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लाखों का जूता बेचने वाली Prada ने कोल्हापुरी चप्पलों की नकल की, अब मानी अपनी गलती

Kolhapuri Chappal को भारत में साल 2019 से GI टैग मिला हुआ है. Prada ने अपने फैशन शो में इन चप्पलों से प्रेरित डिजाइन वाले सैंडल दिखाए. सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि कंपनी इसको लाखों रूपये की कीमत पर बेच रही है. अब मामले में प्राडा का जवाब आया है.

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28 जून 2025 (अपडेटेड: 28 जून 2025, 07:25 PM IST)
Kolhapuri Chappal Controversy
कोल्हापुरी चप्पल विवाद पर प्राडा ने जवाब दिया है. (तस्वीर: इंडिया टुडे)
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इटली के लग्जरी फैशन हाउस प्राडा ने आखिरकार मान ही लिया कि उसने कोल्हापुरी चप्पलों की नकल (Prada Kolhapuri Designs) की. दरअसल, मामला ये है कि हाल ही में ‘प्राडा मेंस फैशन शो’ का आयोजन हुआ था. कंपनी ने इस शो में कुछ सैंडल का प्रदर्शन किया. मॉडल इनको पहनकर रैंप वॉक करते दिखे. इन सैंडल के बारे में कहा गया कि इनके डिजाइन में, महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हाथ से बनाए जाने वाली चप्पलों की नकल की गई है. 

बता दें कि भारत में 2019 से कोल्हापुरी चप्पलों को GI टैग मिला हुआ है. GI टैग वाले प्रोडक्ट की गुणवत्ता, प्रतिष्ठा, या अन्य विशेषताएं, उस स्थान से जुड़ी होती हैं, जहां से उनका उत्पादन शुरू हुआ हो.

शुरुआत में कंपनी ने नकल करने के आरोपों पर चुप्पी बनाए रखी. इसके कारण विवाद बढ़ता गया. महाराष्ट्र के कारीगर समूहों ने इसकी आलोचना की. महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) ने औपचारिक रूप से चिट्ठी लिखकर कंपनी को फटकार भी लगाई. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, MACCIA को दिए जवाब में प्राडा के प्रवक्ता ने कहा है,

हम स्वीकार करते हैं कि हाल ही में प्राडा मेंस फैशन शो में दिखाए गए सैंडल, पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प जूतों से प्रेरित हैं, जिनकी विरासत सदियों पुरानी है. हम इस तरह के भारतीय शिल्प कौशल के सांस्कृतिक महत्व को पूरी तरह समझते हैं और इसका सम्मान करते हैं.

प्राडा लाखों रूपये में बेच रहा कोल्हापुरी चप्पल?

इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने ये भी दावा किया कि प्राडा, ऐसे डिजाइन वाले चप्पल लाखों रुपये की कीमत पर बेचे जा रहे हैं. कंपनी ने इस बात से इनकार किया. 

प्राडा ने ये स्पष्ट किया है कि फैशन शो में दिखाए गए सैंडल के प्रोडक्शन को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. कंपनी के कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी के ग्रुप हेड लोरेंजो बर्टेली ने कहा है,

इस बात पर ध्यान दें कि फिलहाल ये पूरा डिजाइन क्लेक्शन अभी तैयारी के शुरुआती चरण में है. किसी भी प्रोडक्शन या व्यावसायीकरण (खरीद-बिक्री) की पुष्टि नहीं की गई है. 

सही पहचान और उचित मुआवजे की मांग

MACCIA के अध्यक्ष ललित गांधी ने इस संबंध में फैशन हाउस को पत्र लिखा था. 28 जून को उन्होंने बताया,

कोल्हापुरी चप्पल बहुत अलग हैं और हम चाहते हैं कि इनको नया बाजार मिले. लेकिन इसे सही पहचान भी मिलनी चाहिए.

अपने पत्र में MACCIA ने स्थानीय कारीगरों के लिए साझेदारी के मौके और उचित मुआवजे की मांग की थी. उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान करने की बात लिखी. साथ ही उन्होंने कहा कि कंपनी को फैशन क्षेत्र की नैतिकता का पालन करना चाहिए.

ये भी पढ़ें: इटली के फैशन शो में मॉडल्स की चप्पल देखकर भारत के लोग क्यों भड़क गए?

इसके जवाब में लोरेंजो बर्टेली ने कहा है कि प्राडा भारतीय कारीगर समूहों के साथ सार्थक आदान-प्रदान के लिए बातचीत को तैयार है. उन्होंने बताया कि प्राडा ने अतीत में दूसरे क्लेक्शन के मामलों में भी ऐसा किया है, ताकि कारीगरों के शिल्प को सही पहचान मिल सके.

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