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मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले के 60% प्रोडक्ट्स के बारे में लीक डॉक्युमेंट से क्या पता चला है?

नेस्ले, वही कंपनी जिसके मैगी और नेस्कैफे कॉफी के सभी दीवाने हैं. कंपनी फिलहाल कुछ अंदरूनी डॉक्युमेंट लीक हो जाने के चलते विवाद में आ गई है. असल में कंपनी के कुछ बड़े अधिकारियों के बीच कंपनी के खाने-पीने के प्रोडक्ट्स को लेकर प्रेजेंटेशन शेयर किए गए. इनमें कहा गया है कि नेस्ले का बनाया ज्यादातर सामान ‘हेल्दी’ नहीं कहा जा सकता. जब एक अखबार ने इस लीक डॉक्युमेंट्स के जरिए खबर छापी तो हंगामा मच गया. अब कंपनी साख बचाने की कोशिश में है. कंपनी ने कहा है कि वह जल्दी ही नई हेल्थ स्ट्रेटजी पर कम करेगी.

इतना बवाल क्यों हो रहा है?

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशिल टाइम्स  ने नेस्ले को लेकर यह बड़ा खुलासा किया है. अखबार के मुताबिक नेस्ले कंपनी के अधिकारियों के बीच शेयर किए गए एक प्रेजेंटेशन में कहा गया है कि नेस्ले फूड एंड ड्रिंक्स के ज्यादातर प्रॉडक्ट्स अनहेल्दी हैं. ये प्रेजेंटेसन साल 2021 की शुरुआत में नेस्ले अधिकारियों के बीच साझा किए गए हैं.

इसमें कहा गया है कि नेस्ले के प्रमुख उत्पादों में से 60 फीसदी ऐसे हैं जिन्हें सही मायने में हेल्दी नहीं कहा जा सकता. कंपनी ने भीतर सर्कुलेट किए गए डॉक्युमेंट्स में यह भी कहा गया है कि कंपनी के कुछ प्रॉडक्ट तो ऐसे हैं जो कभी भी हेल्दी नहीं हो सकते. प्रेजेंटेशन में कहा गया है कि

हमारे प्रॉडक्ट और कैटेगिरी तो ऐसी हैं कि जो कभी भी हेल्दी नहीं होंगी, चाहे हम कितना भी बदलाव कर लें.

लीक डॉक्युमेंट्स से यह भी पता चलता है कि नेस्ले के तकरीबन 50 फीसदी प्रॉडक्ट्स का यही हाल है. राहत भरी बात यह है कि इन डॉक्युमेंट्स में मेडिकल न्यूट्रिशन, पेट फूड, कॉफी और शिशुओं के लिए फॉर्मूला शामिल नहीं हैं.

हेल्दी किसको माना जाए?

अब चूंकि इन लीक डॉक्युमेंट्स में सामान को अनहेल्दी बताया गया हो तो यह भी जान लिया जाए कि ‘हेल्दी’ किसे माना जा रहा है. इसके लिए ऑस्ट्रेलिया में एक हेल्थ स्टार रेटिंग सिस्टम है. हर खाने-पीने के सामान को 5 में से रेटिंग दी जाती है. इसके बाद खाने को रिसर्च के लिए दुनिया भर की एजेंसियों में भेजा जाता है. खाने पर रिसर्च ‘एसेस टु न्यूटिशन फाउंडेशन’ जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं करती हैं.

नेस्ले कंपनी के जिन खाने-पीने की सामान को लेकर बातचीत की गई है, उसमें 37 फीसदी को ऑस्ट्रेलिया की हेल्थ स्टार रेटिंग के हिसाब से 5 में से 3.5 की रेटिंग मिली है.

कंपनी के जो अंदरूनी डॉक्युमेंट्स लीक हुए हैं, उसमें नेस्ले ने 3.5 रेटिंग को हेल्दी यानी स्वास्थ्यप्रद का पैमाना माना है. लीक डॉक्युमेंट्स में माना गया है कि कंपनी के खाने के 70 फीसदी सामान और 96 फीसदी पेय पदार्थ (कॉफी को छोड़कर) स्वास्थ्यप्रद की सीमा में नहीं आते. इसके अलावा नेस्ले की 99 फीसदी कनफेक्शनरी आइटम (मीठा सामान जैसे टॉफी-चॉकलेट आदि) और आइसक्रीम भी हेल्दी की कटगिरी में नहीं आते. कंपनी के सिर्फ डेरी प्रॉडक्ट्स और पानी ही ऐसा हो जो 3.5 की रेटिंग की सीमा को मैच करता है.
नेस्ले ने डॉक्युमेंट्स में माना है कि उसका खाने-पीने का सामान हेल्दी होने की परिभाषा के हिसाब से नीचे है. कंपनी ने डॉक्युमेंट्स में कहा है कि

हमने अपने प्रॉडक्ट्स को काफी बेहतर किया है. लेकिन हेल्दी होने की परिभाषा के हिसाब से हमारा परफॉर्मेंस अब भी काफी नीचे है. नियामक एजेंसियों का दबाब और कस्टमर की मांग बढ़ती जा रही है.

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नेस्ले कंपनी ही भारत में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली मैगी नूडल्स बनाती है.

नेस्ले आया डैमेज कंट्रोल मोड में

इंडिया टुडे के अनुसार यह रिपोर्ट ऐसे वक्त पर आई है जब कंपनी मैगी नूडल्स, किटकैट और दूसरे प्रॉडक्ट्स को हेल्दी खानपान के तौर पर प्रमोट कर रही है. कंपनी ने पहले ही कह दिया है कि वह अपनी न्यूट्रिशन और हेल्थ स्ट्रैटजी में बदलाव कर रही है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद नेस्ले ने बचाव में आ गया है. उसने कहा है कि

हम अपने सभी प्रोडक्ट्स को देखेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि सभी संतुलिट डाइट और उचित न्यूट्रिशन दे. हमने दशकों तक मेहनत करके मजबूत नींव तैयार की है. मिसाल के तौर पर हमने अपने खाने के सामन में से चीनी और सोडियम को धीरे-धीरे कम किया है. हमने पिछले 7 साल में ही इसमें 14-15 फीसदी की कमी की है. हमारा मानना है कि हेल्दी डाइट का मतलब है खाना स्वादिष्ट भी हो और सेहतमंद भी. ऐसे में आनंद देने वाले खाने के लिए भी कुछ जगह रखी गई है. हमारा बदलाव की दिशा में उठाया कदम पूरी तरह साफ है. हम अपने सभी प्रॉडक्ट्स को स्वादिष्ट और सेहतमंद बनाएंगे.

बता दें कि नेस्ले पहले भी भारत में मैगी को लेकर विवादों में फंस चुका है. भारत में इसकी बिक्री पर भी कुछ दिन रोक लगी रही थी. अब इस तरह की रिपोर्ट सामने आने से इस यूरोपीय ब्रैंड को नुकसान हो सकता है. नेस्ले का भारत में बहुत बड़ा मार्केट है. कंपनी भारत में चॉकलेट, नूडल्स, डब्बे वाला दूध, ड्रिंक्स आदि बनाती है.


वीडियो – सीएसई में जंक फूड, मैगी और पतंजलि की मैगी पर जो बातें निकलीं, वो सेहत के लिए अलार्म है

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