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राजस्थान के झमेले के बीच सचिन पायलट ने बीजेपी का दिल तोड़ने वाली बात कह दी है

राजस्थान में सियासी उठापटक चल रही है. कल ही अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री के पद से हटा दिया, और इधर पार्टी आलाकमान ने भी प्रदेश अध्यक्ष का पद भी सचिन पायलट से छीन लिया. कांग्रेस पार्टी ने कहा कि सचिन भाजपा के साथ मिलकर प्रदेश की सरकार गिराने में लगे हुए हैं. क़यास लगे, बुलावे आए. कहा गया कि सचिन पायलट भाजपा से जुड़ रहे हैं. लेकिन इस पर सचिन पायलट ने कहा,

“मैं एकदम साफ़ कह दूं कि मैं भाजपा से नहीं जुड़ने जा रहा हूं. मैं अब भी कांग्रेसी हूं. ये झूठ दिल्ली में बैठे लोग केवल लोगों के मन में ज़हर घोलने के लिए फैला रहे हैं. और अभी इस समय पर मैं ये कह सकता हूं कि मैं अपने लोगों के लिए काम करता रहूंगा.”

कब कहा पायलट ने ये सब? इंडिया टुडे से हालिया हुई बातचीत में. कौशिक देका से हुई बातचीत में पायलट ने बहुत सारी बातें कहीं. क्या कहीं? सब आगे :

आप अशोक गहलोत से ग़ुस्सा क्यों हैं?

“मैं ग़ुस्सा नहीं हूं. मुझे कोई ख़ास ताक़त नहीं चाहिए. न ही कोई विशेष सम्मान. बस मेरा कहना है कि जिन वादों के बूते पर राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनी है, वो उन वादों को पूरा करे. 2017 में राजस्थान हाईकोर्ट ने वसुंधरा राजे के उस नियम के खिलाफ़ आदेश दिया था, जिसमें राजे ने ख़ुद को जीवन भर के लिए जयपुर में बंगला अलॉट कर दिया था. गहलोत ने क्या किया? फ़ैसला मानने के बजाय उसी फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी. वो पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के नक़्शेक़दम पर चल रहे हैं. और मुझे प्रदेश में विकास का काम नहीं करने देना चाह रहे हैं. मेरे पास फ़ाइलें नहीं भेजी जाती हैं. नौकरशाहों को कहा गया है कि मेरी बात न सुनें. कैबिनेट और CLP की मीटिंग महीनों से नहीं की गयी हैं. तो उस पद का फ़ायदा ही क्या, जिस पर रहकर मुझे कोई काम ही नहीं करने दिया जाए?”

Ashok Gehlot
अशोक गहलोत

आपने ये मुद्दे पहले क्यों नहीं उठाए?

“एकदम उठाए. कई बार उठाए. राजस्थान में ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के इंचार्ज अविनाश पांडे जी और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के बीच उठाए. गहलोत जी से भी डिस्कस किया. लेकिन MLA और कैबिनेट मंत्रियों के बीच शायद ही कभी मीटिंग होती थी, तो किसी संवाद या बातचीत की जगह ही नहीं बचती थी.”

क्यों कहा जा रहा है कि आप भाजपा के साथ मिलकर सरकार गिराने की फ़िराक़ में हैं? और आपके लिए मुख्यमंत्री बनना क्यों ज़रूरी है?

“ये सब बेबुनियाद आरोप हैं. मैंने राजस्थान में कांग्रेस को जिताने के लिए बहुत मेहनत की है. मैं क्यों अपनी ही पार्टी के खिलाफ़ काम करूंगा? और ये मुख्यमंत्री बनने की बात नहीं है. 2018 में कांग्रेस राज्य में जीतकर आयी थी, तभी मैंने मुख्यमंत्री बनने का दावा पेश किया था. मेरे पास मौजूं कारण थे. जिस समय राजस्थान में कांग्रेस के महज़ 21 विधायक थे, उस समय मैंने कांग्रेस का भार सम्हाला. काडर के साथ मिलकर काम किया. पार्टी को ज़िंदा किया. उस समय गहलोत जी ने एक शब्द भी नहीं कहा. और चुनाव जीतते ही अपने अनुभव के आधार पर मुख्यमंत्री बनने आ गए. लेकिन अनुभव क्या है उनका? 1998 और 2009 में दो बार तो वो मुख्यमंत्री बन चुके हैं. और 2003 और 2013 के चुनाव में पार्टी की टैली गिरा चुके हैं. फिर भी उन्हें तीसरी दफ़ा मुख्यमंत्री का पद दिया गया. 2019 में वादा किया कि राजस्थान में ज़्यादा से ज़्यादा लोकसभा सीटें जीतकर आयेंगे. गहलोत के अपने बूथ पर कांग्रेस का प्रत्याशी हार गया. ये तो उनका अनुभव है. फिर भी उन्हें सीएम बनाने के राहुल गांधी के निर्णय का मैंने स्वीकार किया. उनकी ही ज़िद पर मैं उपमुख्यमंत्री बनने को तैयार हुआ. राहुल जी ने गहलोत जी से साफ़ कहा था कि काम और ताक़तों का बराबरी से बंटवारा हो. लेकिन इधर मुख्यमंत्री ने मुझे कोने में धकेल देने का एजेंडा बना लिया.”

इसके अलावा पायलट ने कहा है,

“2019 में कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी का इस्तीफ़ा होने के बाद गहलोत ने अपना और AICC के लोगों के गैंग बना लिया, मेरे खिलाफ़. और तब से ही मैं अपने आत्मसम्मान की रक्षा कर रहा हूं. राहुल और सोनिया गांधी से मेरी बात नहीं हुई है. एक बार मेरी बात प्रियंका गांधी से फ़ोन पर हुई है. वो निजी बातचीत थी, उससे कोई हल नहीं निकला.”

पायलट क्या चाहते हैं? इस सवाल पर सचिन पायलट ने कहा,

“मुझे सीएम की कुर्सी नहीं चाहिए. मुझे हमेशा से सम्माननीय तरीक़े से कार्यक्षेत्र चाहिए. ताकि कार्य और ताक़त के समान बंटवारे के वादा पूरा किया जा सके. ये सम्मान और कार्य करने की छूट की लड़ाई है.”


लल्लनटॉप वीडियो : राजस्थान में एक बार फिर अशोक गहलोत और सचिन पायलट आमने-सामने

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