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ट्रेन हादसे में 11 साल पहले मृत घोषित शख्स मिला ज़िंदा, अब CBI कर रही जांच

पश्चिम बंगाल से एक अजीबोग़रीब मामला सामने आया है. करीब 11 साल पहले हुए बहुचर्चित ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में एक युवक को मृत घोषित किया गया था. उसके परिजनों को मुआवज़ा दिया गया था और उसकी छोटी बहन को ईस्टर्न रेलवे में नौकरी दी गई थी. लेकिन जिस व्यक्ति को मृत घोषित किया गया था उसे अब जीवित पाया गया है. जब इस मामले की जानकारी रेलवे को मिली तो तत्काल इसकी जांच शुरू की गई.

इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इस व्यक्ति के हादसे में मारे जाने का दावा खुद इसके परिवार के सदस्यों ने किया था. समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक़ रेलवे ने नौकरी और मुआवज़ा देने से पहले हर ज़रूरी जांच की थी. यहां तक की DNA सैम्पल को भी आधार बनाया गया था. इस पूरी प्रक्रिया के बाद रेलवे ने परिवार को चार लाख का मुआवज़ा दिया और व्यक्ति की छोटी बहन को ईस्टर्न रेलवे के सिग्नल डिपार्टमेंट में नौकरी दी गई.

CBI को सौंपी गई मामले की जांच

रेलवे को जब शिकायत मिली कि जिस व्यक्ति के कथित तौर पर मृत होने के आधार पर मुआवज़ा और नौकरी दी गई थी, वो ज़िंदा है. तब रेलवे के विजिलेन्स विभाग ने इस मामले की जांच शुरू की. विभाग को जांच में व्यक्ति के जीवित होने से जुड़े कुछ सबूत मिले. फिर मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेन्स विभाग ने तत्काल मामले को CBI को सौंप दिया.

प्रभात खबर अखबार के मुताबिक जोड़ाबागान इलाके से आरोपी अमृताभ चौधरी को CBI ने पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. इसी सिलसिले में रविवार यानी कि 20 जून को कथित तौर पर मृत व्यक्ति के पिता और उनकी बहन को पूछताछ के लिए भी बुलाया था.

कब हुआ था हादसा?

पश्चिम बंगाल के झारग्राम ज़िले में 28 मई 2010 को रात के 1 बजे हुए एक माओवादी धमाके में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन के कई डब्बे पटरी से उतर गए. वहीं दूसरी दिशा से आ रही एक मालगाड़ी भी ट्रेन से टकरा गई. टक्कर बहुत ज़ोरदार थी लिहाज़ा बहुत नुक़सान हुआ. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ कम से कम 148 लोग मारे गए थे. ये अब तक भारत की इतिहास में हुई सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक है. इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवज़ा मिला था और कइयों के परिवार के सदस्यों को रेलवे में नौकरी भी दी गई थी.

इस घटना का मास्टरमाइंड माओवादी नेता कोतेश्वर राव उर्फ़ किशनजी को माना जाता था. किशनजी उस दौर में भारत के सबसे बड़े माओवादी नेताओं में से एक थे. बाद में 24 नवंबर 2011 को सीआरपीएफ़ के Cobra बटैलियन ने बंगाल के पश्चिम मेदनिपुर ज़िले में उन्हें एक एंकाउंटर में मार गिराया था.


वीडियो- तारीख़: जब एक ही दिन हुए 2 बेहद अजीब ट्रेन एक्सीडेंट, और 500 लोग मारे गए

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