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SpaceX पहली प्राइवेट कंपनी बनी जिसने इंसानों को स्पेस में पहुंचाया

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब एक प्राइवेट कंपनी किसी इंसान को अंतरिक्ष में लेकर गई है. ये कंपनी है बिज़नेसमैन एलन मस्क की स्पेस-एक्स, जिसका अंतरिक्ष मिशन 31 मई को अमेरिका से लॉन्च हो गया. ये दुनिया का पहला प्राइवेट स्पेस ह्यूमन मिशन है.

स्पेस एक्स और अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के बीच समझौते के तहत ये कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसके तहत स्पेस एक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने दो अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए सफलतापूर्वक उड़ान भरी. जाने वाले दो अंतरिक्षयात्री हैं – रॉबर्ट बेहेनकेन और डगलस हर्ले. ये दोनों करीब 110 दिन अंतरिक्ष में रहकर वहां की जानकारियां जुटाएंगे.

लॉन्च के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा –

“आज का दिन ऐतिहासिक है. हमने अमेरिका की धरती से, अमेरिका के रॉकेट में, अमेरिका के अंतरिक्ष यात्रियों को लॉन्च किया है. स्पेस-एक्स ड्रैगन कैप्सूल सफलतापूर्वक लॉन्च हो चुका है और हमारे अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित और स्वस्थ हैं. दशकों से कम एक्शन का जो दौर चल रहा था, वो अब ख़त्म हो चुका है.”

ख़राब मौसम के कारण टल गया था मिशन

पहले ये मिशन 27 मई को ही लॉन्च होना था. देर रात दो बजकर तीन मिनट पर. लेकिन  लॉन्च से 16 मिनट पहले ही मिशन को रोक दिया गया. वजह- ख़राब मौसम. तब ये मिशन तीन दिन बाद यानी 30 मई की रात में लॉन्च करने की योजना बनी.

स्पेस-एक्स क्या है?

एलन मस्क ने 2002 में स्पेस-एक्स कंपनी शुरू की थी. कोई पूछता कि इस कंपनी का मकसद क्या है, तो कहते मंगल पर इंसानी बस्ती बनाना. इंसानी बस्ती बनाने के पहले इंसान को मंगल पर पहुंचना होगा. एलन मस्क के मुताबिक, नासा बहुत स्लो काम कर रही है. वो इसे रफ्तार देंगे.

मिशन से नासा को क्या फायदा?

इस मिशन के साथ नासा का कॉमर्शियल क्रू प्रोग्राम नौ साल बाद फिर से शुरू हो गया है. इस मिशन की सफलता के बाद अमेरिका को अपने एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रूस और यूरोपीय देशों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा. यानी करोड़ों-अरबों रुपए खर्च कर रूस और यूरोपीय देशों के रॉकेट से अपने अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन नहीं भेजना पड़ेगा.


साइंसकारी: इलॉन मस्क के इस नए स्पेस मिशन पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?

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