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हम पकौड़ों में रोज़गार तलाश रहे थे, बेरोजगारी 45 साल के टॉप पर पहुंच गई

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बेरोजगारी का आंकड़ा आया है. आंकड़ा जो रिस गया. रिसी तो बिजनेस स्टैण्डर्ड में ख़बर छपी. ख़बर NSSO के आंकड़ों के हवाले से. पता लगा देश में बेरोजगारी की दर पिछले 45 सालों में सबसे ज़्यादा है. 45 साल में सबसे ज़्यादा बेरोज़गार दें, ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने मोदी जी.

मतलब, माने, मीन्स , माने के… 1972-73 के बाद 2017-18 में ही इतनी ज़्यादा बेरोजगारी हुई है. सरकार इस रिपोर्ट से इसलिए खौफ खाए बैठी है क्योंकि ये आंकड़े नोटबंदी के ठीक बाद के हैं. जिस नोटबंदी की सरकार ने गुणावली गाई. सब उपलब्ध सुरों में जिसका मंगलगान हुआ, इस रिपोर्ट के हिसाब से वो कोलाहल साबित हुई.

कथित लीक्ड रिपोर्ट में कही गई बातें जानने के बाद पंक्तियों का लेखक
कथित लीक्ड रिपोर्ट में कही गई बातें जानने के बाद पंक्तियों का लेखक

बेरोजगारी के आंकड़ों में विस्फोटक क्या था?

1. देश में बेरोजगारी दर – 6.1%
2. शहरी इलाकों में बेरोजगार- 7.8%
3. ग्रामीण इलाकों में बेरोजगार- 5.3%
4. गांव की महिलाओं की हालत और खराब है. ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षित महिलाओं की बेरोजगारी दर 17.3% है.
5. ग्रामीण इलाकों में पढ़े-लिखे पुरुषों की बेरोजगारी का प्रतिशत 10.5 है.
6. रिपोर्ट से ये पता लगा कि 15 से 29 साल के बीच जो ग्रामीण पुरुष हैं. उनकी बेरोजगारी तीन गुना बढ़ी है. आसान भाषा में ऐसे समझिये कि आपके गांव में 1000 युवा हैं. 2011-12 में आप गांव गए . आपने देखा कि 15 से 29 साल के 50 लड़के पड़े-पड़े दिन बिता देते थे. 2017-18 में वैसे ही खाली बैठे लड़कों की संख्या 174 हो गई है.
7. इसी तरह गांव में अगर 2011-12 में 1000 में से 48% महिलाएं खाली बैठी थीं तो 2017-18 में उनकी संख्या बढ़कर 136 हो गई.
8. ये आंकड़े आने के बाद Centre for Monitoring Indian Economy नाम की स्वतंत्र संस्था की बात भी सच साबित हुई. जिसके मुताबिक़ इस एक साल में 1.1 करोड़ नौकरियां कम हुई हैं.
9. सर्वे ये भी कहता है कि लोग काम-धंधे से दूर हो रहे हैं. खेती से दूर जा रहे हैं क्योंकि उसमें फायदा नहीं होता.
10. आंकड़ो के मुताबिक नौकरी कर रहे या नौकरी ढूंढ रहे लोगों की तादाद भी कम हुई है. ये आंकड़ा LFPR मतलब Labour Force Participation Rate के जरिये निकलकर आया. LFPR, 2011-12 में 39.5% था, 2017-18 में घटकर 36.9% हो गया.

हंगामा है क्यों बरपा?
हंगामा है क्यों बरपा?

हंगामा है क्यों बरपा? सब तरफ NSSO की रिपोर्ट की बात क्यों हो रही है?
1. NSSO मतलब National Sample Survey Office report . ऐसा-वैसा संगठन नहीं है. सरकारी संगठन है, सांख्यिकी मंत्रालय के अंडर आता है. देश में जो भी सरकारी सर्वे होते हैं, जो भी आंकड़े जुटाए जाते हैं, वो जुटाने का काम NSSO करता है.
2. कल मतलब 30 जनवरी को लल्लनटॉप शो में हमने बताया कि कैसे सांख्यिकी आयोग के दो सदस्य 3 दिन पहले इस्तीफा दे गए हैं.

