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वैक्सीनेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को घेरा, पूछा- वैक्सीन का एक रेट क्यों नहीं?

देश में कोरोना वायरस के मामले कम हो रहे हैं, लेकिन मरने वालों की संख्या अब भी चिंताजनक बनी हुई है. इस सबके बीच टीकाकरण जारी है. इसकी धीमी रफ्तार को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. कई प्रदेश कम वैक्सीन दिए जाने का आरोप लगा रहे हैं, तो कई राज्यों में वैक्सीन की कमी की वजह से टीकाकरण रोकना पड़ा है. सरकार की टीकाकरण पॉलिसी पर कई एक्सपर्ट्स ने तो सवाल उठाए ही हैं, अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार पर सवाल दर सवाल दाग दिए.

सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच कोरोना मरीज़ों को ज़रूरी दवाइयां, वैक्सीन और मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति से जुड़े मामले की 31 मई को सुनवाई कर रही थी. बेंच की अध्यक्षता कर रहे थे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़. सुनवाई के दौरान बेंच ने कोरोना वैक्सीन नीति में खामियों की तरफ भी ध्यान दिलाया.

राज्यों के वैक्सीन टेंडर पर

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि कई राज्य सरकारें वैक्सीन खरीदने के लिए खुद ग्लोबल टेंडर जारी कर रही हैं. क्या यही केंद्र सरकार की वैक्सीन खरीदने की नीति है? क्या केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वो खुद से वैक्सीन खरीदें और कंपटीशन करें?

इस पर केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि यह कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है कि राज्य एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. ऐसी स्थिति नहीं है कि कुछ राज्य ज्यादा पेमेंट करके और ज्यादा वैक्सीन खरीद रहे हैं.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र का हवाला दिया. कहा कि हम तमाशा देख रहे हैं कि नगर निगम और राज्य ग्लोबल टेंडर जारी कर रहे हैं. क्या केंद्र की यही नीति है कि हरेक नगर निगम और राज्य सरकार को उनके भरोसे छोड़ दिया जाए और ग्लोबल टेंडर निकलवाया जाए? कोर्ट ने कहा कि मुंबई नगर निगम के बजट की तुलना उत्तर प्रदेश या बिहार या और किसी राज्य के शहर से करिए. मुंबई का बजट कई राज्यों के बजट से अधिक है. क्या आप पॉलिसी के तौर पर नगर निगम को टेंडर देने की इजाजत देते हैं?

वैक्सीन के अलग-अलग रेट पर 

सुप्रीम कोर्ट ने वैक्सीन की कीमतों को लेकर भी सरकार से सवाल किए. कोर्ट ने पूछा कि क्या टीके की कीमतों को लेकर कोई पॉलिसी बनाई गई है? कोरोना वैक्सीन के अलग-अलग रेट के पीछे क्या तर्क है? कोर्ट का कहना था कि पूरे देश में वैक्सीन का एक ही दाम होना चाहिए.

18+ के लिए वैक्सीन की कमी पर

सुप्रीम कोर्ट ने 18 से 45 साल वाले लोगों को टीकाकरण में हो रही दिक्कतों का भी मुद्दा उठाया. पूछा कि 44 साल से कम के लोगों के लिए वैक्सीन की पर्याप्त सप्लाई क्यों नहीं हो पा रही है? केंद्र सरकार ने हाल में कहा था कि 2021 के अंत तक सभी योग्य लोगों को टीका लगा दिया जाएगा. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार फाइजर सहित वैक्सीन बनाने वाली कई कंपनियों से बातचीत कर रही है. अगर बातचीत सफल रहती है तो टीकाकरण की गति तेज़ हो सकेगी.

कोर्ट ने पूछा कि इसका क्या औचित्य है कि 45 साल से अधिक उम्र वालों के लिए तो केंद्र वैक्सीन सप्लाई करेगा, लेकिन 45 से कम वालों की वैक्सीन की व्यवस्था करने में राज्यों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है? कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने के लिए आपने तर्क दिया था कि 45 से अधिक उम्र के लोगों की मृत्यु दर अधिक है. लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में हम देख रहे हैं कि यह वायरस सिर्फ 45+ को ही नहीं प्रभावित कर रहा, 45 से कम उम्र वाले भी इसके पीड़ित हैं.

Vaccination
44 से कम उम्र के लोगों के लिए वैक्सीन की कमी पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल पूछे हैं. (फाइल फोटो)

गांवों में वैक्सीनेशन पर 

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रामीण इलाकों में कोरोना वैक्सीनेशन पर भी सरकार को आड़े हाथ लिया. कहा कि देश में सबके पास मोबाइल और इन्टरनेट का एक्सेस नहीं है. ऐसे में कोरोना वैक्सीनेशन के रजिस्ट्रेश की दिक्कत को कैसे दूर किया जा रहा है?

इस पर तुषार मेहता ने कहा कि हर गांव में एक सेवा केंद्र होता है. अगर किसी ग्रामीण के पास मोबाइल नहीं है तो वह सर्विस सेंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकता है, और टीका लगवा सकता है. इसके बाद कोर्ट ने कहा कि आपको जमीनी हकीकत के बारे में पता होना चहिए. आप लगातार डिजिटल इंडिया कहते हैं, लेकिन देखिए क्या असल हाल है.

कोर्ट ने अगला सवाल दागा कि झारखण्ड का एक खेतिहर मजदूर जो राजस्थान में काम करता है, उसे रजिस्ट्रेशन कराने के लिए वापस झारखण्ड जाना पड़ेगा? जबाव में तुषार मेहता ने कहा कि नहीं, जो जहां रहता है, वहीं रजिस्ट्रेशन करा सकता है. रजिस्ट्रेशन इसलिए ज़रूरी है ताकि दोनों डोज़ के बारे में जानकारी रहे. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि हम डिजिटल गैप के बारे में पूछ रहे हैं. आप यह कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं कि एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले प्रवासी खेतिहर मजदूर का टीकाकरण किया जा रहा है? इसका तुषार मेहता ने विरोध करते हुए कहा कि यह नीतिगत फैसला है.

केंद्र सरकार के जबाव से कोर्ट पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ. कहा कि केंद्र सरकार अभी तक वैक्सीन को लेकर नेशनल पॉलिसी डॉक्यूमेंट जमा नहीं कर पाई है. अदालत ने सरकार को वैक्सीन पॉलिसी को लेकर उठाए गए सवालों पर दो हफ्ते में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है.


विडियो- कोविन प्लेटफॉर्म पर वैक्सीनेशन स्लॉट न मिलने को लेकर सरकार ने क्या कहा?

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