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जिस शख्स को भीड़ ने घेरकर लाठी-डंडों से पीटा, उसने अपनी वायरल तस्वीर पर क्या कहा?

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लेकर दिल्ली के कई इलाके पिछले तीन दिनों से हिंसा की चपेट में हैं. 24 फरवरी को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के कुछ इलाके- जाफराबाद, मौजपुर-बाबरपुर, भजनपुरा में भयंकर आगजनी और तोड़फोड़ हुई. CAA के समर्थक और विरोधियों के बीच पत्थरबाजी, मारपीट हुई. हिंसा की कई तस्वीरें सामने आईं. इनमें से एक तस्वीर में दिखा कि कुछ लोग घुटनों के बल पड़े एक व्यक्ति को लाठी-डंडों और रॉड से पीट रहे हैं. भीड़ में कुछ लोग हेलमेट लगाए हुए हैं.

इस तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति का नाम मोहम्मद ज़ुबैर है. अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने ज़ुबैर से बातचीत की. उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन क्या हुआ था.

घटना वाले दिन क्या हुआ था?

24 फरवरी, सोमवार को जब मोहम्मद ज़ुबैर अपने घर से निकले, तो उनके मन में एक ही बात थी. लौटते समय वो अपने बच्चों के लिए हलवा और पराठे लेकर जाएंगे. चांद बाग के रहने वाले जुबैर इससे पहले कि घर लौटते, भीड़ ने उन्हें घेर लिया. भीड़ लाठी-डंडों और सरिया से पीटने लगी. उन्होंने रहम की भीख मांगी, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी. भीड़ उन्हें तब तक मारती, जब तक वो अधमरा नहीं हो गए.

मोहम्मद ज़ुबैर पर हमले की फोटो रॉयटर्स के फोटोग्राफर ने खींची. 25 फरवरी, मंगलवार को शेयर की. देखते ही देखते ये तस्वीर वायरल हो गई.

मोहम्मद ज़ुबैर को जब होश आया, तो वो जीटीबी अस्पताल में थे. उन्हें इस हमले के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं है, लेकिन वायरल तस्वीर उनके जख्म को हरा कर देती है. उनके दर्द को बढ़ा देती है. उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में कहा,

वे लोग मुझे तब तक पीटते रहे, जब तक मैं अधमरा नहीं हो गया. मैंने उनसे रहम की भीख मांगी, लेकिन उन्होंने मुझे और मारा. वो लोग मजहब को लेकर गालियां दे रहे थे. बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का नाम लेकर पीट रहे थे. मुझे बहुत ज्यादा याद नहीं है. मैं उम्मीद करता हूं कि मेरे बच्चे सुरक्षित होंगे. मुझमें अपनी वायरल तस्वीर देखने की हिम्मत नहीं है. मेरे पैर दर्द से कांप रहे हैं.

क्या बोले चश्मदीद?

चश्मदीदों के मुताबिक, मोहम्मद ज़ुबैर 24 फरवरी को नमाज़ पढ़ने निकले थे. लेकिन भीड़ ने उन्हें घेर लिया और लाठी-डंडों से निशाना बनाया. भीड़ उन्हें तब तक पीटती रही, जब तक वो बेहोश नहीं हो गए. उन्हें सिर, हाथ, कंधे और पैर में चोट आई है. हालांकि उन्हें जीटीबी हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गई है. वे इंदरपुरी में अपने रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं.

मोहम्मद ज़ुबैर की दो बेटियां हैं. एक की उम्र पांच और दूसरे की दो साल है. एक बेटा है, जो चार साल का है. ज़ुबैर को अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है, इसलिए उन्हें यूपी के अपने गांव भेज दिया है. ज़ुज़ुबैरबैर की पत्नी गांव में शादी अटेंड करने गई थीं. पत्नी को वापस लाने के लिए वो जाने वाले थे.

ज़ुबैर ने कहा,

मेरी पत्नी और बच्चे इन सब से दूर हैं. मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं. मैं दुआ की नमाज़ पढ़कर वापस घर लौट रहा था. बच्चों के लिए मिठाई लेकर जा रहा था. मुझे लगा कि वो इससे खुश हो जाएंगे. मुझे नहीं पता कि मैं उन्हें फिर कब देख पाऊंगा.

ज़ुबैर नौवीं पास हैं. मजदूरी करते हैं. महीने का 15,000 तक कमा लेते हैं. चांद बाग में उनका दो कमरों का घर है. उनके छोटे भाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने खुद को इस घर में कैद कर लिया है. घर के बाहर किसी तरह की आहट होने पर ज़ुबैर की मां डर जाती हैं. मोहल्ले के बच्चे बार-बार पर्दे से घर के अंदर झांकने की कोशिश करते हैं.

परिवार केस दर्ज क्यों नहीं कराना चाहता?

ज़ुबैर के भाई और परिवार के अन्य सदस्य उनसे मिल नहीं पा रहे हैं. वे अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं. जब लोग ज़ुबैर के भाई से पुलिस से शिकायत करने के लिए कहते हैं, तो वो झल्ला जाते हैं.

नाम न छापने की शर्त ज़ुबैर के भाई ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से कहते हैं,

किसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराएं. भीड़ के खिलाफ. हम छोटे लोग हैं. हमारा इस प्रदर्शन से कुछ लेना-देना नहीं है. हमें इसमें घसीट लिया गया है. यह खुद को बचाने की लड़ाई है.

ज़ुबैर का कहना है कि उनके कई दोस्त हिन्दू हैं. इस बदले हुए माहौल से ज़ुबैर बेहद दुखी हैं.


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