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उत्तराखंड में BJP ऑफ़िस खुलना क्या तय हुआ, सरकार ने नियम ही बदल दिया!

उत्तराखंड में भाजपा का कार्यालय खुलना है, और इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर की मानें तो प्रदेश सरकार ने पार्टी ऑफ़िस के लिए लैंड यूज के नियम ही बदल दिए हैं. बुधवार 14 जुलाई को प्रदेश सरकार ने रेज़िडेंशियल इस्तेमाल के लिए मौजूद ज़मीन को राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों के ऑफ़िस के लिए इस्तेमाल में लाने की मंज़ूरी दे दी है. 

इंडियन एक्सप्रेस ने प्रदेश के कृषि मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल से पूछा कि क्या भाजपा ऑफ़िस के लिए लैंड यूज में बदलाव किए गए हैं? तो सुबोध उनियाल ने कहा,

“कुछ अपवादों को छोड़ दें तो अब सारी राष्ट्रीय पार्टियों को इस कैटेगरी में डाल दिया गया है. जो भी पार्टियां भविष्य में निर्माण करना चाहेंगी, उन्हें अनुमति दे दी जाएगी.”

इस बदलाव के पहले तक, रेज़िडेंशियल इस्तेमाल के लिए मौजूद ज़मीनों पर पहले स्थानीय निकायों, राज्य और केंद्र सरकारों के ऑफ़िस के साथ-साथ सरकारी कम्पनियों के ऑफ़िस का ही निर्माण किया जा सकता था. 2025 देहरादून मास्टर प्लान के तहत प्राधिकरण से सहमति के बाद ये निर्माण कार्य हो सकते थे. 17 अक्टूबर 2020 को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी ऑफिस का भूमिपूजन भी कर दिया था, लेकिन अभी तक लैंडयूज के इसी नियम की वजह से निर्माण नहीं शुरू हो सका था. अब मामला चेंज हो गया है. 

कैसे हुआ चेंज?

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने 22 जनवरी 2021 को एक रिपोर्ट सब्मिट की. रिपोर्ट में कहा गया कि जिस ज़मीन पर भाजपा अपना ऑफ़िस बनाना चाहती है, वो आवासीय ज़मीन है. रिपोर्ट में ये भी संस्तुति की गयी कि निर्माण के लिए नियमों में बदलाव किया जाए. इसी रिपोर्ट की चर्चा 14 जुलाई की मीटिंग में हुई. 

अब इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई तो बात हुई कि देहरादून मास्टर प्लान 2025 के ज़ोनल प्लान में ही बदलाव कर दिया जाए. बदलाव वही. आवासीय भूमि पर पार्टी ऑफ़िस खुल सकें, ताकि बस प्रशासन से अनुमति भर लेना रहे, और निर्माण शुरू किया जा सके.

कैसा होगा भाजपा ऑफ़िस?

देहरादून रिंगरोड के लडपुर एरिया में भाजपा का ये प्रदेश मुख्यालय होगा. ख़बरों के अनुसार, 12,320 वर्ग मीटर में फैले इस ऑफ़िस में 55 कमरे और 4 हॉल होंगे. एक डिजिटल लाइब्रेरी और 500 लोगों के एक साथ बैठने की व्यवस्था भी.

भाजपा का प्रदेश ऑफ़िस तो अभी भी है. बलबीर रोड पर लेकिन साइज़ में छोटा. ख़बरें बताती हैं कि जब भी बड़ा कार्यक्रम होता था, या कोई मीटिंग होती थी. तो दूर-दूर से नेता आते थे. जाम लग जाता था, लोकल लोगों को बहुत दिक़्क़त होती थी. अब बड़ा ऑफ़िस बनाने की योजना है, इसके लिए नियम में भी चेंज हो ही गया है.


वीडियो : कांवड़ यात्रा को लेकर नहीं बनी बात, यूपी ने दी हरी झंडी लेकिन उत्तराखंड सरकार ने किया इनकार 

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