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सुदर्शन टीवी के शो पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा, उसे जरूर जानना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़. उनका कहना है कि मानवीय गरिमा का अधिकार उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार. सुदर्शन न्यूज टीवी के खिलाफ मामले की सुनवाई करते हुए उन्होंने ये टिप्पणी की.

सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के विवादित कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ के प्रसारण पर रोक लगा दी थी. ये कहते हुए कि यह एक समुदाय का अपमान करने की कोशिश है. किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाया जा सकता है. कोर्ट में इसी मामले की सुनवाई चल रही है.

सुनवाई के दौरान क्या हुआ

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम जानते हैं कि आपातकाल के दौरान क्या हुआ था, लेकिन मानवीय गरिमा की रक्षा करना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है. और यह उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना. उन्‍होंने कहा-

हम सेंसरशिप नहीं करना चाहते. हम सेंसर बोर्ड नहीं हैं. हम चाहते हैं कि चैनल हमारे पास आए और हमें बताए कि वह हमारी आशंकाओं को कैसे स्वीकार करना चाहता है. जब हम मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, तो इस संदेश को मीडिया में जाने दें कि किसी भी समुदाय को निशाना नहीं बनना चाहिए. अंतत: हम सभी एक राष्ट्र के रूप में विद्यमान हैं. हर समुदाय के साथ सामंजस्य होना चाहिए.

बेंच के रूप में ये टिप्पणी की गई, जिसमें जस्टिस चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस इंदु मल्होत्रा और केएम जोसेफ भी शामिल थे.

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चैनल को विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी है. चैनल न्यूज ब्रेक कर सकते हैं, लेकिन वह किसी पूरे समुदाय की इस तरह से ब्रैंडिंग नहीं कर सकते, जिस तरह से उस चैनल ने अपनी स्टोरी में किया है. मुख्य मुद्दा यही है. अदालत ने कहा-

आपने जब भी सिविल सर्विसेज में समुदाय विशेष की नौकरी दिखाई है, तो आपने आईएसआईएस को साथ में दिखाया है. आप दिखाना चाहते हैं कि एक समुदाय विशेष सिविल सर्विसेज में आ रहे हैं और ये एक गहरी साजिश का हिस्सा है. क्या मीडिया को एक पूरे समुदाय को निशाना बनाने की इजाजत दी जा सकती है?

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा-

तमाम कैंडिडेंट को एक ही रंग में रंग देना नफरत फैलाने वाली बात है. हमें इस बात को लेकर चिंता है. इस तरह की अभिव्यक्ति नफरत बन जाती है. आप किसी भी समुदाय विशेष की इस तरह से ब्रैंडिंग नहीं कर सकते.

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा-

आप देखिये कि आपने हलफनामा में क्या कहा है. बताया जा रहा है कि 2011 से सिविल सर्विसेज में एक समुदाय विशेष के लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. चार्ट है. ग्राफिक्स में आप टोपी, दाढ़ी और हरे कलर का गमछा दिखाते हैं और आग के शोले दिखाते हैं. आपने सिविल सर्विसेज में बैठने वाले पूरे समुदाय को लेपट दिया है. आप कहना चाहते हैं कि जो एक समुदाय विशेष के लोग सिविल सर्विसेज में आ रहे हैं, वह गहरी साजिश का पार्ट हैं. आप समुदाय विशेष को निशाना बना रहे हैं.

आप पूरे समुदाय को लपेट रहे हैं और ये नफरत फैलाने वाली बात है. फ्री स्पीच का मुद्दा नफरत में बदल रहा है. आप समुदाय विशेष के लोगों की इस तरह से ब्रैंडिंग नहीं कर सकते.

कोर्ट ने कहा-

आपको आग, ग्रीन टी-शर्ट, टोपी आदि हटाने होंगे. आप बताएं कि आप कोर्ट की चिंता को कैसे दूर करेंगे, प्रस्ताव लेकर आएं. अगर हम आपको एपिसोड की इजाजत देंगे, तो आप कौन-सी शर्त का पालन करना चाहते हैं? मीडिया में मैसेज जाना चाहिए कि किसी भी समुदाय विशेष को निशाना नहीं बनाया जा सकता. हमें देश के भविष्य को देखना है. भाईचारा और विविधता वाला देश है.

इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 21 सितंबर को होगी.


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