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क्या पीएम मोदी अपनी संपत्ति को लेकर चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देते रहे हैं?

# क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देते रहे हैं?

# क्या मोदी ने चुनाव आयोग के सामने तथ्यों को छिपाया है?

# क्या उन्होंने ये छिपाया कि गुजरात के गांधीनगर में उनका एक प्लॉट है?


ये सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि कारवां पत्रिका ने पत्रकार निलीना एमएस और कौशल श्राफ की एक रिपोर्ट छापी है. साथ ही, इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका यानी PIL भी दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि 2012 और 2014 के बीच नरेंद्र मोदी ने चुनाव आयोग को जो हलफनामे दिए, उनमें एक प्लॉट छिपाया गया है. ये प्लॉट गांधीनगर में है. इसके मालिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं.

# क्या आरोप है प्रधानमंत्री पर?

कारवां पत्रिका के मुताबिक पूर्व पत्रकार साकेत गोखले ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका PIL दायर की है. इसमें कहा गया है कि-

2007 में नरेंद्र मोदी ने चुनावी हलफनामे में बताया कि वे गुजरात के गांधीनगर में सेक्टर-1 में प्लॉट नंबर 411 के एकलौते मालिक हैं. बाद में 2012 और 2014 में मोदी की तरफ से दाखिल चुनावी हलफनामों में इस प्लॉट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. वहीं, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि मोदी अब भी इस प्लॉट के मालिक हैं.

# साल 2012 में प्लॉट संख्या कैसे बदल गई?

कारवां की रिपोर्ट के अनुसार, इससे उलट साल 2012 के गुजरात चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी ने एक नया हलफनामा दाखिल किया गया. इस हलफनामे में गांधीनगर के उसी सेक्टर-1 में एक दूसरे प्लॉट 401/ए पर मोदी ने अपना मालिकाना हक जताया. मोदी ने हलफनामे में बताया कि उनके पास भूखंड का एक-चौथाई मालिकाना हक है. दूसरी तरफ, गुजरात राजस्व विभाग के पास ऐसे किसी प्लॉट की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. साल 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी ने प्लॉट नंबर 411 का कहीं-कोई जिक्र नहीं किया.

कांग्रेस ने मोदी-जेटली पर कार्रवाई की मांग की है. फाइल फोटो.
कांग्रेस ने मोदी-जेटली पर कार्रवाई की मांग की है. फाइल फोटो.

# क्या इसी प्लॉट के मालिक अरुण जेटली भी हैं?

कारवां के मुताबिक, इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प बात है. वो ये कि जिस प्लॉट का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हलफनामे में किया है, उसी प्लॉट नंबर 401 का जिक्र वित्तमंत्री अरुण जेटली के चुनावी हलफनामों में भी है. साल 2006 में दाखिल चुनावी हलफनामें में अरुण जेटली ने कहा कि वे प्लॉट नंबर 401 के इकलौते मालिक हैं. बाद में उनके आगे के हलफनामों में इस प्लॉट का जिक्र कहीं नहीं है. साल 2014 में जेटली ने अपने नए चुनावी हलफनामे में खुद को उसी प्लॉट 401/ए का एक-चौथाई मालिक बताया. इसी प्लॉट को एक चौथाई मालिक नरेंद्र मोदी ने भी खुद को बताया. जेटली के मुताबिक उनको ये प्लॉट गांधीनगर के मामलतेदार ने दिया था. खास बात ये है कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि अरुण जेटली प्लॉट 401 के एकलौते मालिक अब भी हैं. सवाल ये है कि इस प्लॉट 401/ए का कोई ऑफिशियल रिकॉर्ड ही नहीं है.

# मोदी-जेटली अलग-अलग मालिक कैसे हो गए?

कारवां ने सवाल उठाया है कि नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली एक ही प्लॉट के अलग-अलग एक चौथाई मालिक कैसे हो सकते हैं? नरेंद्र मोदी ने किस आधार पर 2007 के चुनावी हलफनामे में खुद को प्लॉट 411 का मालिक बताया? प्लॉट 411 गांधीनगर के उस इलाके में स्थित है, जहां केवल सांसदों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों को ही जमीनें आवंटित की जाती हैं. नरेंद्र मोदी 2001 में मुख्यमंत्री बने थे. और फिर फरवरी, 2002 में विधायक बने. और उस वक्त तक गुजरात सरकार उस इलाके में जमीनों का आवंटन बंद कर चुकी थी.

