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डिफेंस मिनिस्ट्री ने 2017 के बाद की सारी मासिक रिपोर्ट वेबसाइट से क्यों हटा लीं

मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने 2017 के बाद की सभी मासिक रिपोर्ट अपनी वेबसाइट से हटा दी हैं. इससे पहले मिनिस्ट्री ने वेबसाइट से वो रिपोर्ट हटाई थी, जिसमें लद्दाख में चीन की आक्रामकता की बात कही गई थी. गौर करने वाली बात ये है कि विपक्ष हाल में पीएम नरेंद्र मोदी के उस बयान पर सवाल उठाता रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘न कोई हमारी सीमा में घुसा, न ही हमारी पोस्ट किसी के कब्जे में है.’

डोकलाम के वक्त की रिपोर्ट भी हटी

2017 में डोकलाम में भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव की जो रिपोर्ट वेबसाइट पर थी, उसे भी हटा लिया गया है. बता दें कि मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस हर महीने सुरक्षा हालात से जुड़ी रिपोर्ट वेबसाइट पर डालता है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल मिनिस्ट्री ने ऐसा करने के पीछे के कारण नहीं बताया है. लेकिन मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि ये रिपोर्ट अक्टूबर तक फिर से दिखेंगी.

डोकलाम में भारतीय और चीनी सैनिक (पुरानी तस्वीर : PTI)
डोकलाम में भारतीय और चीनी सैनिक (फाइल फोटो : PTI)

सिस्टम में बदलाव की चर्चा

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि इन रिपोर्ट को बनाने और अपलोड करने के इंटरनल सिस्टम में बदलाव किया जा रहा है, जिससे रिपोर्ट को और भी व्यापक तरीके से पेश किया जा सके. अभी रिपोर्ट के नाम पर सिर्फ मिनिस्ट्री के अलग-अलग हिस्सों से मिले अपडेट को ही परोसा जा रहा है. ये रिपोर्ट सीनियर अधिकारियों की परमिशन के बाद ही पब्लिक की जाती हैं. हालांकि कई ऑपरेशन का इन रिपोर्ट में जिक्र नहीं मिलता. मिसाल के तौर पर बालाकोट एयर स्ट्राइक, डोकलाम में सैनिकों की तैनाती आदि.

जून की रिपोर्ट में थी चीनी घुसपैठ की बात

गौर करने वाली बात यह है कि 2017 से पहले की रिपोर्ट वेबसाइट पर मौजूद नहीं थी. मिनिस्ट्री ने जून, 2020 की रिपोर्ट को अगस्त, 2020 में ही वेबसाइट से हटा लिया था. जून की रिपोर्ट के मुताबिक, एलएसी पर चीनी आक्रामकता बढ़ती जा रही है, वह भी 5 मई, 2020 के बाद खास तौर पर गलवान वैली में. चीनी ने 17-18 मई, 2020 को कुगरंग नाला, गोगरा और पैगोंग-सी लेक के उत्तरी किनारे के एरिया का उल्लंघन किया है.

India China

इसमें 15 जून, 2020 को भारत-चीन के बीच हुई झड़पों की चर्चा के साथ सीनियर मिलिट्री अधिकारियों के बीच हो रही बातचीत का जिक्र भी है. इसमें आगाह किया गया है कि जब तक दोनों पक्षों में मिलिट्री और राजनयिक स्तर पर कोई सहमति नहीं बन जाती, यह गतिरोध लंबा चल सकता है. हालांकि अप्रैल और मई की मिली-जुली रिपोर्ट में चीनी आक्रामकता का जिक्र नहीं है. लेकिन इसमें ज्यादा तफ्सील से बताए बिना ही एलएसी संकट का जिक्र है.

इन रिपोर्ट्स में भारत-चीन के बीच हुई चार मीटिंगों का जिक्र है. ये मीटिंग 13-14 अगस्त 2019, 7-20 दिसंबर 2019, 5 फरवरी 2020 और मार्च 2020 में हुईं.


वीडियो – लोकसभा: अरुणाचल प्रदेश के भाजपा सांसद तापिर गाओ ने चीन पर 50 किलोमीटर जमीन कब्जाने का आरोप लगाया

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