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PM CARES के तहत बने देसी वेंटिलेटर इस हाल में मिले कि लौटाने की नौबत आ गई

मुंबई के दो अस्पतालों में PM CARES के तहत बने AgVA वेंटिलेटर्स पर जब कोरोना के मरीज़ों को रखा गया, तो भी मरीज़ सांस नहीं ले पा रहे थे. ऐसे कुल 81 वेंटिलेटर गड़बड़ निकले. और दोनों अस्पतालों ने इन्हें बनाने वाली कम्पनी से इन्हें वापस ले जाने को कहा है. 

ये तो छोटी बात हो गयी. अब जानिए पूरा मामला.

कहां की घटना है?

मुंबई के जेजे अस्पताल और सेंट जॉर्ज अस्पताल की. यहां पर PM CARES के तहत बनाए गए AgVa वेंटिलेटर एक NGO ने दान में दिए. अब मुंबई मिरर में प्रकाशित ख़बर बताती है कि मई के महीने में डोनेट की गयी इन मशीनों से कोरोना के मरीज़ों को कोई मदद नहीं मिल रही है.

कई तरह के मॉडलों में आने वाले ये वेंटिलेटर गड़बड़ निकल रहे हैं. जब मरीज़ों को इन वेंटिलेटर पर रखा जा रहा है, तो वे ऑक्सिजन का लेवल मेनटेन नहीं कर पा रहे थे.
कई तरह के मॉडलों में आने वाले ये वेंटिलेटर गड़बड़ निकल रहे हैं. जब मरीज़ों को इन वेंटिलेटर पर रखा जा रहा है, तो वे ऑक्सिजन का लेवल मेनटेन नहीं कर पा रहे थे.

सेंट जॉर्ज में गए 39 वेंटिलेटर और जेजे अस्पताल में गए 42 वेंटिलेटर ख़राब निकले हैं. 19 जून को दिए गए अपने फ़ीडबैक में सेंट जॉर्ज अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा है कि इन वेंटिलेटरों के टेस्ट रन में ही ऑक्सिजन सप्लाई में 10 प्रतिशत का अंतर देखने को मिला था. एक वेंटिलेटर तो पावर सप्लाई देने के 5 मिनट के अंदर ही फ़ेल हो गया. और जब ICU के मरीज़ों को इन AgVA वेंटिलेटर पर डाला गया, तो उसके भीतर का ऑक्सिजन लेवल आशा के अनुरूप नहीं बढ़ा.

100 परसेंट पर भी AgVa वेंटिलटरों को सेट करने के बाद मरीज़ों का ऑक्सिजन लेवल 86 प्रतिशत के ऊपर नहीं बढ़ रहा था. लेकिन जैसे ही मरीज़ों को दूसरे वेंटिलटरों पर डाला गया, उनका ऑक्सिजन लेवल तुरंत सुधरने लगा. 

इस मामले पर वेंटिलेटर बनाने वाली कम्पनी का क्या कहना है?

बनाने वाली कम्पनी है AgVa हेल्थकेयर. मुंबई मिरर को इस मुद्दे पर तो कम्पनी ने अभी तक कोई रिप्लाई नहीं दिया है. लेकिन पिछले हफ़्ते दिए अपने एक बयान में कम्पनी ने कहा है कि उनके वेंटिलेटर बिलकुल ठीक हैं और ICU के पेशेंट्स के लिए एकदम मुफ़ीद हैं. अपने बयान में AgVa हेल्थकेयर ने कहा है कि सेंट जॉर्ज अस्पताल को जब ये वेंटिलेटर दिए गए तो उन्होंने इसके अपग्रेडेड वर्जन की मांग की, जिसमें बहुत कुछ ऑटोमैटिक है. यानी AgVa ने नहीं माना कि उनका वेंटिलेटर ख़राब है. 

क्या है इस AgVa वेंटिलेटर की कहानी?

केंद्र सरकार ने 23 जून को पीएम केयर्स फंड से दो हज़ार करोड़ रुपए जारी किए. 50 हज़ार ‘मेड इन इंडिया’ वेंटिलेटर्स की सप्लाई के लिए. लाइव मिंट के मुताबिक, इनमें 30 हज़ार वेंटिलेटर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) बना रहा है. बाकी के लिए AgVa हेल्थकेयर, AMTZ Basic, AMTZ हाई एंड और एलाइड मेडिकल जैसी कंपनियां काम कर रही हैं. AgVa हेल्थकेयर मुंबई में गड़बड़ निकले इन वेंटिलटरों के लिए जवाबदेह है. 

मुंबई के जेजे अस्पताल के पास मौजूद क्वॉरंटीन सेंटर. जेजे अस्पताल में AgVa के 42 वेंटिलेटर ख़राब निकले.
मुंबई के जेजे अस्पताल के पास मौजूद क्वॉरंटीन सेंटर. जेजे अस्पताल में AgVa के 42 वेंटिलेटर ख़राब निकले. PTI

AIIMS, दिल्ली के न्यूरोसर्जन डॉक्टर दीपक अग्रवाल और रोबॉटिक इंजीनियर प्रोफेसर दिवाकर वैश ने मिलकर इसे बनाया है. इसीलिए दोनों के सरनेम के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर AgVa (अगवा) शब्द बना है. इसकी कीमत ढाई लाख रुपए है. और वज़न है महज़ 3.5 किलो.

और भी उठे हैं सवाल?

हां. सरकार की एक समिति ने ही कहा था कि इन वेंटिलटरों का इस्तेमाल ICU के मरीज़ों के लिए नहीं हो सकता है. 

हफपोस्ट इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून, 2020 को सरकार की तरफ से नियुक्त की गई डॉक्टरों की एक समिति ने सरकार से कहा कि ये वेंटिलेटर खरीदिए. लेकिन ICU के लिए इन्हें हाई-एंड वेंटिलेटर यानी अच्छी क्वालिटी वाले वेंटिलेटर का रिप्लेसमेंट मत मानिए.

ये भी कहा कि जहां ये वेंटिलेटर लगे हों, वहां बैकअप वेंटिलेटर की भी व्यवस्था होनी चाहिए. 

इसके पहले अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिंडेंट जेवी मोदी ने कहा कि AgVa वेंटिलेटर पर जब मरीजों को रखा गया, तो अस्पताल को जो नतीजे चाहिए थे, वो नहीं मिल रहे थे. कहीं तो गड़बड़ है ही. फिर भी कम्पनी कुछ सफ़ाई देती है तो वो आप तक ज़रूर पहुंच जाएगी. 

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