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क्या जम्मू-कश्मीर में फिर से पुलवामा जैसा अटैक करने की तैयारी में थे आतंकी?

जम्मू-कश्मीर का पुलवामा. यहां रजपुरा रोड पर एक सफेद सेंट्रो कार में बड़ी मात्रा में IED विस्फोटक मिले. सिक्योरिटी फोर्सेज ने इसे डिफ्यूज़ किया. जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार ने कहा कि इसके ज़रिए सिक्योरिटी फोर्स की गाड़ी को निशाना बनाने का प्लान था. पुलिस का कहना है कि 40-45 किलो विस्फोटक था. कहा जा रहा है कि पिछले साल 2019 के पुलवामा अटैक जैसे हमले को दोहराने की साजिश थी. पुलिस ने इसके पीछे जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के होने की बात कही है.

कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने बताया कि पुलिस को पिछले हफ्ते से लगातार इनपुट मिल रहे थे कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन आत्मघाती हमला करने वाले हैं और इसके लिए सेंट्रो कार ली गई है. कार में IED भरकर अटैक हो सकता है. विजय कुमार ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद का रोल इसमें प्रमुख है. हिजबुल उसे मदद कर रहा था.

एक दिन पहले नाकाबंदी की गई

उन्होंने कहा,

कल शाम (27 मई) को पुलवामा पुलिस ने आर्मी, CRPF की मदद से नाकाबंदी की. गाड़ी जब नाके के पास आई, तो हमारी फोर्स ने वॉर्निंग फायरिंग की, लेकिन मिलिटेंट ने कार नहीं रोकी. दूसरे नाके पर हमने वॉर्निंग फायरिंग की. यहां अंधेरा था. मिलिटेंट यहां से भाग गया. 28 मई की सुबह हमने गाड़ी की चेकिंग की, तो पता चला इसमें IED है. पुलिस, आर्मी, CRPF की टीम ने इसे डिफ्यूज किया.

40 से 45 किलो विस्फोटक

इस विस्फोटक को सुनसान इलाके में ले जाकर पुलिस ने ब्लास्ट किया. विजय कुमार ने बताया,

सुबह पहले अनुमान था कि विस्फोटक 25 किलो है, लेकिन एक्सप्लोड करने पर मलबा 50 मीटर तक गया है, इससे लग रहा है कि ये 40 से 45 किलो विस्फोटक होगा. इसमें यूरेनियम नाइट्रेट, नाइट्रेट साल्ट, नाइट्रो ग्लिसरिन का इस्तेमाल हुआ.

गाड़ी के मालिक के बारे में उन्होंने कहा कि अभी इसकी सूचना हम आपको नहीं दे सकते. गाड़ी में ग़लत नंबर प्लेट इस्तेमाल हुई है.

हिजबुल के कई आतंकी मारे गए

पिछले दो महीने में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और सुरक्षाबलों में काफी मुठभेड़ हुई हैं. एनडीटीवी के मुताबिक, दो महीनों में 30 जवान शहीद हुए हैं और 38 आतंकियों को मारा गया है. 6 मई को हिजबुल के टॉप कमांडर रियाज़ नाइकू की मौत के बाद सिक्योरिटी फोर्स ने लगातार ऑपरेशन चलाकर कई आतंकियों को मार गिराया है, जिनमें हिजबुल कमांडर अहमद भट और जुनैद सहराई के नाम भी हैं.

IED क्या होता है?

IED का फुलफॉर्म है ‘इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोजिव डिवाइस’. इन्हें जुगाड़ से बनाया जाता है. दूसरे बमों से. ये ट्रेडिशनल मिलिट्री एक्शन वाले विस्फोटकों से अलग तरीके से बनाया जाता है. इसमें आग लगाने और काफी धुआं छोड़ने वाले केमिकल का इस्तेमाल होता है. इसके अलावा इनमें कील, बॉल बियरिंग, छोटे पत्थर के टुकड़े भी इस्तेमाल होते हैं, ताकि नुकसान ज़्यादा हो.

इसे कई तरह से ट्रिगर किया जा सकता है. रिमोट कंट्रोल, इन्फ्रारेड या मैग्नेटिक ट्रिक, प्रेशर सेंसिटिव बार, ट्रिप वायर्स के जरिए. सड़क के किनारे भी इन्हें लगाया जाता है. इसमें पांच पार्ट होते हैं. स्विच (एक्टिवेटर), इनीशिएटर (फ्यूज़), कंटेनर (बॉडी), चार्ज (एक्सप्लोसिव) और पावर सोर्स (बैट्री). विस्फोटक को कितनी क्षमता में बनाया गया है, इससे तय होता है कि ये कितना नुकसान करते हैं. आतंकी इसके ज़रिए अटैक करने के लिए साइकिल, मोटरसाइकिल, कार, यहां तक कि किसी जानवर का इस्तेमाल भी करते हैं. मिलिट्री टर्म में इसे ‘व्हीकल-बोर्न आईई़डी’ (VBIED) कहा जाता है.

2019 का पुलवामा अटैक

14 फरवरी, 2019 को पुलवामा के लेथपुरा में CRPF के काफिले पर एक गाड़ी से आत्मघाली हमला हुआ था. ये सिक्योरिटी फोर्स पर किए गए सबसे घातक हमलों में से एक है. इस ख़बर से पूरा देश हिल गया था. CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे. गाड़ी में 300 किलो से ज़्यादा एक्सप्लोसिव थे और पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी आदिल अहमद डार इसे चला रहा था. वो पुलवामा का ही रहने वाला था. इसके बाद 26 फरवरी को भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट पर एयरस्ट्राइक की थी.


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