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फीस को लेकर स्टूडेंट्स के प्रोटेस्ट के बाद JNU प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है

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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने बढ़ी हुई फीस रिवाइज की है जो कि प्रस्तावित फीस स्ट्रक्चर से कम है. सरकार ने गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता देने के लिए एक योजना प्रस्तावित की है. इसकी जानकारी एचआरडी मिनिस्ट्री ने ट्वीट कर दी. मिनिस्ट्री के एजुकेशनल सेक्रेटरी आर सुब्रमन्यम ने ट्विटर पर लिखा-

ये है रिवाइज्ड फीस स्ट्रक्चर

रूम रेंट (सिंगल): 200 रुपये किया गया. ये पहले 20 रुपये था और बढ़ाकर 600 रुपये किए जाने का प्रस्ताव था.

रूम रेंट (डबल): 100 रुपये किया गया . ये पहले 10 रुपये था और बढ़ाकर 300 रुपये किए जाने का प्रस्ताव था.

वन टाइम मेस सिक्योरिटी: 5,500 रुपये की गई जो पहले 5500 रुपये ही थी, लेकिन बढ़ाकर 12,000 रुपये किए जाने का प्रस्ताव था.

सर्विस चार्जेज: पहले की तरह ही रहेंगे.

यूटिलिटी चार्जेज: 1700 रुपये होंगे जो कि पहले नहीं लिया जाता था और 1700 रुपये प्रस्तावित थे.

जेएनयू में फीस बढ़ने का प्रस्ताव आने के बाद से ही छात्र इसका विरोध कर रहे थे. 11 नवंबर को जेएनयू के छात्रों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था. इसके बाद जेएनयू प्रशासन ने फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को रिव्यू किया. हालांकि, फीस में बढ़ोतरी में बदलाव से भी छात्र नाखुश हैं. उनका कहना है यूनिवर्सिटी प्रशासन उन्हें बेवकूफ बना रहा है. बढ़ी हुई फीस में बहुत ही मामूली कमी की गई है. छात्रों ने विरोध जारी रखने का ऐलान किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टर रितिका चोपड़ा का ट्वीट देखिए.

पहले ये प्रस्ताव रखा गया था.

2017-18 में JNU Teachers Association यानी JNUTA ने एक रिपोर्ट जारी की थी. इसके मुताबिक, JNU में 2016-17 के दौरान 25 फीसदी छात्र ऐसे थे जिनके पूरे परिवार की मासिक आमदनी 6,000 रुपये से कम थी. अगर JNU में पढ़ने वाले छात्रों के परिवारों की आमदनी अचानक बढ़ नहीं गई है तो ये कहना गलत नहीं होगा कि अब भी लगभग 25 फीसदी छात्र जेएनयू में पढ़ रहे होंगे जिनके परिवार उतना कमाते भी नहीं जितनी फीस जेएनयू में बढ़ी है. वैसे आपको बता दें कि देश लगातार मंदी की तरफ बढ़ रहा है और ये बात खुद रिज़र्व बैंक से लेकर सरकार मान रही है. तथ्य बता रहे हैं कि छात्रों की मांग पूरी तरह बेबुनियाद तो नहीं थी.


वीडियो- ग्राउंड रिपोर्ट: JNU में हॉस्टल फीस बढ़ोतरी पर क्या है टीचर्स और स्टूडेंट्स की राय?

 

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