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गर्मी की छुट्टियों में आने का वादा किया था, अब परिवार शहीद की बॉडी के इंतज़ार में है

15 जून की रात लद्दाख की गलवान घाटी में चीन और भारत के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई. इसमें 20 जवान शहीद हो गए. इन जवानों में बिहार रेजिमेंट के नंदूराम सोरेन और चंद्रकांत प्रधान भी शामिल हैं.

चंद्रकांत प्रधान ओडिशा के कंधमाल जिले के रहने वाले थे. छह साल पहले बिहार-16 रेजिमेंट जॉइन की थी. लद्दाख में दो साल पहले पोस्टिंग हुई थी उनकी. मोहम्मद सूफियान के मुताबिक़, उनकी मां बिलासिनी प्रधान ने ‘इंडिया टुडे’ को बताया,

‘हमें यही पता है कि मेरा बेटा भारत के लिए लड़ा और शहीद हुआ. पिछली बार वो हमसे मिलने दिसंबर में आया था और 16 फरवरी को वापस गया था. उसने कहा था कि वो गर्मियों की छुट्टी में वापस आएगा, लेकिन लॉकडाउन की वजह से आ न सका. आखिरी बार उससे बात अप्रैल में हुई थी, फोन पर.’

पूरे परिवार में चंद्रकांत इकलौते कमाने वाले थे. इनके दो छोटे भाई और एक बड़ी बहन है. चंद्रकांत की शादी नहीं हुई थी.

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शहीद चंद्रकांत के माता-पिता. (तस्वीर: मोहम्मद सूफियान/इंडिया टुडे)

इन्हीं के साथ शहीद हुए ओडिशा के मयूरभंज जिले के नंदूराम सोरेन.

उनके कजिन डोमन मांझी ने बताया कि उन्हें बीती रात खबर मिली कि उनके भाई शहीद हो गए हैं. नंदूराम ने 1997 में आर्मी जॉइन की थी. अभी नायब सूबेदार के पद पर थे. मांझी ने मीडिया को बताया,

‘उसकी शहादत की खबर सुनकर हम सब टूट गए हैं. न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव को उन पर गर्व था. बहुत दोस्ताना स्वभाव था, इसलिए लोग उनसे प्रेम करते थे’.

नन्दूराम की तीन बेटियां हैं और तीन बहनें. सुदाम मरांडी ओडिशा के राजस्व और आपदा मंत्री हैं. मयूरभंज जिले से ही हैं. उन्होंने शहीद नंदूराम का नाम लेते हुए कहा कि उनकी सांत्वना परिवार वालों के साथ है.

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शहीद नंदूराम सोरेन. (तस्वीर: मोहम्मद सूफियान/इंडिया टुडे)

शहीद हुए सभी 20 भारतीय सैनिकों के नाम पहले ही आ चुके हैं. ‘इंडिया टुडे’ के सीनियर एडिटर शिव अरूर ने इस लिस्ट को ट्वीट किया.

क्या हुआ था 15 जून को?

शिव अरूर ने बताया कि 6 जून को भारत और चीन के लेफ्टिनेंट जनरल की मीटिंग हुई थी. सेनाओं को पीछे खींचने की बात पर सहमति बनी थी. फिर खबर आई थी कि चीन ने गलवान घाटी के पास से अपना कैंप हटा लिया है, लेकिन कुछ ही दिन बाद वो कैंप दोबारा बना लिया गया. कर्नल संतोष बाबू कुछ भारतीय सैनिकों के साथ 15 जून को गलवान घाटी के पास गए. ये देखने के लिए कि कैंप दोबारा कैसे आ गया है. उस वक्त चीनी सैनिक पूरी तरह से चौकन्ने बैठे थे.

जैसे ही भारतीय सैनिक कैंप के पास पहुंचे, उन पर हमला कर दिया गया. कर्नल संतोष बाबू सैनिकों के साथ लौटे, लेकिन उस दौरान कुछ भारतीय सैनिकों को चीनी सेना ने अपनी कैद में रख लिया था. कर्नल संतोष बाबू दोबारा कैंप के पास गए, इस बार और सैनिकों के साथ. उनका मकसद था भारतीय सैनिकों को चीनी सैनिकों की कैद से छुड़ाना. इसी दौरान दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हो गई.


वीडियो: गलवान घाटी में भारत-चीन के सैनिकों की हिंसक झड़प पर PM मोदी ने क्या कहा?

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