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मथुरा के मंदिर में नमाज पढ़ने पर हंगामा हुआ तो पुलिस ने दिल्ली से किया गिरफ्तार

मथुरा के एक मंदिर में नमाज पढ़ने की तस्वीरें सोमवार 2 नवंबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तो हंगामा हो गया. चार लोगों के खिलाफ मंदिर सेवायतों ने धार्मिक भावनाएं भड़काने का केस दर्ज करा दिया. मंदिर के शुद्धिकरण के लिए गंगाजल छिड़का गया, हवन कराया गया. वहीं, मंदिर में नमाज पढ़ने वाले शख्स का दावा है कि मंदिर के पुजारी के कहने पर ही ऐसा किया था. उन्होंने तो ब्रज 84 कोस की यात्रा भी की थी. मंदिर भी जाते रहते हैं. बहरहाल, मंदिर में नमाज़ पढ़ने वाले फैसल खान को यूपी पुलिस ने दिल्ली के जामिया नगर से गिरफ्तार कर लिया है.

पूरा मामला क्या है?

मथुरा के बरसाना इलाके में हैं नंदगाव. वहां नंद बाबा का मंदिर है. ‘आजतक’ से जुड़े पत्रकार मदन गोपाल शर्मा के मुताबिक़, इसी मंदिर में 29 अक्टूबर को दिल्ली से चार लोग आए थे. इनमें फैसल खान और मोहम्मद चांद भी थे, जिन्होंने मंदिर के अंदर नमाज पढ़ी थी. तस्वीरों में भी ये नमाज़ पढ़ते दिखाई दे रहे हैं.

कई लोगों ने सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें डालीं. एक ने लिखा-

ढाई आखर प्रेम कौ…..

नंदगांव के नंद महल मंदिर में ज़ुहर (दोपहर) की नमाज़ पढ़ते हुए ये तस्वीरें साइकिल से ब्रज 84 कोस की परिक्रमा कर रहे खुदाई खिदमतगार भाई फैजल खान और मुहम्मद चांद की हैं. वे गांधीवादी कार्यकर्ता नीलेश गुप्ता और आलोक रतन के साथ इस यात्रा पर हैं. नमाज़ का वक्त होने पर मंदिर के प्रधान पुजारी जी ने उनसे कहा कि ये भी तो भजन की जगह है, यहीं नमाज पढ़ लीजिए.

Mathura Namaz Screenshot
कमोबेश इसी टेक्स्ट के साथ ऐसी तस्वीरें कई अकाउंट्स से पोस्ट की गईं. (तस्वीर: फेसबुक)

मंदिर के पुजारी का क्या कहना है?

मंदिर के सेवायत सुशील गोस्वामी का कहना है कि 29 तारीख रविवार को मंदिर में सेवायत कान्हा गोस्वामी की पूजा-सेवा थी. सुशील के मुताबिक, कान्हा गोस्वामी ने बताया कि-

रविवार को 4 लोग आए थे. एक ने अपना नाम फैजल खान बताया. अपने साथी का नाम चांद मोहम्मद बताया. दो और लड़के थे नीलेश गुप्ता और आलोक कुमार. खान ने खुद को हिंदू और मुस्लिम दोनों में समन्वय बनाने वाला बताया. बड़े हिंदू धर्माचार्यों के साथ अपने फोटो भी दिखाए. कहा कि वह अयोध्या में जन्मभूमि के भी दर्शन करने गए थे, यहां दर्शन करने आए हैं.

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

मंदिर में नमाज पढ़े जाने की जानकारी होने के बाद हंगामा हो गया. पुलिस में मामला दर्ज कराया गया. ‘आजतक’ की रिपोर्ट के मुताबिक़,  फैजल खान, चांद मोहम्मद, नीलेश गुप्ता और आलोक रतन के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि दोनों मुस्लिम व्यक्तियों ने बिना इजाजत मंदिर परिसर में नमाज पढ़ी और अपने फोटो सोशल मीडिया पर डाले, जो वायरल हो गए. इसे हिन्दू समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और आस्था को गहरी ठेस पहुंची है. भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की इन धाराओं में केस दर्ज कराया गया है-

153A (धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाना)

295 (किसी उपासना स्थल को या व्यक्तियों के किसी वर्ग द्वारा पवित्र मानी गई किसी वस्तु को अपमान के आशय से नष्ट, नुकसानग्रस्त या अपवित्र  करना) 

505 (विभिन्न वर्गों में दुश्मनी या नफरत पैदा करना. वैमनस्य पैदा करना, या आपत्तिजनक भाषण या बयान देना)

तस्वीर में दिख रहे लोग क्या कह रहे हैं?

जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, उनमें से नीलेश गुप्ता से ‘दी लल्लनटॉप’ ने बात की. नीलेश कॉलेज स्टूडेंट हैं. थर्ड ईयर में पढ़ते हैं. इन्होंने बताया-

हम फैसल खान साहब को सुनते रहते थे. वो सर्वधर्म समभाव की बात करते हैं. हमने एक यात्रा निकाली साइकल पर. दिल्ली से निकले. मथुरा आने से पहले भी हमने कई जगह दर्शन किए थे. वहां भी पुजारियों से मिले. बातचीत की. प्रसाद खाया. हमने 84 कोस की गोवर्धन परिक्रमा भी पूरी की थी. हमारा आखिरी स्टॉप था मथुरा का नंद बाबा मंदिर. जब हम वहां गए तो गोस्वामी जी ने हम से कहा कि भोजन करके जाना, तो हमने प्रसाद खाया. उनसे पूछा कि कहीं आसपास मस्जिद है? नमाज़ पढ़ने का समय हो गया है. तो उन्होंने ही कहा कि यहां ही नमाज़ पढ़ लीजिए.

Faisal Khan Temple 4
नीलेश ने बताया कि फैसल और मोहम्मद चांद जहां भी गए, प्रेम से उनका स्वागत किया गया. ये तस्वीर वृन्दावन के गौरव आश्रम की बताई गई हैं. (तस्वीर: स्पेशल अरेंजमेंट)

मंदिर में नमाज पढ़ने वाले फैसल खान से ‘आजतक’  के पत्रकार अरविन्द कुमार ओझा ने बातचीत की. फैसल ने कहा,

मैंने धोखे से नमाज नहीं पढ़ी. कभी किसी को धोखे से नमाज नहीं पढ़नी चाहिए. वैसे भी इससे हो क्या गया? हमने कौन-सी साजिश रच दी? वहां मंदिर में सब भजन करते हैं, हमने नमाज पढ़ ली.  हमारी सद्भावना यात्राएं पैदल भी होती हैं, सवारी से भी होती हैं. कोविड की वजह से यात्रा छोटी थी सिर्फ 4 लोग थे. वहां समय हो गया (नमाज का) तो हमने पढ़ ली, और फिर वहां से चले गए बस.

वहां (मंदिर में) जब हम नमाज पढ़ रहे थे, तो लोग भी खड़े थे. ये तस्वीरों में भी देखा जा सकता है. अगर हमें वहां कोई जरा-सा भी डांटता, तो क्या हम वहां नमाज पढ़ पाते? हमें क्या फायदा मिल गया? हमारी सद्भावना यात्रा में पचासों जगह ऐसा हुआ. ये फोटो वायरल न होते तो पता भी न लगता. 84 कोस की सद्भावना यात्रा थी श्रीकृष्ण की, हर 4 महीने में हम जाते हैं.

हमें बिल्कुल नहीं लगा था कि एफआईआर दर्ज हो जाएगी. अब हमें लगा कि ये यात्रा जो है, सफल हो गई… हमने तो वहां मिट्टी में नमाज अता की. सिर झुकाया. हमसे किसी ने पूछा- आपने नमाज अता की तो कपड़ा क्यों नहीं बिछाया? हमने कहा था कि मंदिर की जगह तो वैसे ही पवित्र होती है, वहां कपड़ा क्या बिछाना.

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मंदिर में नमाज़ अता करते हुए फैसल खान और मोहम्मद चांद की तस्वीर. (तस्वीर: फेसबुक)

FIR पर क्या बोले फैसल?

फैसल ने अपने खिलाफ दर्ज FIR की बाबत कहा,

FIR से हम भाग नहीं रहे, सहयोग करेंगे. हमें वहां बोला था उन्होंने नमाज पढ़ने को, तभी पढ़ी. अब न जाने क्यों FIR दर्ज करवा दी. जबरदस्ती मंदिर में कोई कभी नहीं घुसता. उनकी कोई अपनी मजबूरी होगी, इसीलिए FIR दर्ज करवाई है. कोई न जबरदस्ती मंदिर में घुस सकता है, न मस्जिद में.

माहौल क्या है मथुरा में?

नीलेश ने बताया कि उन्होंने अपनी सर्वधर्म समभाव यात्रा का प्रचार मथुरा में नहीं किया क्योंकि वहां अभी हालात नाज़ुक हो सकते हैं. ‘आजतक’ की रिपोर्ट के अनुसार, हाल में ही कृष्ण जन्मभूमि और उसके पास बनी मस्जिद का विवाद अदालत पहुंचा है. वहां जन्मभूमि परिसर से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई है. एक बार अर्जी खारिज हो चुकी है, अब मथुरा जिला अदालत में याचिका लगाई है, जिस पर नवंबर में ही सुनवाई होनी है.

हाल में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल करके 1991 के उस कानून के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी गई है, जो 15 अगस्त, 1947 के समय पूजास्थल की प्रकृति में बदलाव के लिए मुकदमा दायर करने पर प्रतिबंध लगाते हैं.


वीडियो: मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से लगी हुई ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग क्यों?

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