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ईरान ने समुद्री डाकुओं को रिहा किया और 11 भारतीय नाविकों को तस्कर बताकर जेल में डाल दिया!

16 मई, 2020. एक भारतीय जहाज़ दुबई से पाकिस्तान के कराची के लिए निकला. जहाज़ का नाम MVS अल-इरफ़ान. जहाज़ पर एक्सपोर्ट के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे फ्रिज, टीवी और वॉशिंग मशीन लदे हुए थे. जहाज़ को गुजरात के रहने वाले कैप्टन समेत 11 जहाज़ी चला रहे थे. जहाज ईरान की समुद्री सीमा के पास पहुंचा ही था कि समुद्री डाकू जहाज में घुस आए. ईरान के कोस्टगार्ड ने एक्शन लिया, समुद्री डाकुओं को पकड़ लिया. लेकिन भारतीय जहाजियों को भी हिरासत में ले लिया. 

हिरासत में लिया गया जहाज़ MSV अल-इरफ़ान
हिरासत में लिया गया जहाज़ MSV अल-इरफ़ान

ढाई महीने हो गए. भारतीय जहाज़ी ईरान के बंदरगाह पर हिरासत में हैं. ख़बर है कि ईरान ने डाकुओं को छोड़ दिया है, लेकिन भारतीय जहाजियों को वहां के कोर्ट ने स्मगलर यानी तस्कर क़रार दिया है. वे अपील नहीं कर पा रहे हैं, न उन्हें मदद पहुंच पा रही है. क्यों? क्योंकि ये जहाज़ी भाषा की दिक़्क़त से जूझ रहे हैं. या तो वे गुजरात की स्थानीय कच्छी भाषा बोल पाते हैं, या टूटी-फूटी अंग्रेज़ी. इस वजह से उनकी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है.

लाल तीर : दुबई. नीला तीर : कराची. काला तीर : ईरान. और बीच में लाल पिन यानी MSV अल-इरफ़ान की आख़िरी ज्ञात लोकेशन.
लाल तीर : दुबई. नीला तीर : कराची. काला तीर : ईरान. और बीच में लाल पिन यानी MSV अल-इरफ़ान की आख़िरी ज्ञात लोकेशन.

पूरी कहानी क्या है?

मामले की पूरी जानकारी गुजरात में रहने वाले इमरान सीरु देते हैं. जो जहाज़ पकड़ा गया है, वो इमरान के परिवार का है. और हिरासत में लिए गए पांच जहाज़ी भी इमरान के रिश्तेदार हैं. कहते हैं,

“हमारे जहाज़ के पास सारे काग़ज़ मौजूद थे. लाइसेंस था. और सबकुछ पक्का था. जो सामान लदा हुआ था, उसे भी लाने-ले जाने के काग़ज़ मौजूद थे. ओमान के पास समुद्री डाकुओं ने हमला किया. उसके बाद कोस्टगार्ड और ईरान मिलिट्री के जवान आए. उन्होंने डाकुओं और जहाजियों को मिलाकर कुल 24 लोगों को हिरासत में ले लिया.”

इमरान सीरु ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखा है. पत्र के साथ जहाज़ का लाइसेंस, कस्टम का सर्टिफ़िकेट और तमाम काग़ज़ नत्थी किए गए हैं. सभी भारतीय नागरिकों के पासपोर्ट की प्रति भी लगाई गई हैं. पूरा घटनाक्रम भी बयां किया है.

MSV अल-इरफ़ान के रजिस्ट्रेशन का काग़ज़
MSV अल-इरफ़ान के रजिस्ट्रेशन का काग़ज़

हमारे साथ बातचीत में इमरान सीरु ने बताया कि जो जानकारी उन्हें मिली है, उसके मुताबिक़, ईरानी समुद्री लुटेरों को छोड़ दिया गया. उसके बाद 20 जुलाई को तेहरान की कोर्ट में इस मुद्दे की पहली सुनवाई हुई. इस सुनवाई में ही अदालत ने सभी भारतीय जहाजियों को देश में अवैध रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स की तस्करी करने का दोषी पाया.

“जहाज़ के सारे सदस्यों को अभी तक कोई भी मदद नहीं पहुंच पाई है. हमने एक वक़ील से भी बात की है. हमें भाषा बहुत अच्छे से समझ में नहीं आ रही है. तो हमें भी थोड़ी दिक़्क़त हो रही है. वक़ील क्या हमें मदद करेगा? इस बारे में भी अभी कोई पुख़्ता जानकारी नहीं आयी है. वो अभी फ़ीस का पता करके पूरी जानकारी मुहैया करायेंगे.”

MSV अल-इरफ़ान को दुबई से मिला कस्टम क्लियरेंस
MSV अल-इरफ़ान को दुबई से मिला कस्टम क्लियरेंस

हिरासत में लिए गए भारतीय कौन हैं?

11 लोग हैं. लिस्ट नीचे देखिए. 

ईरान की हिरासत में भारतीय नाविक
ईरान की हिरासत में भारतीय नाविक

इमरान और बाक़ी जहाजियों का परिवार बीते 80 सालों से यही काम करता आया है. इमरान बताते हैं कि जब से जहाजी गिरफ़्त में हैं, तब से कोई कमाई नहीं हो सकी है. तंगी आ चली है. इन लोगों को जल्द से जल्द छुड़ाया जाना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि ईरान ने किस आधार पर कार्रवाई की ये उनकी समझ से परे है. उन्होंने कहा,

“हमारे जहाज़ की आख़िरी लोकेशन इंटरनेशनल वाटर में थी”— मतलब समुद्र का वो हिस्सा, जिस पर किसी देश की सीमा नहीं लगती है —“और इंटरनेशनल वाटर में ही गिरफ़्तारी और ज़ब्ती की सारी कार्रवाई हुई थी. ऐसे में ईरान की अदालत में इसे सुना जाना एकतरफ़ा कार्रवाई है. उनके पास वक़ील भी नहीं है. वो फ़ारसी या अंग्रेज़ी भी नहीं बोल पाते हैं कि अपना पक्ष ढंग से रख सकें. ऐसी संभावना है कि सभी लोगों को सज़ा दे दी जाए, जो इन लोगों के साथ अन्याय होगा.”

सरकारें क्या कहती हैं?

विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा इमरान सीरु ने गुजरात के कच्छ के सांसद विनोद चावड़ा को पत्र लिखा. मामले की जानकारी मिलने के बाद विनोद चावड़ा ने भी ईरान में भारतीय दूतावास को पत्र लिखा. मामले से अवगत कराया और आग्रह किया कि इस मुद्दे को देखें, जांच करें और भारतीय नागरिकों की हरसंभव मदद करें. 

परिवार की ओर से ईरान के ज़ाहेदान में मौजूद भारतीय कॉन्सुलेट यानी वाणिज्य दूतावास में संपर्क किया गया. ज़ाहेदान के कॉन्सुलेट ने मामले का संज्ञान लिया है, और बंदर अब्बास में मौजूद कॉन्सुलेट को ज़रूरी कार्रवाई के लिए पत्र आगे बढ़ा दिया है.

हमने भी ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास में संपर्क किया. ईमेल लिखा. पूछा कि क्या मामले की जानकारी है? मदद पहुंचाने का कोई प्रयास किया गया? कोई लीगल हेल्प या दुभाषिये जैसी मदद मुहैया कराई गयी? कोई जवाब नहीं. हमने भारत में मौजूद ईरानी दूतावास से भी सवाल पूछे हैं. वहां से भी अबतक कोई जवाब नहीं. जवाब मिलते ही हम पाठकों-दर्शकों को सूचित करेंगे.


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