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चुनाव आयोग ने सरकार से ऐसा अधिकार मांगा है कि सैकड़ों दलों का पत्ता साफ हो जाएगा

भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने ज्यादा अधिकार देने की मांग की है. इलेक्शन कमीशन ने लॉ मिनिस्ट्री से कहा है कि उसे किसी भी निष्क्रिय राजनीतिक पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की ताकत दी जाए. बरसों से चुनाव नहीं लड़ रही पार्टियों पर कार्रवाई की ताकत दी जाए. आयोग ने जब अपना डेटा चेक किया तो उसे पता चला कि ऐसी 2700 पार्टियां हैं, जो रजिस्टर्ड तो हैं लेकिन ज्यादातर लोगों को इनके बारे में कुछ पता ही नहीं है.

हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग तक में लगे हैं कई दल!

इलेक्शन कमीशन ने निष्क्रिय पार्टियों का रजिस्ट्रेशन खत्म करने के पीछे का कारण भी बताया है. कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये सभी पार्टियां डोनेशन पर टैक्स में छूट का फायदा उठा रही हैं. बता दें कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पब्लिक एक्ट की धारा 29बी और सी के तहत दलों को चंदे पर छूट दी जाती है. लेकिन इस छूट को पाने के लिए पार्टी को 20 हजार रुपए से ऊपर के हर चंदे की जानकारी देनी होती है.

पार्टियों को टैक्स में छूट आईटी एक्ट के सेक्शन 13ए के तहत भी मिलती है. इस एक्ट में दलों को हाउस प्रॉपर्टी, चंदे, दूसरे स्रोत से आय और कैपिटल गेन पर छूट का प्रावधान है. इलेक्शन कमीशन का मानना है कि बहुत सी पार्टियां हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कामों में लगी हैं क्योंकि इन्हें कई कानूनों के तहत अपनी इनकम बताने की जरूरत नहीं होती.

ऐसी बहुत सी पार्टियां उत्तर प्रदेश में भी रजिस्टर्ड हैं, और करोड़ों रुपए के वारे-न्यारे कर रही हैं. वो भी तब, जब राज्य में चुनाव नजदीक है. इलेक्शन कमीशन ने फैसला लिया है कि लॉ मिनिस्टर के साथ होने वाली मीटिंग में इस मसले को उठाया जाएगा. इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इस मामले पर लॉ मिनिस्टर किरन रिजिजू ने खुद इस पर गौर किया है और मिनिस्ट्री जल्दी ही कोई फैसला ले सकती है.

डीलिस्टिंग का अधिकार, डीरजिस्टर का नहीं

केंद्रीय चुनाव आयोग को किसी भी राजनीतिक पार्टी को डीलिस्टिंग यानी सूची से हटाने का अधिकार मिला हुआ है. ये अधिकार उसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिला है. इसी के तहत कमीशन ने फरवरी 2016 से दिसंबर 2016 तक 255 राजनीतिक पार्टियों को डीलिस्ट किया था. हालांकि चुनाव आयोग को किसी भी पार्टी का रजिस्ट्रेशन खत्म करने का अधिकार नहीं है. डीलिस्टिंग होने पर राजनीतिक पार्टियां भले ही इलेक्शन नहीं लड़ पातीं,  लेकिन आस्तित्व में रहती हैं और चंदा आदि ले सकती हैं.

चुनाव आयोग रजिस्ट्रेशन खत्म करने का अधिकार पाने के लिए लंबे वक्त से जूझ रहा है. साल 2016 में भी इलेक्शन कमीशन ने सरकार से ये अधिकार देने की मांग की थी, लेकिन उसकी नहीं सुनी गई.सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर भी इलेक्शन कमीशन ने कहा था कि उसे राजनीतिक पार्टी को डीरजिस्टर करने की ताकत दी जानी चाहिए.


वीडियो – आयोग का ऐलान, पश्चिम बंगाल उपचुनाव में भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ेंगी ममता बनर्जी

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