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केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान नहीं रहे

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान नहीं रहे. वे पिछले कुछ समय से बीमार थे. उनके बेटे चिराग पासवान ने ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी दी.

चिराग पासवान ने ट्वीट किया-

पापा, अब आप इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मुझे पता है, आप जहां भी हैं, हमेशा मेरे साथ हैं. Miss you Papa.

दिल्ली में इलाज चल रहा था

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की तबीयत काफी समय से ठीक नहीं चल रही थी. उनका इलाज दिल्ली के एक अस्पताल में चल रहा था. 4 अक्टूबर को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की जानकारी सामने आई थी. तब चिराग पासवान ने बताया था कि उनके दिल का ऑपरेशन हुआ है.

राम विलास पासवान के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, लिखा,

मेरा दुख शब्दों से परे है. हमारे देश में एक शून्य पैदा हो गया है जो शायद कभी नहीं भरेगा. राम विलास पासवान जी का निधन एक व्यक्तिगत क्षति है. मैंने एक दोस्त, मूल्यवान सहयोगी और ऐसे व्यक्ति को खो दिया है जो हर गरीब व्यक्ति के लिए यह सुनिश्चित करने को लेकर बेहद भावुक था कि वह गरिमा का जीवन जीए.

राम विलास पासवान जी ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के जरिए राजनीति में कदम रखा. एक युवा नेता के रूप में, उन्होंने आपातकाल के दौरान अत्याचार और हमारे लोकतंत्र पर हमले का विरोध किया.वह एक उत्कृष्ट सांसद और मंत्री थे, जिन्होंने कई नीतिगत क्षेत्रों में योगदान दिया.

साथ में काम करना, पासवान जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना एक अविश्वसनीय अनुभव रहा है. मंत्रिमंडल की बैठकों के दौरान उनके हस्तक्षेप व्यावहारिक थे, राजनीतिक ज्ञान, राज्य-कौशल से लेकर शासन के मुद्दों तक, वह प्रतिभाशाली थे. उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना. शांति.

देश के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द के ऑफिस की ओर से ट्वीट किया गया,

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन से देश ने एक दूरदर्शी नेता खो दिया है. उनकी गणना सर्वाधिक सक्रिय तथा सबसे लंबे समय तक जनसेवा करने वाले सांसदों में की जाती है. वे वंचित वर्गों की आवाज़ मुखर करने वाले तथा हाशिए के लोगों के लिए सतत संघर्षरत रहने वाले जनसेवक थे.

आपातकाल विरोधी आंदोलन के दौरान जयप्रकाश नारायण जैसे दिग्गजों से लोकसेवा की सीख लेनेवाले पासवान जी फायरब्रांड समाजवादी के रूप मे उभरे. उनका जनता के साथ गहरा जुड़ाव था और वे जनहित के लिए सदा तत्पर रहे. उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी गहन शोक-संवेदना.

राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले नेता

विरोधी उन्हें ‘मौसम वैज्ञानिक’ कहते थे. मतलब ये कि सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा, वो पहले ही भांप लेते थे. रामविलास पासवान बिहार की सियासत के रास्ते केंद्र तक पहुंचे. साल 1969 से 2019 तक यानी टोटल 50 साल से किसी न किसी पद पर रहे. वे साल 69 में पहली बार विधायक बने थे. फिर 77 में हाजीपुर से सांसद बने. और मोरारजी भाई देसाई की जनता पार्टी सरकार का हिस्सा रहे.

तब से गंगा में न जाने कितना पानी बह गया, मगर पासवान की सियासत के दरख्त न हिले, न डुले. वे खड़े के खड़े रहे. अपनी जगह अडिग-अटल. पासवान की इस कला के लोग जबरदस्त मुरीद थे. मोदी सरकार में 30 मई, 2019 को उन्होंने दोबारा बतौर कैबिनेट मंत्री शपथ ली.

जेपी आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था

रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई, 1946 को बिहार के खगड़िया जिले के सहरबन्नी गांव में अनुसूचित जाति परिवार में हुआ था. शुरुआती पढ़ाई-लिखाई गांव में हुई. लॉ ग्रेजुएट और मास्टर ऑफ आर्ट्स किया. छात्र राजनीति में सक्रिय रहे. फिर बिहार पुलिस में नौकरी की. पहली शादी 1960 में खगड़िया की राजकुमारी देवी से हुई. 1981 में उन्होंने राजकुमारी को तलाक दे दिया. उनसे उनकी दो बेटियां हैं, उषा और आशा. पासवान ने दूसरी शादी 1983 में अमृतसर की रहने वाली एयर होस्टेस और पंजाबी हिंदू रीना शर्मा से की. उनसे एक बेटा और बेटी हैं. बेटा चिराग पासवान भी राजनीति में हैं. राजनारायण और जयप्रकाश नारायण को अपना आदर्श माना. छात्र जीवन में जेपी के समाजवादी आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.


चिराग पासवान ने बताया- क्या सोच कर रामविलास पासवान दोबारा BJP के साथ आए?

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