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गोवा में ऑक्सीजन की कमी से 15 और मौतें, अस्पताल का हाल ऐसा कि रूह कांप जाए

गोवा के सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में फिर से लापरवाही हुई. ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की वजह से 15 मरीजों की जान चली गई. घटना आधी रात 2 बजे से लेकर सुबह के 6 बजे हुई. जिस अस्पताल में ये घटना हुई, वहां बदइंतजामी के हालात ऐसे हैं कि दिल बैठ जाए.

इस सरकारी अस्पताल में पिछले चार दिन के अंदर 74 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके लिए ऑक्सीजन की कमी को जिम्मेदार माना जा रहा है. मंगलवार को यहां 26 मरीजों ने ऑक्सीजन न मिलने पर जान गंवाई थी. बुधवार को 20 लोगों की मौत हुई. गुरुवार को फिर 15 लोगों की जान चली गई. अब शुक्रवार को 15 मरीजों को ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण जान से हाथ धोना पड़ा है. मंगलवार को भी रात 2 बजे से लेकर सुबह 6 बजे के बीच मौतें हुई थीं. इस बार भी यही वक्त जानलेवा साबित हुआ है.

ये घटना तब हुई है, जब एक दिन पहले ही हाई कोर्ट ने प्रमोद सावंत सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी. सरकार ने दावा किया था कि ये मौतें ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई हैं. इस पर कोर्ट ने कहा था कि आंकड़े तो कुछ और दिखा रहे हैं. हेल्थ सेक्रेटरी ने कोर्ट में दावा किया था कि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है. बस सिलिंडरों के ट्रांसपोर्ट में समस्या आ रही है.

इस मुद्दे को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे भी सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की ओर इशारा करते हुए कहा था कि यहां सोमवार को 1200 जंबो सिलिंडरों की जरूरत थी, लेकिन मिले सिर्फ 400. ऑक्सीजन को लेकर आ रही दिक्कत की हाई कोर्ट को जांच करानी चाहिए.

इसके बाद, सीएम प्रमोद सावंत ने मंगलवार को कोरोना वार्ड का दौरा किया. उसके बाद उन्होंने कहा-

‘ऑक्सीजन आने में देरी की वजह से हॉस्पिटल में सप्लाई बाधित हुई. हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि मौतें इस वजह से ही हुई हैं.’

GMC में डरा देने वाले हालात

ऐसा नहीं है कि गोवा मेडिकल कॉलेज में सिर्फ ऑक्सिजन सप्लाई की ही समस्या है. यहां पर मरीज जिस हालात में अपना इलाज करवा रहे हैं. वो स्थिति तो और भी दयनीय और डराने वाली है.

आजतक के संवाददाता सौरभ वक्तानिया ने अस्पताल के अंदर जाकर हालात का जायजा लिया. वहां कोविड वार्ड बुरी तरह से भरा हुआ था. इलाज के लिए आए मरीज ज़मीन पर लेटने को मजबूर हैं. अस्पताल की तरफ से उन्हें ज़मीन पर लेटने के लिए कोई गद्दा तक नहीं दिया जा रहा है. लोग अपने मरीजों के लिए खुद ही गद्दा या चटाई की व्यवस्था कर रहे हैं. स्टोर रूम तक में मरीज लेटे हैं.

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गोवा मेडिकल कॉलेज के अंदर की तस्वीर. फोटो: India Today

आजतक संवाददाता से बात करते हुए कई परिजनों ने अपना दर्द बताया. एक मरीज के परिजन ने कहा-

‘प्लीज़ गोवा की मदद कीजिए. गोवा को बचा लीजिए. हालात बद से बद्तर हैं.’

मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड नंबर 147 में तो कदम रखने तक की जगह भी नहीं दिख रही. वार्ड में इतने मरीज हैं कि ज़मीन पर भी लोगों को जगह नहीं मिल पा रही. इससे भी खराब स्थिति ये है कि यहां कोविड वार्ड में किसी के भी आने-जाने पर रोक नहीं है. ऐसा इसलिए कि कोविड मरीज़ों को संभालने के लिए अस्पताल की तरफ से कोई अटैंडेंट नहीं हैं. परिजन ही अपनी जान जोखिम में डालकर अपने मरीज की देखभाल कर रहे हैं.

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गोवा मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड 147 की तस्वीर, जहां कदम रखने तक की जगह नहीं है. फोटो: India Today

एक मरीज के परिजन हेमंत कांबले ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा,

”सबसे पहले तो मुझे बेड ही नहीं मिला क्योंकि यहां कोई स्टाफ मौजूद नहीं था. हमें खुद ही अपने मरीज को अस्पताल के अंदर ले जाना पड़ा. जब हमें बेड मिला तो कोई गद्दा नहीं मिला. मैं खुद अपने घर से गद्दा लेकर आया हूं.

इतना ही नहीं, यहां ऑक्सिजन की भी कोई व्यवस्था नहीं है. मुझे ऑक्सिजन के लिए बड़ी रकम देनी पड़ी. उसके बाद मैं खुद ऑक्सिजन सिलेंडर लेकर आया. ना तो यहां दवाई है, ना कोई देखरेख करने वाला स्टाफ है. सब कुछ मरीज़ों के रिश्तेदारों पर छोड़ रखा है.

इस मामले पर जब आजतक के संवाददाता ने अस्पताल प्रशासन से बात करने की कोशिश की तो कोई भी जवाब देने के लिए सामने नहीं आया.


कोविशील्ड के दूसरे डोज़ के लिए आपको ज़्यादा इंतज़ार क्यों करना पड़ेगा?

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