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मेट्रो के फर्श पर बैठने पर जुर्माना क्यों देना पड़ता है?

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दिल्ली मेट्रो में जो लोग यात्रा करते हैं वो इस बात से भली-भांति वाकिफ होंगे कि कुछ चीज़ें ऐसी हैं जो मेट्रो परिसर में करने पर आप पर जुर्माना हो सकता है. मसलन फोटो शूट करना, वीडियो बनाना, गली गलौज करना, निर्धारित स्टेशन से आगे यात्रा करना आदि आदि. लेकिन एक ऐसा अपराध भी है जिसे अपराध कहना भी ठीक नहीं लगता. और हम सबने वो किया है.

आदमी थका हुआ है और सुस्ताने के लिए कहीं बैठ जाए तो क्या ये अपराध हुआ भला? हमारी नज़र में तो नहीं हुआ लेकिन दिल्ली मेट्रो की किताब में ये गुनाह है और इसके लिए बाकायदा जुर्माने की भी व्यवस्था है. यही नहीं, पिछले 11 महीने में केवल फर्श पर बैठने वाले लोगों से 38 लाख का जुर्माना वसूला भी गया है.

एक आरटीआई से पता चला है कि दिल्ली मेट्रो ने पिछले साल 51,000 यात्रियों से कुल 90 लाख रुपये जुर्माने के तौर पर वसूले.

दिल्ली मेट्रो की पीली लाइन की मेट्रो व्यस्ततम मेट्रो है.
दिल्ली मेट्रो की पीली लाइन की मेट्रो व्यस्ततम मेट्रो है.

यही जानने के लिए हमने दिल्ली मेट्रो के एक अधिकारी से बात की. ये बातचीत नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर हुई, सो आपके लिए वो अज्ञात ही रहेंगे. हमारा पहला सवाल यही था कि आखिर मेट्रो के फर्श पर बैठना अपराध है ही क्यों? इसपर उनका कहना था, ”जब आदमी बैठ जाता है, तो दो या तीन लोगों की जगह घेरता है.”

ठीक है. मान लिया. लेकिन तब का क्या, जब मेट्रो की बस सीटें भरी हों और फ्लोर खाली? ऐसे में ना तो जगह की कमी होती है और ना ही लोगों को आपसे कोई परेशानी. दिल्ली मेट्रो में तो ऐसा भी हो जाता है कि सीटें पूरी खाली होती हैं और लोग फर्श पर ही बैठे होते हैं. तब अधिकारी जी ने दिल्ली मेट्रो की बहादुरगढ़ लाइन का एक उदाहरण बता दिया जब एक आदमी दो डिब्बों के बीच वेस्टीब्यूल (कपलिंग वाली जगह; जहां डिब्बे एक-दूसरे से जुड़ते हैं) में सो गया और उसपर जुर्माना किया गया.

अधिकारी इस बात का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके कि उस वक़्त फर्श पर बैठना किस तरह अपराध हो सकता है जब मेट्रो लगभग खाली हो और किसी का पसर-कर बैठने का मन हो. उनका तर्क कुछ यूं था कि कल को लोग ये भी कहेंगे कि मेट्रो खाली है और हम बिना टिकट यात्रा करेंगे या फर्श पर थूकेंगे. बताइए भला, ऐसा भी होता है कहीं?

द्वारका-नोएडा लाइन पर फर्श पर बैठने की काफी घटनाएं दर्ज की गई हैं.
मेट्रो में कई लोग खासतौर पर वेस्टीब्यूल पर बैठना पसंद करते हैं.

आखिर में उन्होंने कहा, हम ऐसे ही किसी को फर्श पर बैठने की इजाज़त नहीं दे सकते. ये पूछने पर कि क्या भविष्य में इस जुर्माने को कभी ख़त्म किया जा सकता है, तो उन्होंने लपककर कहा कि ख़त्म करना छोड़िए इसे तो और ज्यादा सख्ती के साथ लागू करने की कोशिश की जाएगी.

ऐसे ही बहुत सारे नियम हैं जिनका कोई सिर पैर नज़र नहीं आता, मसलन अपने बैंक अकाउंट में न्यूनतम रुपए रखने का और रेलवे में चार्ट बन जाने के बाद अपने-आप कैंसल हो जाने वाले वेटिंग टिकट पर कैंसलेशन चार्ज लगने का. खैर, अब ये नियम हैं तो पालन भी करना पड़ेगा लेकिन ये सवाल ज़रूर पूछा जाएगा कि इन नियमों के पीछे उद्देश्य क्या है? क्या ये सिर्फ मुनाफे की नज़र से बनाए नियम हैं या फिर इनसे लोगों को सचमुच कोई ऐसा फायदा है जो आम आदमी का दिमाग पकड़ नहीं पाता.


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Delhi Metro recovers 38 lakh from passengers sitting on floor of Delhi metro

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