साल 2012 में एडवोकेट मीनाक्षी लेखी ने सुप्रीम कोर्ट में इस बाबत लिखित दिया था. उन्होंने कहा था कि गुजरात सरकार ने साल 2000 के बाद से इस इलाके में कोई भी प्लॉट आवंटित नहीं किया है, मीनाक्षी लेखी उस समय गुजरात सरकार की स्टेट काउंसलर थीं. ऐसे में नरेंद्र मोदी को प्लॉट 411 का मालिकाना हक कैसे मिला? जबकि वे 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे.

modi affidavit

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कारवां पत्रिका में छपे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली के हलफनामे. साभार. कारवां.
कारवां पत्रिका में छपे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली के हलफनामे. साभार. कारवां.

# कांग्रेस ने पूछा मोदी को प्लॉट कैसे मिला?

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री दोनों पर कार्रवाई की मांग की है. दोनों पर जनप्रतिनिधत्व कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 16 अप्रैल के दिन प्रेस कान्फ्रेंस करके आरोप लगाया कि-

पीएम मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गलत जानकारी दी है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जांच करने और कार्रवाई करने की मांग की है. गांधीनगर में साहेब (पीएम मोदी) ने साल 2002 में अपने हलफनामे में प्लॉट नंबर 411 सेक्टर 1 नाम की जमीन होने की बात कही थी. लेकिन, साल 2012 में मोदी ने अपने हलफनामे में इसका कोई जिक्र नहीं किया. साल 2006 के हलफनामे में अरूण जेटली दिखाते हैं कि उनके नाम भी 401/ए नाम से एक प्लॉट है जो 326.22 स्क्वायर मीटर है.

Press release by @Pawankhera, Spokesperson, AICC, on PM @narendramodi‘s mysterious property in Gandhinagar. pic.twitter.com/gRqj2FUEUH

— INC Sandesh (@INCSandesh) April 16, 2019

कांग्रेस ने दावा किया है कि रिकॉर्ड में प्लॉट नंबर 401 है. 401/ए नहीं है. इस प्लॉट की कीमत 1.19 करोड़ रुपए है. कांग्रेस ने कहा कि गुजरात सरकार ने साल 2000 के बाद से किसी को कोई जमीन आवंटित नहीं की है. तो सवाल ये है कि फिर गांधीनगर में मोदी जो को कैसे प्लॉट मिला. गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला है.

# भाजपा का क्या कहना है?

भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताया है. भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया,

कारवां के आरोप निराधार हैं. कांग्रेस के पास मुद्दों का अकाल है. आज का चुनावी मुद्दा ये था कि प्रधानमंत्री के प्लॉट (उनकी एकमात्र संपत्ति) का नंबर अब दूसरा दिखाया जा रहा है. पहले ये कुछ और था.

भाजपा ने एक और ट्वीट किया-

वित्तमंत्री के खिलाफ भी ऐसे ही आरोप लगाए गए हैं. ओछेपन की भी एक सीमा होती है. चार अलग-अलग लोगों ने मिलकर चार प्लॉट खरीदे थे. इनको 25 अप्रैल, 2008 को मिलाकर एक कर दिया गया. जाहिर है संयुक्त प्लॉट का नंबर अलग होगा.

# प्लॉट की सच्चाई क्या है?

अब विवाद के बाद इस प्लॉट की सच्चाई भी जान लीजिए. कारवां पत्रिका ने लिखा है कि उसके रिपोर्टर ने इस प्लॉट का मौके पर मुआयना किया. ये गांधीनगर का पूरा वीवीआईपी एरिया है. 411 नंबर का बड़ा सा प्लॉट अभी तक खाली पड़ा है. इस प्लॉट से लगे 410 नंबर प्लॉट पर एक बंगला बना है. कारवां रिपोर्टर ने वहां संपर्क किया तो घर में एक अधेड़ सज्जन से मुलाकात हुई. बगल वाले 411 नंबर प्लॉट के बारे में जब कारवां के रिपोर्टर ने पूछा कि ये प्लॉट किसका है, तो उस शख्स ने कारवां के रिपोर्टर उसका पहचान पत्र और मोबाइल नंबर मांगा. फिर अगले ही पल पुलिस को फोन कर दिया. फोन करके उसने पुलिस को बताया कि कोई पत्रकार आया है, जो ‘साहब’ के प्लॉट के बारे में जानकारी मांग रहा है. इस पर रिपोर्टर ने उस शख्स से पूछा के ये साहब कौन हैं, तो उसने बताया कि नरेंद्र भाई मोदी. थोड़ी ही देर में कारवां के रिपोर्टर के पास पुलिस का फोन आया. पुलिस ने उसके रिपोर्टर को धमकाया कि आखिर वो किसकी इजाजत से वहां तक आया.


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