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'और भी काम हैं जमाने में VC साहेब, एक BHU को बर्बाद करने के सिवा'

अगर आपसे कहा जाए कि देश में एक ऐसी यूनिवर्सिटी भी है, जहां रात में पढ़ना मना है. तो शायद आपको यकीन न हो, पर ये सच है. और वो यूनिवर्सिटी है BHU. और रीजन है यहां के नए VC जो ‘शिव तेरे कितने रूप’ और ‘मृत्यु के बाद क्या’ जैसी ‘महान’ किताबें लिख चुके हैं.  फिर भी अपने आपको इकॉनमिस्ट ही कहलाना पसंद करते हैं. VC गिरीश चंद्र त्रिपाठी के कुछ तुगलकी फरमानों ने सारी यूनिवर्सिटी का माहौल बिगाड़ रखा है. जिनमें से एक है, रात में पढ़ाई के लिए लाइब्रेरी नहीं खुलेगी.

इसके अलावा VC साहब  BHU में रहने वाली लड़कियों के ‘स्वघोषित अभिभावक’ भी हैं. इसलिए ये तय करने के सारे अधिकार रखते हैं कि लड़कियां क्या पहनें, कब खाएं, कितने वक्त बाहर रहें और वो भी किसके साथ. तो जरा विस्तार से पढ़िए हिंदी में तमाम विषयों की शिक्षा को बढ़ावा देने वाली, महामना की इस महान रचना BHU के ‘लफड़ामयी’ होने की कहानी:

24 घंटे लाइब्रेरी चाहते थे, अब पढ़ाई भी खतरे में

PHD स्टूडेंट विकास कुमार कहते हैं कि गांव-गांव में मोदी सरकार वाई-फाई लगाने की बात कहती है. वाराणसी के घाटों पर वाई-फाई लगाया जा रहा है. और उन्ही के क्षेत्र की सेंट्रल यूनिवर्सिटी BHU में स्टूडेंट इंटरनेट, लाइब्रेरी और पढ़ाई की मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं. जबकि आज कोई हायर एजुकेशन के लिए इंटरनेट की जरूरत से मना नहीं कर सकता है.

BHU सारे एशिया में कैंपस में रहने वाले स्टूडेंट के हिसाब से सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी है. यहां पहले लाइब्रेरी 24 घंटे खुला करती थी. नए VC गिरीश चंद्र त्रिपाठी के आने के बाद इसका टाइम घटाकर 15 घंटे कर दिया गया. यानी सवेरे 8 से रात में 11. हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट भी जिन्हें लैन के जरिए नेट चलाने की सुविधा मिली है. नए नियमों के हिसाब से 4 जीबी से ज्यादा इंटरनेट का यूज नहीं कर सकते हैं. ये भी जानने वाली बात है कि पहले से ही BHU के अंदर सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक और यूट्यूब बैन हैं.

BHU में पढ़ने वाले अधिकतर स्टूडेंट्स पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, MP और झारखंड के गरीब परिवारों से आते हैं. और बाहर कमरे लेकर रहते हैं. रात में पढ़ने के लिए वो अक्सर लाइब्रेरी जाते थे. खासकर परीक्षा के दिनों में इसकी जरूरत और बढ़ जाती थी. पर उनका ये सहारा अब BHU ने उनसे छीन लिया.

जब स्टूडेंट परेशान हुए तो उन्होंने विरोध किया. इस पर VC का बिल्कुल उसी तर्ज का बयान आया कि जो मेरे साथ हुआ है मैं इसका बदला तुम सबसे लूंगा. जवाब था, जब मैं पढ़ा करता था तो कोई अच्छी सुविधाएं नहीं थीं. कंप्यूटर की सुविधा नहीं थी. क्लासरूम में AC नहीं था. फिर भी मैंने पढ़ाई की. आगे VC ये भी बोले कि स्टूडेंट को लाइब्रेरी की क्या जरूरत है? आउट ऑफ सिलेबस पढ़ने की क्या जरूरत है?

इसके बाद भी जब स्टूडेंट्स 500 सिग्नेचर वाली याचिका के साथ VC से इस फैसले पर मिलने गए तो VC ने स्ट्रीट लाइट में पढ़ने की सलाह दी और कहा कि प्रोटेस्ट करोगे तो यूनिवर्सिटी से बाहर फेंक दूंगा.

bhu beating

23 मई को प्रोटेस्ट कर रहे 9 स्टूडेंट को बाहर का रास्ता दिखाया गया. एग्जाम नहीं देने दिया गया. कॉपियां छीन ली गईं. लड़के शांति से धरना दे रहे थे. तभी रात 12 बजे हजार से ज्यादा PAC वाले आए और धरने पर बैठे 10 लड़कों को उठा ले गए. इतना ही नहीं घरवालों को बिरादरी का हवाला देकर प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों ने लड़कों से धरना बंद करने का दबाव भी डलवाया.

