Submit your post

Follow Us

दिल्ली दंगे: पुलिस पर बंदूक तानने वाले शाहरुख को पेशी के लिए अलग गाड़ी चाहिए थी, कोर्ट ने सुना दी

उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान एक पुलिस कर्मी पर पिस्तौल तानने वाले शाहरुख पठान की एक मांग को अदालत ने मानने से इन्कार कर दिया. शाहरुख पठान ने हाल ही में याचिका डाली थी कि जब भी उसे कोर्ट में पेश किया जाए, तो उसे अलग से जेल वैन दी जाए. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शाहरुख ने हाथ से लिखी याचिका में ये रिक्वेस्ट की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, एडिशनल सेशन जज अमिताभ रावत ने ये कहते हुए शाहरुख की याचिका खारिज कर दी कि उसे किसी भी तरह का खतरा नहीं है, ऐसे में उसके लिए विशेष इंतजाम नहीं किए जा सकते. रिपोर्ट के अनुसार, जज ने कहा,

“आरोपी को वैन में इस व्यवस्था के साथ लाया जाता है कि दूसरे आरोपी उसके पास नहीं पहुंच पाते हैं, तो ऐसे में उसे अलग वैन में लाने की जरूरत नहीं है. आरोपी शाहरुख पठान को नियमित तौर पर कोर्ट में पेश किया जा रहा है. ऐसे में वो ये नहीं बता सकता कि उसे किस तरह से कोर्ट में पेश किया जाएगा.”

वहीं इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने ये भी कहा,

“वो किसी पर हुक्म नहीं चला सकता कि उसे कोर्ट में कैसे लाया जाना चाहिए.”

दरअसल बीती 4 दिसंबर को इस संबंध में एक याचिका लॉकअप इंचार्ज की तरफ से कड़कड़डूमा कोर्ट में दायर की गई थी. इसमें बताया गया कि एक सुनवाई के लिए शाहरुख पठान को कोर्ट ले जाना था, लेकिन उसने जेल वैन में जाने से इन्कार कर दिया. कहा कि उसे अलग से वैन दी जाए, तो ही वो जाएगा.

इसी याचिका में पठान को हथकड़ी में अदालत में पेश किए जाने की अपील भी की गई थी. याचिका में ये भी कहा गया कि अगर हर आरोपी इसी तरह की मांगें रखेगा तो मौजूदा साधनों के साथ काम करना संभव नहीं होगा.

वकील ने नहीं डाली एप्लिकेशन

बहरहाल, पठान की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये भी पाया कि उसके वकील ने अलग गाड़ी के लिए कोई एप्लिकेशन नहीं डाली है. केवल आरोपी ने अपनी तरफ से कागज पर लिख कर मांग की थी कि पेशी के लिए उसे अलग से गाड़ी दी जाए. हालांकि लॉकअप इनचार्ज ने अदालत को बता दिया कि पठान को अलग गाड़ी दे पाना संभव नहीं होगा क्योंकि संसाधन सीमित हैं.

उत्तरपूर्वी दिल्ली दंगे साल 2020 के फरवरी महीने में हुए थे.
उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे साल 2020 के फरवरी महीने में हुए थे.

शाहरुख पठान पर जाफराबाद पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज है. वो कई बार जमानत याचिका दाखिल कर चुका है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, पठान ने कोर्ट को बताया है कि उसने पुलिस कर्मी पर बंदूक केवल डराने के लिए तानी थी. उसका उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था.

बता दें कि शाहरुख पठान पर आईपीसी के सेक्शन 307 यानी हत्या के प्रयास के आरोप के तहत केस चल रहा है. इसके अलावा पठान पर धारा 147 (दंगा करना), 148 (जानलेवा हथियार की मौजूदगी), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा), 153 A (अलग-अलग समूहों को भड़काना), 186 (सरकारी कामकाज में बाधा), 188 (सरकारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन) और 120 B यानी आपराधिक षड्यंत्र के तहत मुकदमा चल रहा है.


वीडियो- दिल्ली दंगे मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाए, सख्त टिप्पणी की

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

टॉप खबर

ट्रैवल हिस्ट्री नहीं होने के बाद भी डॉक्टर के ओमिक्रॉन से संक्रमित होने पर डॉक्टर्स क्या बोले?

बेंगलुरु में 46 साल के एक डॉक्टर कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित पाए गए हैं.

क्या BYJU'S अच्छी शिक्षा देने के नाम पर लोगों को अनचाहा लोन तक दिलवा रही है?

ये रिपोर्ट कान खड़े कर देगी.

Jack Dorsey ने Twitter का CEO पद छोड़ा, CTO पराग अग्रवाल को बताया वजह

इस्तीफे में पराग अग्रवाल के लिए क्या-क्या बोले जैक डोर्से?

पेपर लीक होने के बाद UPTET परीक्षा रद्द, दोबारा कराने पर सरकार ने ये घोषणा की

UP STF ने 23 संदिग्धों को गिरफ्तार किया.

26 नए बिल कौन-कौन से हैं, जिन्हें सरकार इस संसद सत्र में लाने जा रही है

संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से 23 दिसंबर तक चलेगा.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चकाचक निर्माण से लोगों को क्या-क्या मिलने वाला है?

पीएम मोदी ने गुरुवार 25 नवंबर को इस एयरपोर्ट का शिलान्यास किया.

कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद पंजाब की राजनीति में क्या बवंडर मचने वाला है?

पिछले विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला था, इस बार त्रिकोणीय से बढ़कर होगा.

UP पुलिस मतलब जान का खतरा? ये केस पढ़ लिए तो सवाल की वजह जान जाएंगे

कासगंज: पुलिस लॉकअप में अल्ताफ़ की मौत कोई पहला मामला नहीं.

कासगंज: हिरासत में मौत पर पुलिस की थ्योरी की पोल इस फोटो ने खोल दी!

पुलिस ने कहा था, 'अल्ताफ ने जैकेट की डोरी को नल में फंसाकर अपना गला घोंटा.'

ये कैसे गिनती हुई कि बस एक साल में भारत में कुपोषित बच्चे 91 प्रतिशत बढ़ गए?

ये ख़बर हमारे देश का एक और सच है.