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कठुआ केस के छह दोषियों को क्या सज़ा मिली?

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कठुआ में आठ साल की बच्ची के गैंगरेप और मर्डर केस में छह दोषियों को सज़ा सुना दी गई है. सांजी राम, दीपक खजूरिया और प्रवेश, इन तीनों को हत्या और बलात्कार के लिए उम्रकैद की सज़ा मिली है. बच्ची का अपहरण करने के लिए इन्हें 25 साल की कैद भी सुनाई गई है. बाकी तीन- आनंद दत्ता, तिलक राज और सुरेंद्र को पांच साल कैद की सज़ा मिली है. इन तीनों पर सबूत छुपाने का आरोप साबित हुआ था. 10 तारीख की सुबह ही सात में से छह आरोपियों को अदालत ने दोषी माना था.

सांजी राम इस केस का मास्टरमाइंड है. दीपक खजूरिया स्पेशल पुलिस ऑफिसर था. सांजी राम ने इसके साथ मिलकर बच्ची के साथ क्राइम की साज़िश बनाई थी. ताकि उस बच्ची के साथ हुए अपराध से डरकर स्थानीय बकरवाल समुदाय गांव छोड़कर चला जाए. प्रवेश सांजी राम के भांजे का दोस्त था. बच्ची को अगवा करके देवीस्थान ले जाने में वो भी शामिल था. सांजी राम का बेटा विशाल जंगोत्रा भी आरोपी था. मगर अदालत ने उसे बरी कर दिया.

किसके साथ क्या किया था इन दोषियों ने?
ये केस जनवरी 2018 का है. महीने की 10वीं तारीख को कठुआ जिले की हीरानगर तहसील के रसाना गांव में रहने वाली एक आठ साल की बच्ची रोज़ की तरह अपने घोड़े लेकर जंगल गई. शाम को घोड़े खुद-ब-खुद घर लौट आए, मगर बच्ची नहीं आई. घरवालों ने बहुत खोजा. पुलिस में शिकायत की. गायब होने के सातवें दिन- 17 जनवरी को बच्ची की लाश पास के जंगल से बरामद हुई. ऑटोप्सी से पता चला कि गला घोंटकर और फिर सिर पर पत्थर मारकर उसकी हत्या की गई है. और मारने से पहले बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया है.

दोषी कौन-कौन हैं?
गांव का मुखिया सांजी राम इस मामले का मास्टरमाइंड था. वो उस मंदिर का पुजारी था, जहां बच्ची को रखकर बलात्कार किया गया. दीपक खजूरिया और सुरेंद्र वर्मा, ये दोनों स्पेशल पुलिस ऑफिसर थे. तिलक राज हेड कॉन्स्टेबल था. इन सबको अदालत ने दोषी माना है. सांजी राम का बेटा विशाल भी आरोपी था. मगर परिवार और उनके वकील का कहना था कि वारदात के समय विशाल मेरठ के अपने कॉलेज में परीक्षा दे रहा था. इस पर कई अपडेट्स भी आईं. बताया गया कि उसने अपनी जगह अपने दोस्त को परीक्षा देने बिठाया था. खुद वो कठुआ में मौजूद था. अब अदालत ने विशाल को बरी कर दिया है. सातों आरोपियों में वो अकेला है, जिसे बरी किया गया है.

एक आठवां आरोपी भी है
कुल मिलाकर इस घटना के आठ आरोपी थे. इनमें से एक, सांजी राम का भांजा, शुरुआत में नाबालिग बताया गया. फिर उसके नाबालिग होने या न होने पर कई बातें आईं. उसके नाबालिग होने को लेकर जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के पास एक अर्जी लंबित है. पठानकोट डिस्ट्रिक्ट ऐंड सेशन्स कोर्ट ने आज जिन लोगों पर फैसला सुनाया है, उनमें सांजी राम का भांजा शामिल नहीं है. पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, सांजी राम ने अपने भांजे और दीपक खजूरिया के साथ मिलकर ही साज़िश बनाई थी.

बच्ची अक्सर अपने घोड़े चराने सांजी राम के घर के पीछे के जंगलों में आती थी. 10 जनवरी को बच्ची को अगवा करने से पहले इन लोगों ने नशीली दवा खरीद ली थी. ताकि जब भी बच्ची हाथ आए, उसे बेहोश करके उठा लिया जाए. लापता होने वाले दिन भी बच्ची अपने घोड़े खोजते हुए सांजी राम के घर की तरफ आई थी. वो वहां एक महिला से अपने घोड़ों के बारे में पूछ रही थी. चार्जशीट के मुताबिक, सांजी राम के भांजे ने उसकी आवाज़ सुनी और देवीस्थान की चाभी और नशीली दवा लेकर बाहर भागा. वहां उसने बच्ची से कहा कि वो उसके घोड़े खोजने में मदद करेगा. फिर बच्ची जब उसके साथ जंगल गई, तो वहां उसने बच्ची को जबरन नशीली दवा खिलाई और फिर उसके साथ रेप करके बेहोशी की हालत में ही उसे मंदिर ले गया.

…जब आरोपियों के सपोर्ट में जुलूस निकला
कठुआ केस इंटरनैशनल मीडिया की भी सुर्खियों में रहा. एक आठ साल की बच्ची के साथ इतना जघन्य अपराध हुआ, ये अपने आप में दहलाने वाली बात थी. मगर जब आरोपियों के समर्थन में जुलूस निकाला गया, वो इस केस का सबसे लो-पॉइंट था. समर्थन वाली रैली में बीजेपी के नेता, और राज्य सरकार के दो मंत्रियों का पहुंचना और ज्यादा सदमे की स्थिति थी. कठुआ केस के साथ सबसे मार्मिक चीज शायद ये थी कि आठ साल की बच्ची के साथ इतना जघन्य अपराध हुआ और फिर भी लोग धर्म देखकर प्रतिक्रिया देने में लगे रहे.


अलीगढ़ में 2.5 साल की बच्ची के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की मांग हो रही है

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