भूख हड़ताल को 81 दिन हुए, दो की किडनी खराब, पर कोई सुनवाई नहीं

उधर BHU के डेली वेज वर्कर्स की हड़ताल को तीन महीने पूरे हो चुके हैं. उनके आमरण अनशन के भी 34 दिन हो चुके हैं. इस बीच कई वर्कर भूख हड़ताल करते हुए बहुत बुरी हालत में पहुंच गए हैं. एक वर्कर अच्छे लाल की हालत इतनी बिगड़ गई थी कि डॉक्टर्स के कहने पर उनको स्टूडेंट्स ने जूस पिला कर उनका धरना तुड़वाया. एक स्टूडेंट ने बताया कि अपनी और अपने साथियों की हालत देखकर अच्छे लाल रोने लगे. यूं ही धरना देते बरसात का मौसम गुजर गया. न ही उनकी कोई सुनवाई BHU प्रशासन की तरफ से हुई है और न ही जिला प्रशासन की तरफ से.

मामला ये है कि BHU ने डेली वेज कर्मचारियों की कंडीशन की समीक्षा के लिए हरिहर नाथ कमेटी बनाई थी. डेली वेज वर्कर वो होते हैं, जिनको उनके उसी दिन के काम का पैसा मिलता है जब वो काम करें. और वो भी बस पैसा मिलता है, कोई सुविधा नहीं. 1998 में हरिहर नाथ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जब तक सारे डेली वेज वर्कर परमानेंट नहीं हो जाते नए वर्कर अप्वांइट नहीं किए जाएं. पर 18 साल हो गए. नई नियुक्तियां होती रहीं. और पुराने वाले परमानेंट भी नहीं हुए. वो भी तब जब VC और BHU की एक्जीक्यूटिव कमेटी इस सिफारिश को मान चुके थे. पिछले तीन महीने से वर्कर इसीलिए धरने पर हैं.

लड़के के गैंगरेप मामले में दूसरे 4 आरोपियों को कोई सजा नहीं

पिछले महीने BHU एक लड़के के कैंपस में हुए रेप की घटना के चलते चर्चा में था. जब चलती कार में रेप किया गया था, उसमें मेन आरोपी दीपक के साथ 4 और लोगों के होने की बात विक्टिम लड़के ने कही थी. दीपक को तो जेल भेजा जा चुका है. सेशन कोर्ट से उसकी जमानत की अर्जी भी खारिज हो चुकी है पर दूसरे 4 आरोपियों की न पहचान हुई है न पकड़. दीपक जो BHU हॉस्पिटल में ही लैब अटेंडेंट है. उसे भी यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने बहुत दबाव पड़ने के बाद और स्टूडेंट्स के धरना देने के बाद नौकरी से बर्खास्त किया था. जिसके बाद पुलिस ने दीपक की गिरफ्तारी की थी.

पर विक्टिम लड़का आज भी डरा हुआ है. दरअसल आरोपियों की एक पॉलिटिकल पार्टी में अच्छी पकड़ है और वो इसकी धमकी विक्टिम लड़के को देते रहते हैं. जब लड़का रिपोर्ट लिखाने गया था तब पुलिस ने भी लड़के और उसके परिवार वालों को बहुत परेशान किया था. और मजाक उड़ाया था.

लड़कियां संस्कार सिखाने के चलते प्रशासन से हैं परेशान

BHU के VC गिरीश चंद्र त्रिपाठी कई बार लड़कियों के मामले में कई बार ही सामंतवादी बातें कह चुके हैं. 8 बजे के बाद लड़कियों का हॉस्टल से बाहर निकलना मना है. पर वो लड़कियों के कपड़ों और उनके रहने के ढ़ंग को लेकर भी खुले आम कहते हैं मैं लड़कियों के पेरेंट्स की तरह सोचता हूं. और इसलिए उनकी तमाम गतिविधियों पर रोक लगा रखी है. कई बार लड़कियों के साथ भेदभाव की बात रिपोर्ट हुई है. ये वीडियो देखें –

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