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आप सोते रहे और इधर भारत की आबादी चीन से ज़्यादा हो गई!

दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश कौनसा?
– चीन
और दूसरे नंबर पर?
– हिंदुस्तान

ये बात हमने पीढ़ियों से रटी है. लेकिन हो सकता है कि पीढ़ियों से चली आ रही ये बात अब पलट गई हो. माने हो सकता है कि हिंदुस्तान की आबादी चीन की आबादी को ओवरटेक कर चुकी हो. चीन के ही एक रिसर्चर का कहना है कि चीन ने अपने सेनसस डाटा में झोल किया है जिससे उसकी जनसंख्या बढ़ी हुई नज़र आती है और असल में दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत है.

उनका कहना है कि 1991 से 2016 के बीच चीन में 37 करोड़ 76 लाख बच्चे पैदा हुए. लेकिन चीन ने बताए 46 करोड़ 48 लाख. माने चीन की आबादी में लगभग 9 करोड़ लोग फर्ज़ी हैं. तो इस हिसाब से चीन की आबादी 1.38 अरब की जगह 1.29 अरब हो जाती है. साधारण गणित के सिद्धांतों के तहत ये आंकड़ा भारत की आबादी 1.32 अरब से पूरे 3 करोड़ कम है. भारत की आबादी 2022 में चीन से आगे निकलने वाली थी, लेकिन फुक्सियान कह रहे हैं कि ये कांड पहले ही हो चुका है.

चीन के घर में घुस कर वहां के सरकारी सेन्सस को गलत बताने वाले ये तुर्रमखां हैं यी फुक्सियान. चीन से हैं लेकिन पिछले काफी समय से अमेरिका में रहते हैं. वहां की विस्कॉन्सन-मैडिसन यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं. और ये पहली बार नहीं है कि उन्होंने ये बात कही हो. वो इस बारे में लिखते रहे हैं. 2007 में उनकी एक किताब आई थी ‘बिग कंट्री विद एन एम्पटी नेस्ट’ नाम से. इसमें उन्होंने चीन की जनसंख्या नीति की खूब खिंचाई की थी.

यी फुक्सियान (फोटोःचाइना डेली)
यी फुक्सियान (फोटोःचाइना डेली)

फुक्सियान का मानना है कि चीन की वन चाइल्ड पॉलिसी से उसे फायदा कम नुकसान ज़्यादा हुआ है. इससे वहां की जन्म दर शून्य से भी नीचे चली गई है और जनसंख्या घट रही है. जनसंख्या घटना माने काम करने के लिए कम हाथ और कम काम माने कम आर्थिक विकास. और कम आर्थिक विकास का मतलब अमरीका को पीछे छोड़ने का चीन का सपना डिब्बाबंद.

ये बात लाज़मी तौर पर चीन की सरकार को पसंद नहीं आई. उनकी किताब चीन में बैन कर दी गई. इसके अलावा 2010 में फुक्सियान ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि उन्हें चीन लौटने पर गिरफ्तार तक किया जा सकता है. ये कहकर कि उन्होंने वन चाइल्ड पॉलिसी के तहत होने वाला एक अबॉर्शन रुकवाया. पिछले साल जब फुक्सियान वापस आए थे तो उनके सोशल मीडिया अकाउंट भी ब्लॉक कर दिए गए थे.

अब सवाल ये उठता है कि कोई देश आखिर अपनी आबादी बढ़ा कर क्यों बताएगा? माने कॉमन सेंस तो इसी तरह का बनता है न कि पापा की एनुअल इनकम और देश की आबादी हमेशा कम करके बताई जाए. तो बात यूं है कि एक वक्त था कि भारत और चीन दोनों अपनी लगातार बढ़ती जनसंख्या से परेशान थे. भारत ने लोगों को समझा बुझाकर आबादी को काबू में करना चाहा लेकिन चीन ने कड़क होकर 1979 में कानून बना दिया कि कोई मां-बाप एक से ज़्यादा बच्चे पैदा नहीं करेंगे. और इसका बड़ी सख्ती से पालन भी करवाया गया. खबरें आईं कि जब औरतें दूसरी बार गर्भवती होतीं तो उसका जबरन अबॉर्शन करवा दिया जाता.

चीन में आयोजित हुए एक कंप्टीटिव एग्ज़ाम में शामिल बच्चे (फोटोःReuters)
चीन में आयोजित हुए एक कंप्टीटिव एग्ज़ाम में शामिल बच्चे (फोटोःReuters)

कागज़ों पर ये कानून बड़ा कारगर लगता था. मां-बाप दो, बच्चा एक. घट गई जनसंख्या. लेकिन इतने कड़क कानून को कई लोगों ने हानिकारक भी बताया, जैसे फुक्सियान ने बताया. कहा गया कि इससे चीन में सेक्स रेशियो बिगड़ जाएगा. माने एक बच्चे के तौर पर ज़्यादातर लोग लड़कों को तरज़ीह देंगे, और इससे लड़कियों की संख्या घटती चली जाएगी. और ऐसा ही हुआ भी. फुक्सियान की तरह के कई रिसर्चर ये कहते थे कि वन चाइल्ड पॉलिसी से जनसंख्या में नेगेटिव ग्रोथ भी हो सकती है. माने पुराने लोगों की जगह काम करने लायक नए लोग नहीं आ पाएंगे. जैसा जापान में हो भी रहा है. कुछ-कुछ इसीलिए चीन ने 2015 में अपनी वन चाइल्ड पॉलिसी को वापस भी ले लिया.

चीन दुनिया पर राज करने के सपने देखता है. और इसमें वो तन-मन-धन से जुटा भी हुआ है. दुनिया पर दबदबा करने में काफी काम परसेप्शन का होता है. तो चीन नहीं चाहता कि उसकी एक सबसे विवादास्पद पॉलिसी के साइड इफेक्ट लोगों के सामने आएं. इसलिए हो सकता है कि चीन ने असल आंकड़े छुपाए हों. लेकिन ये एक दूर की कौड़ी है. ऐसा हो भी सकता है, नहीं भी हो सकता है. कुछ रिसर्चर कह भी रहे हैं कि फुक्सियान की बात गलत हो सकती है.

बाकी हमारे लिए इस खबर में खुश होने जैसा कुछ नहीं है. वो इसलिए कि गणित जो भी हो, एक बात याद रखी जाए- चीन की आबादी चाहे भारत से 9 करोड़ कम हो या 6 करोड़ ज़्यादा, उसके पास अपने लोगों को पालने-पोसने के लिए हमसे कहीं ज़्यादा और बेहतर संसाधन हैं.


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