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नार्थ MCD के अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों को दो महीने से सैलरी नहीं मिली है

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी सबसे आगे तैनात हैं. उनके लिए फूल बरसाए जा रहे हैं, पीएम मोदी ने उनका उत्साह बढ़ान के लिए तालियां बजवाई थीं, दीये जलवाए थे. उन पर हमला करने वालों या उनसे गलत व्यवहार करने वालों के खिलाफ कड़ा कानून बनाया जा चुका है. लेकिन नॉर्थ एमसीडी के अंडर आने वाले दिल्ली के अस्पतालों में डॉक्टरों को दो महीने की सैलरी नहीं दी गई है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट मुताबिक़, नॉर्थ एमसीडी कमिश्नर वर्षा जोशी ने बताया है कि जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर सहित कुछ अन्य मेडिकल स्टाफ को फरवरी में अंतिम बार सैलरी दी गई थी. एमसीडी के एक ऑफिसर ने बताया कि उन्हें मई के पहले सप्ताह में फरवरी का वेतन मिला था. उन्होंने कहा कि फरवरी तक नर्स और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर को पेमेंट किया गया है, लेकिन सीनियर डॉक्टर्स आखिरी सैलरी जनवरी में दी गई है.

हिन्दू राव, महर्षि वाल्मीकि इन्फेक्शस डिजीज, कस्तूरबा हॉस्पिटल, गिरधारी लाल मैटरनिटी हॉस्पिटल, और राजन बाबू इंस्टीट्यूट जैसे हॉस्पिटल नॉर्थ एमसीडी के तहत आते हैं. नॉर्थ एमसीडी में कम से कम 1,000 सीनियर डॉक्टर, 500 रेजिडेंट डॉक्टर और 1,500 नर्सिंग ऑफिसर काम करते हैं.

डॉक्टर क्या कह रहे हैं?

डॉक्टर आरआर गौतम गिरिधारी लाल हॉस्पिटल में काम करते हैं. नगर निगम डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रमुख भी हैं. बताते हैं,

एक ओर आप हमें कोरोना वॉरियर के रूप में आदर सम्मान देते हैं और दूसरी ओर हमें तीन महीने से सैलरी नहीं दी है. ऐसे वक्त में किसी भी स्वास्थ्यकर्मी के लिए सबसे बुनियादी जरूरत है. लोगों को बच्चों की पढ़ाई के लिए पेमेंट करना होता है. परिवार में कोई बीमार पड़ता है तो वहां भी पैसे चाहिए. हम अपनी बचत खत्म कर रहे हैं. ऐसे नाजुक मौके पर कोई हमें उधार भी न देगा.

एसोसिएशन ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर मामले को लेकर हस्तक्षेप की मांग की है. चिट्ठी में कहा गया है कि मौजूदा वक्त में डॉक्टरों के लिए एकमात्र विकल्प विरोध के तहत इस्तीफा देना है, लेकिन एसोसिएशन को पूरा भरोसा है कि पीएम समय रहते हस्तक्षेप करेंगे और डॉक्टरो की समस्या का समाधान करेंगे.

MCD और दिल्ली सरकार का रार

MCD के एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि फंड में कमी के कारण सैलरी में देरी हुई है. 5वें दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं करने के कारण ऐसा है. इसमें हॉस्पिटल के लिए विशेष पैकेज भी शामिल है. सैलरी को लेकर दिल्ली सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही है और जैसे ही हमें फंड जारी किए जाते हैं, सैलरी दे दी जाती है.

MCD  में बीजेपी की चलती है क्योंकि वहां अधिकतर पार्षद बीजेपी के हैं और दिल्ली में है आम आदमी पार्टी की सरकार. ऐसे में MCD और दिल्ली सरकार के बीच लंबे वक्त से टकराव जारी है. MCD ने आरोप लगाया है कि सरकार ने उन्हें फंड का उचित हिस्सा नहीं दे रही है जबकि सरकार का आरोप है कि MCD पैसों का दुरुपयोग करती है.

मामले पर नॉर्थ MCD में विपक्षी आम आदमी पार्टी के नेता सुरजीत पवार ने कहा है कि दिल्ली सरकार ने उन्हें उनके ड्यू से ज्यादा पेमेंट किया है. यदि वे सैलरी नहीं दे सकते तो उन्हें प्रशासन को दिल्ली सरकार को सौंप देना चाहिए.


विडियो- कोरोना वायरस के बीच मुंबई के अस्पतालों का हाल देख एक्सपर्ट बोले- ऐसे तो बढ़ेंगे ही केस

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