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पड़ोस में नवाज तो निपट गए, अपने यहां भी कुछ होगा क्या?

छोटे  में ऐड देखते थे, पनामा का. टैगलाइन थी, आखिरी कश तक दमदार पनामा. थोड़ा बड़े हुए तो एक पनामा और समझ आया.  पनामा नहर. प्रशांत और अटलांटिक महासागर को जोड़ता नहर मार्ग. लेकिन अब जब 2016 आ चुका है तो एक पनामा और सामने आया. वो पनामा, जहां एंग्री यंगमैन अमिताभ बच्चन अपना पैसा छुपाकर रखता है. जो टैक्स उन्हें इंडिया में देना चाहिए, जहाज कारोबारी अमिताभ बच्चन वो पैसा सात समंदर पार पनामा में छिपाकर रखते हैं. जी हां, साल का सबसे बड़ा खुलासा पनामा पेपर्स की शक्ल में बाहर आ चुका है.

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी करार दिया है. नवाज को प्रधानमंत्री रहते हुए विदेशों में अवैध संपत्ति अर्जित करने का दोषी पाया गया. इससे पहले 2016 में जब पनामा पेपर्स लीक में नवाज का नाम आया था, तो सुप्रीम कोर्ट ने 6 सदस्यों की एक जांच कमेटी बनाई थी. उस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी, जिसके बाद 28 जुलाई को पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से नवाज को दोषी करार दिया.  अप्रैल 2016 में नवाज शरीफ ने कहा था कि अगर उन्हें दोषी पाया गया, तो वो गद्दी छोड़ देंगे. नवाज से न भी कहते, तो नियम-संविधान के मुताबिक कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें गद्दी छोड़नी होगी. यहां तक कि वो अपनी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के अध्यक्ष पद पर भी नहीं बने रह पाएंगे. इसी के साथ पाकिस्तान में इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि अगला वजीर-ए-आजम कौन होगा.

अमिताभ बच्चन. पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ. ऐश्वर्या राय. फुटबॉलर लियोनेल मेसी. बिजनेसमैन केपी सिंह. गद्दाफी. बेनजीर भुट्टो. सीरिया के प्रेसिडेंट बसर अल असद. दाऊद इब्राहिम का दोस्त इकबाल मिर्ची. DLF मालिक केपी सिंह. गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी. हुस्नी मुबारक. इंडिया बुल्स कंपनी के मालिक समीर गहलौत. चीनी प्रेसिडेंट शी जिनफिंग.

ये वो नाम हैं, जिन्होंने अपनी दौलत छिपाने के लिए टैक्स हेवन की मदद ली. पनामा की लॉ फर्म मोसाक फोंसेका के खुफिया डॉक्यूमेंट लीक हो गए हैं. मोसाक फोंसेका पर अपनी क्लाइंट्स की मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी में मदद करने का आरोप है. कंपनी ने दावों को खारिज किया. ये डॉक्यूमेंट्स सबसे पहले जर्मन अखबार जिदोश्त शाइतुंग को मिले, जिसके बाद इंटरनेशनल कॉन्सोरटियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) के जरिए 100 मीडिया ग्रुप्स के बीच साझा किए गए. इस लिस्ट में करीब 500 से ज्यादा इंडियंस के नाम शामिल हैं.

PANAMA PAPERS REVEALED

द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, जिन लोगों का लिस्ट में नाम है ये लोग टैक्स हेवन देशों में मोसाक फोंसेका की मदद से कंपनियां शुरू करते थे. कुछ पर आरोप है कि वो इन कंपनियों के आधार पर बैंकों से लोन लेते.

टैक्स हेवन का क्या होता है मतलब?
टैक्स हेवन वो देश, जहां टैक्स बचाने के लिए सिस्टम में छूट रहती है. या ये कह सकते हैं कि बहुत सख्त रूल्स नहीं बने होते हैं. यहां टैक्स को लेकर कानून में तमाम तरह की छूट रहती हैं. आसानी से अकाउंट खुल जाते हैं. और सबसे अहम बात, यहां खुलने वाले अकाउंट्स सीक्रेट रखे जाते हैं. देशों की सरकार के दखल के बावजूद ये टैक्स हेवन देशों के बैंक आसानी से जानकारी मुहैया नहीं कराते हैं.

क्या है पनामा पेपर्स?
फरवरी 2004 तक इंवेस्टमेंट के जरिए रुपये को डॉलर में कंवर्ट कर आप बाहर नहीं ले जा सकते थे. लेकिन 2004 में RBI ने लिबेरालाइजड रेमिटेंस स्कीम की शुरुआत की. जिसके बाद से साल में करीब 25 हजार डॉलर को आप विदेश ले जा सकते थे. लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर ढाई लाख डॉलर कर दिया गया. इंडियंस बाहर जाकर इन रुपयों का कैसे भी इंवेस्ट कर सकते थे. लेकिन 2010 में RBI ने साफ किया कि विदेशों में शेयर तो खरीदे जा सकते हैं लेकिन किसी तरह की कोई कंपनी नहीं बनाई जा सकती.

लोगों ने इस रूल का भी जुगाड़ निकाल लिया कि ठीक है. कंपनी नहीं बनाई जा सकती, लेकिन किसी पहले से बनी कंपनी पर टेकओवर तो किया जा सकता है. यहां ये लॉ फर्म मोसाक फोंसेका की एंट्री होती है. ये फर्म धड़ल्ले से कंपनियों का रजिस्ट्रेशन करती रहती है. कोई भी बंदा इस कंपनी के पास आकर शेयर या नई कंपनी खरीद सकता है. 2013 में RBI की नोटिफिकेशन आती है. और कहा जाता है कि अगस्त 2013 तक जिन कंपनियों ने ओवरसीज कंपनियां बनाई हैं, उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है.

मोसाक फोंसेका ऐसी फर्म है, जो कंपनी के मालिकों के नाम का खुलासा नहीं करती है. सारे सीक्रेट्स दबाकर रखती है. पनामा पेपर्स इन्ही सीक्रेट्स को खोलने का काम करती है. ये इंडिया समेत दुनिया के उन दिग्गजों के नामों और कंपनियों का खुलासा करती है, जिन्होंने टैक्स बचाने या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए नियमों का उल्लंघन करते हुए टैक्स हेवन की मदद ली.

कहां और कैसे टूटे नियम?

अब क्या होगा?
पनामा पेपर्स सामने आने के बाद राजनीतिक हचलच के अलावा लीगल एक्शन भी लिए जा सकते हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस केस पर कार्रवाई कर सकती है. या फिर 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद कालाधन लाने को लेकर बनी SIT भी इन खुलासों को ध्यान में रखकर काम करती है. ताकि ऑफशोर कंपनियों के बारे में और ज्यादा सही से जानकारी मिल सके.

जहाज कारोबारी अमिताभ बच्चन?
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अमिताभ बच्चन 4 कंपनियों के डायरेक्टर थे. जिनमें तीन कंपनियां बहामास और एक ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में थी. इन कंपनियों की ऑफिशियल कैपिटल करीब 5 हजार से 50 हजार डॉलर के बीच थी. ये कंपनियां करोड़ों अरबों में शिप्स का बिजनेस कर रही थीं. ऐश्वर्या राय भी इनमें से एक कंपनी की डायरेक्टर थीं, जिन्हें बाद में उसका शेयर होल्डर बना दिया गया.

 

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