3. ये सदस्य थे, पीसी मोहनन और जेवी मीनाक्षी. आयोग में यही दो लोग थे, जो सरकार से सीधे नहीं जुड़े थे. स्वतन्त्र तौर पर अपनी राय दे सकते थे. इनका आरोप थे कि सरकार इनकी बात नहीं सुन रही. आयोग में इन्हें किनारे किया जा रहा, जिसके कारण इन्होने इस्तीफा दिया. इस्तीफे के दौरान जिस चीज की चर्चा सबसे ज़्यादा हुई वो NSSO के यही आंकड़े थे.
4. NSSO की ये रिपोर्ट राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ने पिछले दिसंबर में ही सरकार को दे दी थी. लेकिन सरकार ने इसे अब तक जारी नहीं किया है.

सरकार ने क्या कहा?
सरकार की तरफ से इन आंकड़ों को लेकर हीलाहवाली जारी है. नए-नए किस्म के बहाने गढ़े जा रहे हैं. नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार इस सबके बीच सामने आए. कहिन कि — देश में बेरोजगारी, 45 साल में सबसे ज्यादा हो गई– ऐसा कहने वाली रिपोर्ट सत्यापित नहीं है. आंकड़ों को अभी प्रोसेस किया जा रहा है. कोई उनसे पूछे कि इत्ते दिन से क्या रिपोर्ट रखी-रखी ब्याज दे रही है. आई क्यों नहीं अब तक? इस प्रोसेस की कोई सीमा है कि 16 मई के बाद आएगी?

बड़ा सवाल
बड़ा सवाल

फिलहाल जो आंकड़े लीक हुए. ये सबूत थे. सबूत इस बात के कि नोटबंदी के बाद देश में रोज़गार के क्या हाल हुए. इसे अब तक जारी न करने का कारण, 6 साल के बच्चे को भी समझ आ जाएगा, सरकार अपने ही संगठन की वैध रिपोर्ट कैसे जारी कर दे, जिसके आने के बाद ये साफ़ हो जाएगा कि सरकार के फ़ैसले गलत थे.

भारी मिसटेक हो गया सर, एक दम बलंडर हो गया
भारी मिसटेक हो गया सर, एक दम बलंडर हो गया

नोटबंदी के बाद देश में बेरोजगारी बढ़ गई. कुछ ही महीनों में चुनाव हैं. सरकार वही है जो पकौड़ों में रोज़गार दिखा रही थी. जो पकौड़ों में रोज़गार में नहीं देख पा रहे थे, उन्हें उस रोज़गार में आत्मसम्मान दिखाया जा रहा था. इस बहाने सरकार का फेल्योर छुपाया जा रहा था.

इन आंकड़ों के बाद सरकार से जवाब देते नहीं बनेगा. देखना ये होगा कि सरकार क्या करती है? वो इस रिपोर्ट के रिस जाने पर आंख बंद कर लेगी? रिपोर्ट को पूरी तरह झुठला देगी. बिजनेस स्टैण्डर्ड को झूठा ठहराएगी या रिपोर्ट जारी करेगी. आगे जो कुछ भी होगा, सरकार की मुसीबतें बढ़ाने वाला ही होगा.

अपडेट: इस मामले में नई ताजी बात ये बता चली है कि नीति आयोग ने इसे केवल ड्राफ्ट रिपोर्ट बताया है. लेकिन NSC के चेयरमैन पद से पिछले हफ्ते इस्तीफा देने वाले पीसी मोहनन ने इसे फाइनल रिपोर्ट बताया है. नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जुलाई से दिसंबर, 2018 यानी 2 क्वॉर्टर का डेटा अभी प्रोसेस में है और सरकार मार्च में एम्प्लॉयमेंट सर्वे जारी करेगी. इंडियन एक्सप्रेस से मोहनन ने कहा कि प्रोसीजर के मुताबिक ये फाइनल रिपोर्ट है. NSC इस रिपोर्ट को अप्रूव कर चुका है. हमने अप्रूव किया है और इसे किसी और अप्रूवल की जरूरत नहीं है.

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Leaked National Sample Survey Office report showed the unemployment rate at 45-year highest during 2017-18

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