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जूते सिलकर पेट पाल रहा खेल मंत्री के संसदीय क्षेत्र का पूर्व हॉकी खिलाड़ी

Tokyo Olympics 2021 में भारत सात मेडल्स के साथ मेडल टैली में 48वें नंबर पर रहा. जबकि 113 मेडल्स के साथ नंबर वन पोजिशन मिली अमेरिका को. हम अक्सर अमेरिका को टक्कर देने की बात करते हैं, बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं कि हम ओलंपिक्स में इतने मेडल लाएंगे, ये करेंगे-वो करेंगे. लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त देखते ही इन दावों की पोल खुल जाती है.

और ऐसी ही हक़ीक़त एक बार फिर से हमारे सामने आई है. ओलंपिक्स खत्म होने के बाद मेडल जीतने वाले प्लेयर्स के स्वागत में लंबा खर्च करने वाली सरकारें नेशनल और स्टेट लेवल प्लेयर्स के साथ जो सलूक करती हैं, वो दिल तोड़ने वाला है. पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में एक नेशनल लेवल की बॉक्सर पार्किंग टिकट काट रही है, तो हॉकी में हिमाचल के लिए खेल चुके पूर्व खिलाड़ी मोची का काम करके गुजारा कर रहे हैं.

आजतक के संवाददाता मनजीत सहगल की रिपोर्ट के मुताबिक 23 साल की रितु पहले बॉक्सिंग करती थीं. चंड़ीगढ़ के सेक्टर 20 के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ी रितु स्कूल और नेशनल लेवल पर कई मेडल्स जीत चुकी हैं. उन्होंने 2016 में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा आयोजित इंटर-स्कूल चैम्पियनशिप में 63 किलोग्राम वर्ग कैटेगरी में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. साथ ही रितु ने 2016 में ही इंटर-स्कूल टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल भी जीता था. इसके साथ ही उन्होंने तेलंगाना मे हुए स्कूल बॉक्सिंग नेशनल गेम्स में 63 किलोग्राम कैटेगरी में ब्रॉन्ज़ मेडल भी जीता था.

# क्यों छूटी Boxing?

मनजीत सहगल की रिपोर्ट के अनुसार, रितु के पिता रिक्शाचालक हैं. उनके बीमार पड़ने के बाद रितु को स्कूल छोड़ना पड़ा और घर चलाने के लिए नौकरी की तलाश करनी पड़ी. कहीं से कोई सहायता ना मिलने के चलते रितु अब पार्किंग लॉट में सहायक के रूप में काम कर रही हैं. इस काम के लिए उन्हें दिन के 350 रुपये मिलते हैं. रितु ने बताया,

‘मुझे 12 घंटे तक खड़ा रहना पड़ता है और इन पैसों से गुजारा करना बहुत मुश्किल होता है. मुझे चंडीगढ़ के मेयर द्वारा बॉक्सिंग किट की पेशकश की गई थी, लेकिन इससे मेरे परिवार को मदद नहीं मिलेगी. अगर मैं खेलती हूं, तब भी मुझे घर में योगदान देना होगा. परिवार की आय के लिए.’

# पूर्व हॉकी प्लेयर का हाल

ऐसा भी नहीं है कि ये हाल सिर्फ रितु का है. हिमाचल प्रदेश के लिए आठ बार नेशनल खेल चुके हमीरपुर के हॉकी प्लेयर सुभाष कुमार का भी हाल बुरा है. सुभाष जूतों की सिलाई कर किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं. 90 के दशक में सुभाष 8 बार नेशनल लेवल पर हिमाचल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

लेकिन सरकार के मुंह मोड़ने के बाद उनको जूते सिलने पर मजबूर होना पड़ा है. पिता की स्थिति पर बात करते हुए उनके बेटे आशीष कुमार ने कहा,

‘मेरे पिता भारतीय हॉकी टीम के कप्तान परगट सिंह और सुरजीत सिंह के साथ खेल चुके हैं. और आठ बार हिमाचल टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. राज्य के अधिकारियों ने उनकी ओर जरा भी ध्यान नहीं दिया.’

बता दें कि अपनी स्थिति देखते हुए सुभाष कुमार ने अपने बेटे आशीष कुमार को भी स्पोर्ट्स में नहीं जाने दिया. जानने लायक है कि मौजूदा खेल मंत्री अनुराग ठाकुर चार बार से हमीरपुर के सांसद हैं.


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