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पूर्व मेजर जनरल ने कहा, मोदी के खिलाफ चिट्ठी पर सभी की हामी का रिकॉर्ड है

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11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग थी. दिन भर चुनाव से जुड़ी खबरें चलती रहीं. लेकिन शाम में खबरों की लिस्ट में एक और खबर ने एंट्री मारी. खबर आई कि 156 पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति को मोदी के खिलाफ चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में लोकसभा चुनाव में सैनिकों के नाम के इस्तेमाल पर आपत्ति दर्ज कराई गई है. चिट्ठी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई.

फिर इस मामले में अपडेट आया. चिट्ठी में कई बड़े लोगों के नाम थे उनमें से कुछ सामने आए और उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया कि चिट्ठी में उनका नाम तो है लेकिन चिट्ठी से उनका कोई लेना-देना नहीं है. अब इस मामले में एक और नया लेटेस्ट वाला अपडेट आया है. पूर्व मेजर जनरल सुधीर वोमबटकेरे का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा ‘सभी ईमेल्स को रिकॉर्ड किया गया है’.

अब पुरानी चिट्ठी भी देख लीजिए

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चिट्ठी ने नाम सामने आने के बाद पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एसएफ रोड्रिग्स ने कुछ इस तरह बयान  दिया था:

सर्विस में रहने के दौरान हमने हमेशा वही किया है जो सरकार ने हमें आदेश दिया. हम देश का एक हिस्सा हैं. हमारा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. कोई भी कुछ भी कह सकता है और फिर इसे फेक न्यूज बनाकर बेच सकता है, मुझे नहीं पता कि यह सज्जन कौन हैं, जिसने इसे लिखा है.

पूर्व एयरचीफ मार्शल निर्मल चंद्र सूरी ने कहा:

सशस्त्र बल गैर-राजनीतिक हैं और राजनीतिक रूप से चुनी हुई सरकार का वे समर्थन करते हैं. ऐसी किसी भी चिट्ठी के लिए मेरी सहमति नहीं ली गई. उस चिट्ठी में जो कुछ भी लिखा गया है, उससे मैं सहमत नहीं हूं. हमें गलत बताया गया है.

इसके बाद न्यूज एजेंसी ANI ने भी खबर दी थी कि राष्ट्रपति भवन ने किसी तरह की चिट्ठी मिलने से इनकार कर दिया है. फिर शाम होते-होते ये खबर भी चल पड़ी थी कि चिट्ठी ही फर्जी है. फिर इस मामले में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण का भी बयान आया था. उन्होंने चिट्ठी को फर्जी बताते हुए कहा था:

लोगों से उनकी सहमति न लिया जाना आपत्तिजनक है. मैं कहना चाहूंगी कि चुनाव के समय, फर्जी शिकायतें नहीं दी जानी चाहिए. वास्तविक शिकायतों के लिए आपका स्वागत है, लेकिन प्रख्यात नागरिकों, प्रख्यात अधिकारियों की अनुमति के बिना, अगर चिट्ठी में उनका नाम शामिल किया जाता है तो ये आपत्तिजनक है.

अब तमाम आरोप प्रत्यारोप के बाद पूर्व मेजर जनरल सुधीर वोमबटकेरे ने नया दावा किया है. उन्होंने बातों से जता दिया कि जो चिट्ठी राष्ट्रपति के नाम लिखी गई उसे सभी का समर्थन हासिल था. चिट्ठी बिना किसी सहमति के नहीं लिखी गई थी.

कुल मिलाकर इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. लगातार नई-नई बातें सामने आ रही है. अब इस मामले में जो भी अपडेट होगा वो हम आप तक पहुंचाएंगे.


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