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IAS नियुक्ति को लेकर मोदी सरकार के ये प्रस्तावित बदलाव BJP शासित राज्यों को भी क्यों पसंद नहीं आ रहे?

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से जुड़े अधिकारियों की नियुक्ति के नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार ने कुछ प्रस्ताव पेश किए हैं. इन प्रस्तावों पर अब तक कम से कम पांच राज्यों ने लिखित में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. इनमें बीजेपी शासित राज्य भी शामिल हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पत्र तो सार्वजनिक भी हो चुका है. वहीं महाराष्ट्र सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में इन प्रस्तावों का विरोध करने का फैसला लिया है.

क्या हैं मौजूदा नियम?

IAS अधिकारियों की नियुक्ति केंद्र सरकार की तरफ से होती है. इन्हें अलग-अलग कैडर दिए जाते हैं. जिसके तहत ये किसी राज्य या छोटे-छोटे राज्यों के समूह में अपनी सेवाएं देते हैं. केंद्र सरकार को भी कामकाज के लिए इन अधिकारियों की जरूरत होती है. ऐसे में वो अपने डेप्युटेशन के तहत इन्हें तैनात करती है. इसके लिए राज्य सरकारों से अधिकारियों की लिस्ट मांगी जाती है. केंद्र सरकार के डेप्युटेशन के तहत IAS अधिकारियों की नियुक्ति IAS कैडर रूल्स, 1954 के तहत होती है. साल 1969 में इन नियमों में एक सब सेक्शन 6 (1) जोड़ा गया. इसके मुताबिक,

“कैडर में तैनात अधिकारी को केंद्र सरकार के डेप्युटेशन या फिर किसी और राज्य सरकार के डेप्युटेशन में नियुक्त होने के लिए मौजूदा राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होगी. सहमति ना होने की स्थिति में केंद्र सरकार हल निकालेगी और राज्य सरकार या सरकारों को उसके फैसले को प्रभावी रूप देना होगा.”

क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?

पिछले साल 20 दिसंबर को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने अलग-अलग राज्य सरकारों के प्रमुख सचिवों को एक पत्र लिखा था. इसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार के डेप्युटेशन में पर्याप्त अधिकारी नहीं बचे हैं. राज्य कैडरों की तरफ से उन्हें केंद्रीय डेप्युटेशन के लिए नहीं भेजा जा रहा है. पत्र में IAS कैडर रूल्स के सब सेक्शन 6 (1) में एक और शर्त जोड़ने की बात कही गई. विभाग ने कहा,

“केंद्रीय डेप्युटेशन के लिए असल अधिकारियों की संख्या का निर्धारण केंद्र सरकार करेगी. इसके लिए केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकार/सरकारों से सलाह मशविरा करेगी. असहमति की स्थिति में राज्य सरकार/सरकारों को केंद्र सरकार के फैसले को प्रभावी रूप देना होगा. एक तय समयसीमा के अंदर.”

इन प्रस्तावों में ये भी कहा गया है कि अगर निर्धारित समय के अंदर कोई राज्य सरकार संबंधित अधिकारी को कार्यमुक्त करने में विफल रहती है, तो उसे अपने आप ही कार्यमुक्त माना जाएगा. ये भी सामने आया है कि केंद्र सरकार भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के लिए भी इसी तरह के प्रस्ताव सामने ला सकती है.

केंद्र सरकार ने 25 जनवरी तक इन प्रस्तावों पर राज्य सरकारों से जनाव मांगा है. (सांकेतिक फोटो: PMO)
केंद्र सरकार ने 25 जनवरी तक इन प्रस्तावों पर राज्य सरकारों से जनाव मांगा है. (सांकेतिक फोटो: PMO)

केंद्र सरकार ने पहले राज्यों से 5 जनवरी तक इन प्रस्तावों पर जवाब मांगा था. इसके लिए 27 दिसंबर को रिमाइंडर भी भेजा गया था. बाद में 12 जनवरी को राज्यों को एक और मसौदा भेजा गया. इसमें केंद्र सरकार की तरफ से लिखा गया,

“जनहित में केंद्र सरकार को अगर किसी कैडर अधिकारी की सेवा जरूरी लगती है, तो वो उसे केंद्रीय डेप्युटेशन के तहत तैनात कर सकती है.”

इस पत्र पर राज्य सरकारों से 25 जनवरी तक टिप्पणियां मांगी गईं. बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार संसद के बजट सत्र में इन संशोधनों को पेश कर सकती है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय पूरे देश में कुल 5,200 अधिकारी तैनात हैं. इनमें से 458 केंद्रीय डेप्युटेशन में हैं.

आपत्तियां क्या हैं?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक कम से कम पांच राज्य केंद्र सरकार के इन प्रस्तावों पर लिखित तौर पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं. ये पांच राज्य हैं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, बिहार और मेघालय. इनमें से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र सामने आया है. सीएम ममता ने केंद्र सरकार के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं. अपने पत्र में उन्होंने लिखा है,

“प्रस्तावित बदलावों से संबंधित अधिकारी और राज्य सरकार की सहमति के बिना ही केंद्र सरकार को IAS अधिकारियों को स्थानांतरित करने का अधिकार मिलेगा. ये भारतीय संविधान के संघीय ढांचे के खिलाफ है. इससे राज्य सरकार के प्रशासन पर असर पड़ेगा. केंद्र सरकार अचानक से किसी अधिकारी को अपने डेप्युटेशन में तैनात करेगी. इससे राज्य सरकार की प्रशासनिक योजनाएं बुरी तरह से प्रभावित होंगी.”

दूसरी तरफ महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में भी केंद्र के इन प्रस्तावों का विरोध किया गया. इस संबंध में जल्द ही महाराष्ट्र सरकार केंद्र को पत्र लिख सकती है. राज्य के कैबिनेट मंत्री नितिन राउत ने मीडिया को बताया,

“केंद्र सरकार के प्रस्तावित बदलाव उसे, राज्य सरकारों से परामर्श के बिना ही आईएएस अधिकारियों को बुलाने का प्रस्ताव देते हैं. महाराष्ट्र सरकार ने इन प्रस्तावों का विरोध करने का फैसला लिया है.”

बहरहाल, केंद्र सरकार के इन प्रस्तावों को लेकर काफी कुछ कहा जा रहा है. मसलन, इनके अमल में आने के बाद राज्य कैडर के अधिकारियों को डराया धमकाया जा सकता है, राज्य सरकार की प्रशासनिक शक्तियों को एक तरह से निष्प्रभावी किया जा सकता और नियमों का इस्तेमाल राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए किया जा सकता है. वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार बस अपने डेप्युटेशन के तहत पर्याप्त अधिकारियों को तैनात करना चाहती है क्योंकि उसके पास अधिकारियों की कमी हो गई है.


वीडियो- IAS बनने के लिए कैसे-कैसे निबंध लिखने पड़ सकते हैं?

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