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अमित मालवीय केस: चुनाव आयोग की असली फजीहत तो अब होगी

चुनाव आयोग के बताने से पहले ही सोशल मीडिया पर कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया. ऐसा करने वालों में कांग्रेस के आईटी सेल श्रीवत्स से लेकर बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय तक शामिल हैं. अब चुनाव आयोग ने पूछताछ का फैसला किया है और यही फैसला सवालों के घेरे में है.

कर्नाटक का विधानसभा चुनाव. अभी तारीख भी तय नहीं हुई थी, लेकिन सुर्खियों में था. तारीख तय हो गई तो और भी सुर्खियों में आ गया. वजह ये कि चुनाव आयोग से पहले ही बीजेपी, कांग्रेस और कुछ न्यूज चैनल को तारीख पता चल गई. हंगामा मचना था, सो मचा. चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल हुए, उसकी शुचिता को कटघरे में खड़ा किया गया और सोशल मीडिया पर खूब खिल्ली उड़ाई गई. नतीजा ये हुआ कि आयोग ने इस पूरे मामले की जांच का फैसला किया. इसके लिए बाकायदा एक पत्र जारी किया गया है.

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यही होना भी चाहिए था. आखिर चुनाव आयोग से पहले बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय या फिर कांग्रेस सोशल मीडिया टीम के श्रीवत्स या कर्नाटक कांग्रेस सोशल मीडिया टीम के इंचार्ज श्रीवास्तव बी या फिर कोई न्यूज चैनल कैसे तारीखें बता सकता है. जांच के लिए आयोग ने छह लोगों की एक टीम बनाई है. इस टीम में सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर उमेश सिन्हा, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर संदीप सक्सेना, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर सुदीप जैन, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर चंद्रभूषण कुमार, डायरेक्टर जनरल धीरेंद्र ओझा और प्रमुख सचिव ( प्रशासन) स्टैंडहोप यूहलुंग शामिल हैं.

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फिलहाल ओम प्रकाश रावत (बाएं) भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं.

चुनाव आयोग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक ये टीम उन मीडिया संस्थानों से पूछताछ करेगी, जिन्होंने चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कर्नाटक चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया था. ये टीम कर्नाटक कांग्रेस सोशल मीडिया के इंचार्ज एसएच श्रीवास्तव बी के उस ट्वीट के बारे में पूछताछ करेगी, जो उन्होंने चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कर दिया था. इसके अलावा ये जांच टीम पोउलोमी साहा के स्वामित्व वाले कन्नड चैनल से भी पूछताछ करेगी. और फिर ये टीम इस बात की जांच करेगी कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में कहां पर खामी रह गई है, जिसकी वजह से चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही तारीखों के बाके में लोगों को पता चल गया.

ये दोनों ही ट्वीट एक जैसे हैं. चुनाव आयोग ने जो पूछताछ करने वाली कमेटी बनाई है, वो बाएं वाला ट्वीट (कांग्रेस का) करने वाले से पूछताछ करेगी, लेकिन दाएं वाले (बीजेपी आईटी हेड) से पूछताछ नहीं करेगी.
ये दोनों ही ट्वीट एक जैसे हैं. चुनाव आयोग ने जो पूछताछ करने वाली कमेटी बनाई है, वो बाएं वाला ट्वीट (कांग्रेस का) करने वाले से पूछताछ करेगी, लेकिन दाएं वाले (बीजेपी आईटी हेड) से पूछताछ नहीं करेगी.

यहां तक सब ठीक था. आयोग ने उन सबसे पूछताछ करने का आदेश जारी कर दिया, जिन्होंने चुनाव आयोग से पहले कर्नाटक चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया था. लेकिन इस पूछताछ वाली लिस्ट में बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय का नाम शामिल नहीं है. अमित मालवीय ही वो पहले शख्स हैं, जिन्होंने और सबसे कुछ देर पहले ट्वीट करके तारीखों का ऐलान किया था. अमित मालवीय के ट्वीट के बाद ही पूरे देश ने जाना था कि चुनाव आयोग से पहले भी कोई तारीखों का ऐलान कर सकता है. इस मामले में आयोग की खूब फजीहत भी हुई. लेकिन जब जांच की बारी आई, तो चुनाव आयोग ने अमित मालवीय से पूछताछ तक करना मुनासिब नहीं समझा.

अमित मालवीय, जिनके ट्वीट के बाद भी उनसे आयोग पूछताछ नहीं करेगा.

चुनाव आयोग की मंशा पर पहले भी सवाल उठते रहते हैं. कई बार आयोग की विश्वसनीयता पर संदेह किया जाता रहा है. 27 मार्च को भी ऐसा ही हुआ, जब आयोग से पहले बीजेपी और कांग्रेस के आईटी सेल को चुनाव की तारीखों का पता चल गया. लेकिन मंशा पर संदेह बड़ा और तब हो जाता है जब एक ही मामले में न्यूज चैनल से लेकर कर्नाटक कांग्रेस आईटी सेल तक से पूछताछ हो रही है, लेकिन बीजेपी के आईटी सेल के हेड से पूछताछ नहीं हो रही है. ऐसे से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल तो खड़े तो हो ही रहे हैं कि उसने सत्ताधारी पार्टी के नेता से पूछताछ करने की जहमत क्यों नहीं उठाई है. और ये तब है, जब बीजेपी की ओर से केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव और अनिल बुलानी ने चुनाव आयोग में जाकर अमित मालवीय पर सफाई पेश की थी.


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