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दीपिका पादुकोण JNU क्या गईं, सोशल मीडिया के 'संस्कारियों' ने गालियों की झड़ी लगा दी

दीपिका पादुकोण. ट्विटर के ट्रेंड्स में दो दिन से उनकी फिल्म ‘छपाक’ टॉप पर बनी हुई है. वजह है दीपिका का JNU जाना. 5 जनवरी को कैम्पस में हुई हिंसा के विरोध में JNU के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं. इन्हीं स्टूडेंट्स को अपना समर्थन देने के लिए दीपिका 7 जनवरी की शाम यूनिवर्सिटी पहुंची थीं.

दीपिका को लेकर सोशल मीडिया दो धड़े में बंटा हुआ है. एक धड़ा दीपिका के साथ खड़ा है. उनकी तारीफ कर रहा है कि आखिरकार उन्होंने इस मुद्दे पर स्टैंड लिया. कुछ लोग दीपिका की आलोचना कर रहे हैं कि फिल्म के प्रमोशन के लिए उन्होंने JNU हिंसा जैसी संवेदनशील घटना का इस्तेमाल किया. इस पर लोग उनके साथ खड़े हैं कि फिल्म प्रमोशन के लिए लोग कपिल शर्मा शो में जाते हैं, चैट शो में जाते हैं, कोई जेएनयू नहीं जाता. खैर.

लेकिन एक दूसरा धड़ा दीपिका के खिलाफ खड़ा हो गया है. उन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग का, नक्सलवादियों का, देश विरोधियों का समर्थक बता रहा है. लोग उनकी फिल्म ‘छपाक’ को बायकॉट करने की अपील कर रहे हैं. फिल्म में आरोपी का नाम बदले जाने को लेकर सवाल कर रहे हैं.

किसी कदम पर किसी सेलेब का सपोर्ट करने या उसका विरोध करने में कोई बुराई नहीं है. हर व्यक्ति के पास अपनी राय रखने की आज़ादी है. लेकिन सोशल मीडिया पर लीचड़ों की तादात भी काफी ज्यादा है, जिन्हें गाली और रेप की धमकी देना ही आता है. JNU में दीपिका की तस्वीरें वायरल होने के बाद ऐसे लोग सुपर एक्टिव हो गए.

संस्कार, धर्म, देशभक्ति और संस्कृति के नाम पर इन लोगों ने दीपिका के लिए गालियों की झड़ी लगा दी. किसी ने उन्हें ‘वेश्या’ बोला, तो किसी ने ‘रं*’, कुछ लोगों ने उन्हें दो कौड़ी कि नचनिया तक कह डाला. वहीं, कुछ लोग दीपिका का नाम संजय लीला भंसाली के साथ जोड़ने लगे.

एक ने गालियों से भरा पोस्ट लिखा. कहा,

‘दीपिका जैसे हिंदुओं के कारण आज पाकिस्तान भी हंस रहा है. हम अपनी संस्कृति और सौहार्द से काफी दूर गर्त में जा रहे हैं. वक्त है. हम अपने परिवार के बच्चों को सही संस्कृति और सही रास्ते पर लेकर चला सकें और आने वाली पीढ़ी को इनकी वास्तविकता से अवगत कराएं. इनके द्वारा परोसे जाने वाले मनोस्थिति को दूषित और विचलित करने वाली चीजों से अपने बच्चों को सदा दूर रखें इसी में हम सब की भलाई है!’

Deepika Padukone 1
दीपिका के विरोध में किए जा रहे पोस्ट.

इस पोस्ट में कुछ गालियां भी थीं, जिन्हें हमने छिपा दिया है. कुछ लोगों ने इतने भद्दी बातें लिखी हैं कि उन्हें हम यहां बता भी नहीं सकते हैं.

कौन हैं ये लोग?

ये वो लोग हैं जो खुद को ‘संस्कृति’ का ठेकेदार समझते हैं. दूसरों को उनकी ‘मर्यादा’ बताने को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं. इनके सोशल मीडिया अकाउंट को देखकर तो लगता है कि इनके विचारों से मिलती जुलती बातें कहने वाला इनकी नजर में ‘संस्कारी’ हैं और जो इनके विचारों के उलट सोचता है, वो इनके लिए ‘असंस्कारी’ हो जाता है.

ये वो लोग हैं, जो खुद को दुनिया का सबसे बड़ा ‘देशभक्त’ मानते हैं. किसी भी बात में इनसे अलग राय रखने वाला व्यक्ति इनकी नज़र में देशद्रोही हो जाता है. और छोटे कपड़े पहनने वाली लड़कियां इनके नज़र में न संस्कारी हैं और न देशभक्त. इनके अंदर इतनी ‘मर्यादा’ है कि शांतिपूर्ण तरीके से किसी प्रदर्शन का सपोर्ट करने वाली औरत इनकी नजर में ‘वेश्या’ बन जाती है. ‘मर्यादा’ में बंधे इन लोगों को फिर उसे ‘संस्कार’ सिखाने के लिए मजबूरन गालियों का सहारा लेना पड़ता है.

Deepika Padukone
इसी तरह के कई सारे मैसेज पोस्ट किए जा रहे हैं.

दीपिका का JNU जाना, वहां के स्टूडेंट को सपोर्ट करना, ये उनका निजी फैसला था. उन्हें पूरा हक है. उन्होंने किसी को गाली नहीं बकी, किसी के लिए टुच्ची बातें नहीं की, फिर भी सोशल मीडिया के तथाकथित ‘संस्कारी’ लोग उनके पीछे पड़ गए. वो एक्ट्रेस हैं. इसका ये मतलब नहीं कि लोग उनके प्रोफेशन को लेकर लोग उनपर गिरी हुई टिप्पणियां लिखें. उन्हें वेश्या, नचनिया कहें.

दूसरी तरफ हैं पायल रोहतगी. सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. ये भी उसी प्रोफेशन में हैं, जिसमें दीपिका हैं, लेकिन पायल के विचार सोशल मीडिया के तथाकथित ‘संस्कारी’ लोगों के विचारों से मेल खाते हैं, इसलिए उन्हें उनके प्रोफेशन की वजह से टारगेट नहीं किया जाता. एक हैं कंगना रनौत. तथाकथित ‘संस्कारी’ लोग इनके लिए अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करते. क्यों भई? ये भी तो एक्ट्रेस हैं, वही काम करती हैं जो दीपिका करती हैं. इन्हें इसलिए टारगेट नहीं किया जाता, क्योंकि कंगना के विचार इन तथाकथित ‘संस्कारी’ लोगों के विचारों से मेल खाते हैं.

आखिर में एक सवाल, ये कैसे संस्कारी लोग हैं जिनके संस्कार उन्हें किसी महिला को गाली देने, उस पर ओछी टिप्पणी करने की छूट देते हैं?


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