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'चौकीदार चोर है' वाले बयान पर राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने क्या सजा दी?

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पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर फैसला आया है. नहीं, नहीं कोई चुनाव का नहीं. उनके एक बयान पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी. बयान जो राहुल गांधी की लोकसभा चुनाव के दौरान रैलियों में जमके गूंजता था. चौकीदार चोर है…चौकीदार चोर है… इसके खिलाफ बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. मानहानि का मुकदमा चलाने को कहा था. आरोप लगाया था कि राहुल गांधी सब जगह कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि चौकीदार चोर है. राफेल डील के मामले में. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को राहत के साथ ही चेतावनी भी दी है. उनकी माफी को मंजूर कर लिया है. साथ ही कहा है कि राहुल के खिलाफ अब अवमानना का केस नहीं चलेगा. कोर्ट ने चेतावनी भरे स्वर में कहा –

संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को सावधानी से बयान देना चाहिए. कोर्ट को राजनीति विवाद में घसीटना गलत है. राहुल गांधी ने माफी मांग ली थी. हमने माफी को मंजूर कर लिया है. पर वो आगे से ज्यादा सतर्क रहें.

अयोध्या भूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने लगातार 40 दिनों तक सुनवाई की थी. 16 अक्टूबर 2019 को सुनवाई पूरी हो गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी पर फैसला सुनाया.

मामले में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जिसमें जस्टिस एसके कौल और केएम जोसेफ भी शामिल थे. उन्होंने राहुल और मीनाक्षी के पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. और 14 नवंबर को फैसला सुनाया. सुनवाई के वक्त मीनाक्षी लेखी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि कोर्ट से दो बार डांट खाने के बाद अंत में राहुल ने तीसरा हलफनामा दाखिल कर अपने बयान पर कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है. रोहतगी ने कहा कि राहुल ने बहुत देर से माफी मांगी है और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले के मुताबिक देर से मांगी गई माफी स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि वह राहुल गांधी की माफी का विरोध करते हैं. कोर्ट उनके खिलाफ कार्यवाही करे. उन्हें सजा दे या तो जेल भेजे या फिर निंदा या पेनाल्टी आदि की सजा दी जाए. रोहतगी ने कहा या फिर राहुल गांधी जनता के बीच जाकर माफी मांगें.

रोहतगी की दलीलों का विरोध करते हुए राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्होंने शुरू में ही पहले हलफनामे मे अपनी गलती मान ली थी और कोर्ट से खेद भी जताया था. ऐसा उन्होंने कोर्ट से अवमानना नोटिस जारी होने के पहले ही कर दिया था. सिंघवी ने कहा उन्होंने माफी मांगने या गलती मानने में कोई देरी नहीं की. ऐसे में कोर्ट राहुल के खिलाफ अवमानना मामला बंद कर दे.


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