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'हिंदुओं के अपमान पर हमने गांधी को नहीं बख्शा' कहने वाला हिंदू महासभा का नेता अरेस्ट

हमने गांधी को नहीं बख्शा तो आप क्या हो- ये बात कहने वाले कर्नाटक हिंदू महासभा के सचिव धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है. धर्मेंद्र ने असल में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को जान से मारने की धमकी दी थी. लेकिन ऐसा करते हुए उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या का उदाहरण पेश कर दिया था. हालांकि धर्मेंद्र के खिलाफ़ शिकायत भी हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष लोहित कुमार ने दर्ज कराई है.

दरअसल, बीती 8 सितंबर को मैसूर जिले के एक गांव हुचगनी में आदिशक्ति महादेवम्मा मंदिर को तोड़ दिया गया था. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत किया गया था. लेकिन प्रदेश के हिंदू संगठनों को ये बिल्कुल पसंद नहीं आया. उन्होंने इसके लिए कर्नाटक में बीजेपी के नेतृत्व वाली बोम्मई सरकार की कड़ी आलोचना की.

इसी सिलसिले में धर्मेंद्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उन्होंने मंदिर गिराए जाने पर विरोध जताते हुए बीजेपी पर हमला बोला. इंडिया टुडे के मुताबिक, धर्मेंद्र ने कहा,

“जो भी हिंदुओं की संस्कृति और सभ्यता के खिलाफ़ जाएगा, उसे नहीं बख्शा जाएगा. जब हिंदुओं को दुख पहुंचाया गया तो गांधी भी मारे गए. हमने गांधी को नहीं बख्शा तो आप कौन हो.”

इस बयान पर बवाल तय था. ऐसे में हिंदू महासभा ने धर्मेंद्र के बयान से किनारा कर लिया. वहीं, संगठन के प्रदेश अध्यक्ष लोहित कुमार ने धर्मेंद्र के खिलाफ़ मामला दर्ज करा दिया. उनका का कहना था कि धर्मेंद्र ने हिंदू महासभा के नाम का गलत इस्तेमाल किया है. मामला दर्ज होते ही प्रशासन ने धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर लिया.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश

दरअसल, 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध तरीके से बनाई गई धार्मिक इमारतों को तोड़ने का आदेश दिया था. इसी के तहत कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी ऐसे मंदिर तोड़े जाने का आदेश दे दिया. ऐसे में बोम्मई सरकार को अमल करना पड़ा. उसने मैसूर के एक मंदिर को तोड़ने का निर्देश दे दिया. हालांकि सीएम ने ये भी कहा था कि मंदिर तोड़ने की कार्रवाई में जल्दबाजी न की जाए. बाद में मंदिर तोड़े जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो विवाद और बढ़ गया. ऐसे में स्थानीय कलेक्टर और तहसीलदार ने कार्रवाई में जल्दबाजी करने के आरोप में नोटिस जारी कर दिए. इसी बीच कर्नाटक हिंदू महासभा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया. इसमें संगठन के महासचिव धर्मेंद्र ने बीजेपी और कर्नाटक के सीएम पर हमला बोला. बोलते-बोलते उन्होंने सीएम बोम्मई को मारने की धमकी दे डाली और इसके लिए मिसाल दे दी गांधी जी की हत्या की.

कांग्रेस का हमला, बीजेपी की सफाई

बहरहाल, मंदिर तोड़े जाने को लेकर हिंदू महासभा ने तो विरोध जताया ही, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने भी सत्तारूढ़ बीजेपी को घेर लिया. उन्होंने कहा,

“बीजेपी सरकार द्वारा मैसूर के नंजानगुडु में प्राचीन मंदिर को गिराया जाना निंदनीय है. ऐसा करने से पहले वहां के लोगों से राय नहीं ली गई. हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है.” I condemn the demolition of an ancient Hindu temple by @BJP4Karnataka govt in Nanjanagudu, Mysuru. The demolition is done without the consultation of the people in the region & has hurt the religious sentiments. 1/2 pic.twitter.com/t1TrZy2s3t — Siddaramaiah (@siddaramaiah) September 11, 2021

कांग्रेस हमलावर दिखी तो बीजेपी डिफेंसिव मोड में नजर आई. पार्टी के सांसद प्रताप सिम्हा ने मामले पर सफाई देते हुए प्रशासन को ज़िम्मेदार ठहराया है. एक ट्वीट में प्रताप सिम्हा ने कहा कि मैसूर के अधिकारीयों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठीक से नहीं पढ़ा और जल्दबाजी में मंदिर को तोड़ा गया. उन्होंने ये भी कहा कि सीएम बोम्मई ने आश्वासन दिया था कि जिन मंदिरों को तोड़े जाने का आदेश दिया गया है, उनका फिर से निरीक्षण किया जाएगा. बीजेपी सांसद के मुताबिक, सीएम बोम्मई ने ये भी कहा था कि अगर मंदिरों को बचाने या रीलोकेट करने की कोई भी संभावना नजर आई तो शीर्ष अदालत में इसके लिए ऐफिडेविट सबमिट किया जाएगा. लेकिन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से समझा और मंदिर गिरवा दिया.

उर्दू पत्रकार के साथ मारपीट

इस सबके के बीच एक उर्दू पत्रकार की पिटाई का मामला भी सामने आया. इंडियन एक्सप्रेस की 17 सितंबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ दिन पहले मैसूर पैलेस के बाहर हिंदू जागरण वेदिके के कार्यकर्ता मंदिर गिराए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने इकट्ठा हुए थे. आरोप है कि उन्होंने वहां एक स्थानीय उर्दू अखबार के एडिटर मोहम्मद सफदर कैसर के साथ मारपीट की.

अखबार से बातचीत में सफदर ने बताया कि प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने उनसे उनका आइडेंटिटी कार्ड मांगा था. उन्होंने इस पर सवाल किया तो प्रदर्शनकारियों ने उनसे मारपीट शुरू कर दी. पुलिस ने बीच-बचाव करते हुए सफदर को वहां से निकाला. इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

(आपके लिए ये ख़बर हमारे साथी दीपेंद्र ने लिखी है.)


विडियो- पाकिस्तान में मंदिर तोड़े जाने के बाद इमरान खान ने क्या कहा?

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