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कोरोना टीके को लेकर प्रशांत भूषण ने ऐसा क्या लिख दिया कि लोगों ने दौड़ा दिया

कोरोना वायरस से फैली कोविड-19 महामारी को नियंत्रित करने के लिए इसके वैक्सीनेशन को अहम कड़ी माना गया है. हालांकि इस बीमारी के खिलाफ तैयार हुई वैक्सीन कई तरह के सवालों के घेरे में रही हैं. इनमें एक अहम सवाल ये है कि क्या वाकई में ये टीके इस महामारी को कंट्रोल करने में सक्षम हैं और क्या ये पूरी तरह सुरक्षित हैं. इन सवालों को 28 जून को अंग्रेजी अखबार दी हिंदू में छपी एक रिपोर्ट ने और बल दे दिया. इस रिपोर्ट को चर्चित वकील प्रशांत भूषण ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर करते हुए कोरोनो वैक्सीनों की क्षमता पर सवाल उठाया. हालांकि ऐसा करना उन्हें भारी पड़ गया. उनकी टिप्पणी को ना सिर्फ आम लोगों ने नकारा, बल्कि केंद्र सरकार के कोविड वर्किंग ग्रुप के प्रमुख एनके अरोड़ा ने भी खारिज कर दिया.

क्या कहती है रिपोर्ट?

रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली के एक निवासी गंगा प्रसाद गुप्ता ने 14 अप्रैल को अपनी पत्नी और पांच बेटियों के साथ कोरोना वायरस का टीका लगवाया था. अखबार ने पीड़ित से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि कोविड टीका लेने के बाद गंगा प्रसाद की पत्नी सविता बीमार पड़ीं और 10 दिनों के बाद गुजर गईं. इससे आहत गंगा प्रसाद और उनके परिवार का कहना है,

‘वैक्सीन लेने के बाद सविता की हालत बिगड़ती चली गई. सविता की मौत के बाद परिवार में कोई वैक्सीन नहीं ले रहा. यहां तक कि मेरे पड़ोसियों ने भी वैक्सीन लेने से इन्कार कर दिया. मैं आजतक खुद को कोसता हूं कि मैंने सविता को टीका क्यों दिलवाया. मैंने सोचा था कि टीका हमें वायरस से बचा लेगा लेकिन उसने तो सविता को मार डाला.’

क्या बोले प्रशांत भूषण?

रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने अपने ट्विटर पेज पर शेयर किया. उन्होंने लिखा कि सरकार वैक्सीन से होने वाले रिएक्शन से जुड़ी घटनाओं की निगरानी नहीं कर रही है और न ही उनका डेटा जारी कर रही है. प्रशांत भूषण ने लिखा,

“कई लोगों, जिनमें मेरे दोस्त और परिवार के लोग भी शामिल हैं, ने मुझ पर वैक्सीन को लेकर पैदा हुए संदेह को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. ऐसे में मुझे अपनी स्थिति स्पष्ट करने दें. मैं वैक्सीन विरोधी नहीं हूं. लेकिन मेरा मानना है कि एक्सपेरिमेंटल और टेस्ट न किए गए टीकों के यूनिवर्सल वैक्सीनेशन को बढ़ावा देना गैर-जिम्मेदाराना है, खासकर युवा और कोविड से ठीक हुए लोगों के लिए.”

प्रशांत भूषण ने लिखा है कि स्वस्थ युवाओं में कोरोना वायरस के कारण गंभीर प्रभाव या मृत्यु होने की संभावना बहुत कम होती है. उनका कहना है कि वैक्सीनेशन के कारण युवाओं के मरने की संभावना अधिक होती है. वरिष्ठ वकील ने एक अन्य ट्वीट में लिखा,

“वैक्सीन की तुलना में कोरोना वायरस से रिकवर हुए लोगों की नेचुरल इम्यूनिटी ज्यादा बेहतर है. वैक्सीन लोगों की नेचुरल इम्यूनिटी को कम कर सकती है.”

