थे.
अब बिल व्हाइट हाउस जाएगा. यानी आखिरी फैसला राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को लेना है. ट्रंप के इस बिल पर साइन करने की उम्मीद है. लेकिन सवाल ये है कि इस बिल में ऐसा क्या है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है?
इसे समझिए. रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जंग चल रही है. अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूस पर दबाव बनाने के लिए पहले से कई तरह के प्रतिबंध लगा चुके हैं. अब अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव और बढ़ाना चाहता है. इस बिल के तहत रूस के तेल और गैस से जुड़े कारोबार पर नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. साथ ही रूस के डिफेंस सेक्टर पर भी सख्ती बढ़ाने का प्रावधान है. इसके अलावा रूस की तथाकथित Shadow Fleet पर भी कार्रवाई करने का रास्ता बनाया गया है.
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भारत के लिए क्यों ज़रूरी है?बिल के मुताबिक, अगर कोई देश रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका उस देश से आने वाले सामान पर 100% तक का टैरिफ लगा सकता है. और यहां भारत और चीन अहम हो जाते हैं. क्योंकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है.
अब इसे एक उदाहरण से समझिए. मान लीजिए भारत की कोई कंपनी अमेरिका में 100 रुपये का सामान बेचती है. अगर उस सामान पर 100% टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिकी बाजार में उस सामान पर 100 रुपये तक का अतिरिक्त टैक्स लग सकता है. यानी सामान महंगा हो जाएगा.
लेकिन एक बार फिर अभी ऐसा नहीं हुआ है. बिल ने सिर्फ ट्रंप को ये अधिकार दिया है कि वो ऐसा टैरिफ लगा सकते हैं. कब लगाएंगे. लगाएंगे भी या नहीं. कितना लगाएंगे. ये फैसला ट्रंप के हाथ में होगा. अमेरिका में इस बिल के समर्थकों का कहना है कि इस तरह का टैरिफ रूस पर दबाव बढ़ाएगा.
उनका तर्क है कि अगर भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी बाजार में भारी टैरिफ भरना पड़ता है तो वे रूस से तेल खरीदने के फैसले पर दोबारा सोच सकते हैं.
सांसदों में बिल पर मतभेदरिपब्लिकन सांसद माइकल मैककॉल ने सदन में बिल को आगे बढ़ाया. उनका कहना है कि इसका मकसद रूस पर ज्यादा से ज्यादा आर्थिक दबाव डालना और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की तरफ लाना है. लेकिन सभी अमेरिकी सांसद इस बात से सहमत नहीं थे.
डेमोक्रेट सांसदों ने इस बिल में ट्रंप को दी जा रही ताकत पर सवाल उठाए. डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि इससे एक ऐसे राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की और ताकत मिल जाएगी, जो पहले से ही अमेरिकी नीति में टैरिफ का काफी इस्तेमाल कर रहे हैं.
अगर ट्रंप इस ताकत का इस्तेमाल करते हैं और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाते हैं, तो अमेरिकी बाजार में भारत से जाने वाले सामान पर भी भारी टैरिफ लग सकता है. इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर असर पड़ सकता है. अब अमेरिकी हाउस से बिल पास हो चुका है. अगर ट्रंप इस पर साइन कर देते हैं, तो ये कानून बन जाएगा.
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