Submit your post

Follow Us

उत्तराखंड: सीएम बनने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने कितने विभाग अपने पास रखे?

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शपथ ग्रहण के दो दिन बाद ही यानी 6 जुलाई को मंत्रियों को विभाग बांट दिए हैं. उन्होंने गृह और वित्त समेत 15 महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं. जबकि सतपाल महाराज को 8 विभाग और हरक सिंह रावत को 7 विभाग सौंपे गए हैं. रविवार 4 जुलाई को ही पुष्कर सिंह धामी ने सीएम पद की शपथ ली थी. उनसे पहले तीरथ सिंह रावत और उनके पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत के पास सीएम पद की जिम्मेदारी थी.

किसको मिला कौन सा विभाग?

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पास 15 विभाग रखे हैं. इनमें गृह और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों के अलावा कार्मिक एवं सतर्कता, राज्य सम्पत्ति, राजस्व, न्याय, सूचना सचिवालय प्रशासन, सामान्य प्रशासन, औद्योगिक विकास (खनन), तकनीकी शिक्षा, नागरिक उड्डयन और नियोजन विभाग शामिल हैं.

वहीं, मंत्री सतपाल महाराज को सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, लघु सिंचाई, जलागम प्रबंधन, भारत नेपाल उत्तराखंड नदी परियोजनाएं, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व और लोक निर्माण विभाग सौंपे गए हैं.

डॉक्टर हरक सिंह रावत को वन, पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन, श्रम, कौशल विकास एवं सेवायोजन, आयुष शिक्षा, ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा जैसे विभागों की जिम्मेदारी दी गई है.

अन्य मंत्रियों की बात करें तो बंशीधर भगत को विधायी एवं संसदीय कार्य, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, शहरी विकास, आवास, सूचना एवं विज्ञान प्रोद्योगिकी विभाग सौंपे गए हैं.

यशपाल आर्य के कंधों पर परिवहन, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, छात्र कल्याण, निर्वाचन और आबकारी विभाग का कार्यभार डाला गया है.

इसके अलावा विशन सिंह को पेयजल, वर्षा जल संग्रहण, ग्रामीण निर्माण और जनगणना विभाग दिए गए हैं.

कौन हैं पुष्कर धामी

पुष्कर सिंह धामी ऊधमसिंह नगर जिले की खटीमा सीट से बीजेपी के विधायक हैं. पहले भी वह इसी सीट से विधायक चुने जा चुके हैं. साल 2012 में पहली बार उन्होंने विधायकी चुनाव जीता था. 2017 के चुनाव में भी वह यहां से विधायक चुने गए. पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड में बीजेपी के युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. वह साल 2002 से 2008 तक इस पद पर रहे थे.

अखिल भारतीय विद्या परिषद के सदस्य के रूप में धामी ने साल 1990 से 1999 तक जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक काम किया है. इस दौरान वे एबीवीपी के विभिन्न पदों पर रहे. धामी का दावा है कि छह सालों तक प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जगह-जगह घूमकर युवा बेरोजगारों को संगठित करने का काम किया.

16 सितंबर 1975 को पिथौरागढ़ के टुण्डी गांव में जन्मे पुष्कर सिंह धामी तीन बहनों के अकेले भाई हैं. उनके पिता भारतीय सेना में रह चुके हैं. धामी ने मानव संसाधन प्रबंधन एवं औद्योगिक संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन और एलएलबी की डिग्री ली है.

पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर आवाज उठाते रहे हैं. युवाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. राजपूत समुदाय से आने वाले धामी को RSS का करीबी माना जाता है. वे महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के नजदीकी भी बताए जाते हैं.


वीडियो- मध्यप्रदेश, गोवा और हरियाणा समेत 8 राज्यों को मिले नए राज्यपाल

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

टॉप खबर

दलितों के घर ढहाने और महिलाओं से छेड़खानी के आरोपों पर क्या बोली आजमगढ़ पुलिस?

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने इसे 'पुलिस की गुंडागर्दी' करार दिया है.

मुस्लिम औरतों की बोली लगाने वाली वेबसाइट की लिंक शेयर कर घिरा राइट विंग 'पत्रकार'

बवाल हुआ तो शिकायत करने वाली औरतों को ही कोसने लगे.

नेमावर हत्याकांड: आरोपी सुरेंद्र चौहान की प्रॉपर्टी पर चली जेसीबी, CBI जांच की मांग उठी

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा नेता होने के चलते सुरेंद्र चौहान को इस मामले में संरक्षण मिला.

जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर धमाका, DGP दिलबाग सिंह बोले-ड्रोन से हुआ हमला

दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है.

आंदोलन के सात महीने पूरे, किसानों ने देशभर में राज्यपालों को सौंपे ज्ञापन,कुछ जगहों पर झड़प

चंडीगढ़ और पंचकुला में बवाल.

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ही नहीं, शशि थरूर का अकाउंट भी लॉक कर दिया था ट्विटर ने

ट्विटर ने क्या वजह बताई?

एक्ट्रेस पायल रोहतगी को अहमदाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया

मामला एक वायरल वीडियो से जुड़ा है.

CBSE और ICSE की परीक्षाएं रद्द करने के खिलाफ याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया

नंबर देने के फॉर्मूले से सुप्रीम कोर्ट भी सहमत.

LJP में कलह की वजह बताए जा रहे सौरभ पांडेय के बारे में रामविलास पासवान ने चिट्ठी में क्या लिखा था?

चिराग को राजनीति में आने की सलाह किसने दी थी?

सरकार फिल्मों के सर्टिफिकेशन में क्या बदलाव करने जा रही, जो फ़िल्ममेकर्स की आज़ादी छीन सकता है?

कुछ वक़्त से लगातार हो रहे हैं फ़ेरबदल.