एक और ट्वीट में प्रशांत ने लिखा कि उन्होंने अभी तक कोरोना की वैक्सीन नहीं ली है और न ही लेने का इरादा है.

भड़क गए लोग!

कोरोना वायरस टीके को लेकर प्रशांत भूषण की राय से ट्विटर पर लोग भड़क गए. उन्होंने सीनियर एडवोकेट को जमकर लताड़ लगाई. जाने-माने पटकथा लेखक और गीतकार वरुण ग्रोवर ने लिखा,

“सर 1 रुपया लीजिए और इस बेतुकी अवैज्ञानिक बातों को लेकर चुप रहिए. आप इस दुष्प्रचार से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी मानवता को नुकसान पहुंचा रहे हैं.”

रोहित नाम के यूजर ने लिखा,

“कोविड के कारण मेरे दो करीबी दोस्तों की मौत हो गई. ये बकवास बंद कीजिए.”

श्रीधर जोशी नाम के शख्स ने लिखा,

“प्लीज़ वैक्सीन मत लीजिए. देश आप पर वैक्सीन की दो ख़ुराक बर्बाद करने का ज़ोखिम नहीं उठा सकता.”

कई लोगों ने ट्विटर को टैग कर प्रशांत भूषण पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया और उन पर कार्रवाई करने की मांग की. वहीं, कुछ ने कहा कि उन्हें प्रशांत भूषण से ऐसी उम्मीद नहीं थी.

CNTB के प्रमुख ने भी खारिज किया

कोरोना वैक्सीन पर प्रशांत भूषण की टिप्पणी को खारिज करने वालों में भारत की कोविड नेशनल टेक्निकल बॉडी यानी CNTB के प्रमुख एनके अरोड़ा भी शामिल रहे. इंडिया टुडे से जुड़ीं स्नेहा मोरदानी की रिपोर्ट के मुताबिक, एनके अरोड़ा ने कहा है,

“प्रशांत भूषण के इस बयान का कोई मतलब नहीं है. वो भी ऐसे समय में जब सरकार का ध्यान वैक्सीन को लेकर पैदा हुए संदेह को कम करने और गलत जानकारी को सामने लाने पर केंद्रित है.”

एनके अरोड़ा के मुताबिक, सरकार के पास इम्यूनाइजेशन के बाद होने वाले विपरीत प्रभावों के मामलों को ट्रैक करने का सिस्टम है. उनका कहना है कि ये सिस्टम देश के 700 से ज्यादा जिलों में सक्रिय है. केंद्र के कोविड वर्किंग ग्रुप के प्रमुख ने ये भी कहा कि सरकार ने ही कोविड वैक्सीनेशन से मृत्यु होने के सबसे पहले मामले की जानकारी दी थी. उन्होंने बताया कि कोरोना के टीके के विपरीत प्रभाव से जुड़े सभी मामलों की विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित नियमों के तहत व्यवस्थित तरीके से जांच की जाती है. उन्होंने ये दावा भी किया कि ये जांच और अध्ययन प्रक्रिया ठोस और पारदर्शी है.

इसके साथ ही एनके अरोड़ा ने कोविड-19 वैक्सीनों के सुरक्षित होने की बात दोहराई. उन्होंने ये भी कहा कि भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत 32 करोड़ से ज्यादा लोगों ने कोरोना वैक्सीन लगवाई है. कुछ लोगों को एक-दो दिन दर्द या बुखार की समस्या हो सकती है. लेकिन इसमें चिंता की कोई बात नहीं है. एनके अरोड़ा की मानें तो इन वैक्सीन की एक प्रमुख बात ये है कि (नए वायरस) वैरिएंट आने के बावजूद ये टीके मरीजों को आईसीयू में भर्ती होने और मृत्यु से बचाने में सक्षम हैं.


विडियो- सीनियर वकील प्रशांत भूषण ने किसान आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्टाचार पर क्या कहा?

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