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क्या संविदा नौकरी पर यूपी सरकार ने यू-टर्न ले ले लिया?

उत्तर प्रदेश. सरकारी नौकरियों में पांच साल की अनिवार्य संविदा लागू किए जाने की खबर आने के बाद से बवाल मचा हुआ है. जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. बेरोजगार युवा सड़कों पर है. विपक्ष सरकार पर हमले कर रहा है. यहां तक कि बीजेपी के अंदर ही विरोध देखने को मिला. इसी बीच यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस खबर को सिरे से ही खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि ये खबर कोरी अफवाह है.

इंडिया टुडे के पत्रकार कुमार अभिषेक की रिपोर्ट के मुताबिक, केशव मौर्य के कहा जो लोग कोहराम मचा रहे हैं, वो अफवाह फैला रहे हैं. संविदा की जो पहले की व्यवस्था है उसमें ना कोई परिवर्तन हुआ है और ना अभी होने वाला है. ना ही इस बारे में कोई सरकार के स्तर पर विचार हुआ है. सरकार ने अभी संविदा और रिटायरमेंट पर कोई विचार नहीं किया है. उन्होंने कहा –

मैं युवाओं और छात्रों से अपील करता हूं, आह्वान भी करता हूं कि वह किसी के बहकावे में ना आएं. सरकार उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है और सरकार उनके साथ है.

प्रयागराज पहुंचे डिप्टी सीएम ने साफ कर दिया कि सरकार यूपी में सरकारी नौकरियों में पांच साल संविदा पर रखे जाने और 50 साल में रिटायरमेंट के मामले में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है.

पीएम मोदी से बर्थ-डे वाले दिन 17 सिंतबर को प्रयागराज में कांग्रेस पार्टी और अन्य युवाओं ने पांच साल के लिए संविदा वाले मसले पर विरोध प्रदर्शन किया था. पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा था.

पहले खबर क्या थी?

खबर आई थी कि यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार संविदा यानी कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम से सरकारी नौकरियां देने पर विचार कर रही है. खबर थी कि प्रस्ताव है कि उत्तर प्रदेश में ग्रुप ‘बी’ और ‘सी’ की नौकरियों के लिए अब संविदा पर भर्ती की जाए. यानी भर्ती निकाली जाएगी. लोगों का सेलेक्शन होगा. फिर पांच साल के कॉन्ट्रैक्ट पर काम कराया जाएगा. इन पांच साल में हर छह महीने पर एक टेस्ट लिया जाएगा, जिसमें कम से कम 60 फीसदी अंक पाना अनिवार्य होगा. दो छमाही में इससे कम नंबर लाने वाले लोगों को सेवा से बाहर कर दिया जाएगा.

‘अमर उजाला’ की खबर के मुताबिक, पांच साल की संविदा के दौरान किए गए काम को Measurable Key Performance Indicator यानी MKPI के पैमाने पर मापा जाएगा. सरकार MKPI फॉर्मूला भी तय कर रही है. पांचवें साल छह महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी. कहा जा रहा है कि संविदा पर नियुक्ति के दौरान मूल पदनाम के बजाय सहायक पदनाम दिया जाएगा. जैसे शिक्षक के लिए सहायक शिक्षक.

लेकिन अब इस तरह की खबर को डिप्टी सीएम ने महज अफवाह बताया है.

ये भी पढ़ें: क्या है योगी सरकार की संविदा पर भर्ती का फॉर्मूला, जिस पर बवाल मचा है

वीडियो देखें:  क्या बेरोज़गार युवकोंं ने लखनऊ में CM योगी का काफ़िला रोक दिया?

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