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लक्षद्वीप में दारू और बीफ़ वाले नियमों पर बवाल बढ़ा तो अमित शाह ने क्या कहा?

लक्षद्वीप. 36 टापुओं का एक समूह, जो अब कुछ समय से विवाद में है. कारण है वहां के नए प्रशासक और उनके द्वारा लाए जा रहे क़ानूनों में बदलाव. लेकिन अब इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है. लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल ने दावा किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें आश्वासन दिया है. आश्वासन ये कि लक्षद्वीप के प्रस्तावित कानूनों को स्थानीय नेताओं से परामर्श किए बिना नहीं लागू किया जाएगा.

विवाद क्या है?

विवाद के केंद्र में हैं कुछ मसौदे. पहला है LDAR (Lakshadweep Development Authority Regulation 2021). हिन्दी में कहें तो लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन का मसौदा. दूसरा है असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम यानी कि PASA, तीसरा है पंचायत अधिसूचना का मसौदा और चौथा लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, 2021 का मसौदा. इसके अलावा भी कई और मुद्दे हैं. जैसे शराब बिक्री पर से रोक हटा लेना.

अब लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल जब ये सारे बदलाव लेकर सामने आए, तो विपक्ष ने कहा कि ये लक्षद्वीप में रह रहे अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं के खिलाफ़ लिया गया फ़ैसला है. राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी कि इन बदलावों को वापिस लिया जाए. अब इसी सब पचड़े के आलोक में मोहम्मद फैज़ल का नया दावा आया है.

सोमवार को दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात के बाद फ़ैज़ल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्होंने गृह मंत्री को नए प्रशासक प्रफुल पटेल द्वारा प्रस्तावित मसौदा कानूनों के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध के बारे में जानकारी दी है. फैजल ने कहा,

“अमित शाह जी ने आश्वासन दिया है कि जो भी कानून विचाराधीन हैं, उन्हें लक्षद्वीप भेजा जाएगा. वहां जिला पंचायत में स्थानीय प्रतिनिधियों से परामर्श किया जाएगा. लोगों की सहमति मिलने के बाद ही क़ानून को अंतिम रूप देने पर विचार किया जाएगा.”

इसके अलावा फैजल ने प्रशासक पटेल को भी हटाने की मांग की है, ऐसा उनका दावा है.

बता दें कि कुछ दिनों पहले स्थानीय लोगों के एक समूह ने इन कानूनों में प्रस्तावित बदलाव को अदालत में चुनौती दी थी. सांसद फैजल ने बताया कि उनकी पार्टी एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की दरखास्त की है. इसके अलावा कांग्रेस, केरल की सत्ताधारी पार्टी CPM और तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK ने भी इन प्रस्तावित कानूनों को वापस लेने की मांग की है.

कितना बढ़ा बवाल?

छोटे में जानिए. ट्विटर पर 23 और 24 मई को #SaveLakshadweep ट्रेंड कर रहा था. ज्यादातर लोग वहां पर लाए जा रहे एक नए क़ानून के मसौदे को रद्द करने की मांग कर रहे थे. इसमें ना सिर्फ़ लक्षद्वीप बल्कि पड़ोसी राज्य केरल से भी हज़ारों लोगों ने ट्वीट किया. कई लोगों ने लक्षद्वीप में प्रस्तावित क़ानूनी बदलावों की तुलना जम्मू-कश्मीर से भी कर दी.

लक्षद्वीप के कवरत्ति द्वीप के स्थानीय निवासी शिहाज खां ने ट्वीट किया –

“विकास के नाम पर इनका छिपा हुआ एजेंडा है. अगर प्रशासक (प्रफुल पटेल) यहां हमारी सेवा के लिए यहां आए हैं तो हम सभी पहले ही दिन से क्यों परेशान हैं? वे हमारी सेवा नहीं करना चाहते. उन्होंने इस जमीन को पैसा कमाने के लिए निशाना बनाया है. शुद्ध व्यापार.”

एक अन्य यूज़र ने लिखा –

“प्रशासक की राजनीतिक नियुक्ति हुई है. पहले कश्मीर में अमानवीय काम हुआ. अब बारी लक्षद्वीप की है. हमारे भाइयों के लिए खड़े हो जाओ.”

 

स्थानीय निवासी सुहा सको ने ट्वीट किया –

“लक्षद्वीप समूह के हम सभी लोगों को मदद की सख़्त ज़रूरत है. विकास के नाम पर हमारी जमीन हमसे छीनी जा रही है. कृपया इस अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज उठाने में हमारी मदद करें. #RevokeLDAR #SaveLakshadweep,”

मलयालम अभिनेता और निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन ने इस कैंपेन को सपोर्ट किया है. उन्होंने एक ट्वीट में लक्षद्वीप से जुड़ी अपनी बचपन की यादों का ज़िक्र किया और सत्ता प्रशासन से ये अपील की कि लोगों को हो रही समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए.

छात्रों के संगठन स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) की केरल शाखा, केरल छात्र संघ भी इस कैंपेन का हिस्सा बने. वहीं केरल छात्र संघ के ट्विटर अकाउंट को कथित तौर पर SaveLakshadweep हैशटैग के समर्थन में ट्वीट करने के लिए निलंबित कर दिया गया था, ऐसा उनका दावा है.

प्रशासक ही कर्ताधर्ता

लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली और दमन एवं दीव, चंडीगढ़ और लद्दाख, चार ऐसे केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां चुनी हुई राज्य सरकारें नहीं हैं. यहां प्रशासक ही सरकार में सबसे बड़ा पद है. वहीं चंडीगढ़ प्रशासन का दायित्व पंजाब के राज्यपाल के पास है. लद्दाख में उपराज्यपाल का पद होता है. दिल्ली, पुद्दचेरी और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भी हैं और उपराज्यपाल भी होते हैं. प्रफुल खोड़ा पटेल को 26 जनवरी 2020 को दादरा और नगर हवेली और दमन एंड दीव का प्रशासक बनाया गया था.

हमने आपको विवाद और उसकी वजह से तो अवगत करा दिया. इसके अलावा बात को और अच्छे से जानना-समझना है तो ये स्टोरी पढ़िए.

स्टोरी : लक्षद्वीप को अपने प्रशासक से क्या ख़तरा लग रहा कि इसे बचाने के लिए कैंपेन शुरू हो गया है?


वीडियो-  लक्षद्वीप में ऐसा क्या हुआ कि ‘सेव लक्षद्वीप’ जैसे कैंपेन चलने लगे?

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