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गलवान घाटी में भारत से लड़ाई पर चीन के लोग किस-किस तरह के सवाल उठा रहे हैं?

भारत और चीन के सैनिकों के बीच 15 जून को गलवान घाटी में लड़ाई हुई थी. इस घटना को एक सप्ताह हो चुका है. लेकिन चीन ने अभी तक लड़ाई में अपने नुकसान के बारे में कुछ नहीं बताया है. चीन ने पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीन के सैनिकों के मारे जाने को लेकर चुप्पी साध रखी है. वहीं भारत ने इस लड़ाई में एक अफसर सहित 20 जवानों को खोया. भारतीय सेना ने 16 जून को ही नुकसान के बारे में बता दिया था. चीन सरकार की ओर से नुकसान की जानकारी न दिए जाने पर वहां के नागरिकों में असंतोष दिख रहा है. जो सैनिक भारत से लगती सीमा पर तैनात हैं, वे अभी भी अपनों के बारे में अंधेरे में हैं.

गलवान घाटी पर दबे सुर में उठ रही आवाज

चीन अपने यहां सोशल मीडिया पर कड़ा पहरा रखता है. साथ ही सरकार विरोधी चीजों को हटा दिया जाता है. लेकिन गलवान घाटी की हिंसा को लेकर चीन में कई लोगों ने दबे सुर में आवाज उठाई है. सीधे-सीधे लिखने की बजाए चीनी सोशल मीडिया पर परोक्ष तरीके से भारत से विवाद के बारे में लिखा जा रहा है. लोग अपनी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं.

‘इंडिया टुडे’ ने किया वीबो का एनालिसिस

चीन में टि्वटर नहीं चलता है. वहां वीबो है. वीबो चीन का अपना टि्वटर है. ‘इंडिया टुडे’ के साईकरण कन्नन ने वीबो की पिछले कुछ दिनों की पोस्ट और बातचीत का एनालिसिस किया. एनालिसिस में उन्होंने जाना कि चीनी लोग गलवान घाटी की हिंसा से जुड़ी भारतीय तस्वीरें, न्यूज आर्टिकल और वीडियो शेयर कर रहे हैं. इनके जरिए वे चीनी सैनिकों के नुकसान को लेकर बयान की मांग कर रहे हैं.

कन्नन की रिपोर्ट के अनुसार, एक वीबो यूजर ने 19 जून को लिखा-

भारत ने अपने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है. यह भारत के अपने सैनिकों के प्रति सम्मान और उनकी परवाह को दिखाता है. यह भारत देश की एकजुटता को दिखाता है. और हम? हमें भारत से सीखना चाहिए. हमें सैनिकों का सम्मान करना चाहिए. हम क्यों मारे गए सैनिकों को सार्वजनिक श्रद्धांजलि नहीं देते? क्या कहा? चीनी सेना का कोई सैनिक नहीं मरा? क्या उन्होंने घायलों के बारे में बताया? कैसी बात कर रहे हैं?

चीन के सोशल मीडिया की एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट.
चीन के सोशल मीडिया की एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट.

18 जून को लिखी दूसरी पोस्ट में कहा गया,

चीन की सेना को जो कुछ भी हुआ, उसके बारे में वीडियो सबूत जारी करने की जरूरत है. यदि हमें कोई नुकसान नहीं हुआ, तो हमें यह दुनिया को साबित करना होगा. इसके जरिए ही अफवाहों और आशंकाओं को दूर किया जा सकता है.

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चीनी सैनिकों को अपने परिवार या दोस्तों को किसी भी तरह की जानकारी देने की सख्त मनाही है. इस वजह से भी चीन के लोगों में सैनिकों के बारे में सूचना नहीं है. वीबो पर इस बारे में भी लिखा गया है. एक यूजर ने 17 जून को लिखा है,

मैं भारत और चीन के बीच हालात को लेकर चिंतित हूं. विदेशी न्यूज और वीडियो ने हमारे सैनिकों के बारे में मेरी चिंता को बढ़ा दिया है. क्या उन्हें नुकसान हुआ है, क्योंकि अभी तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. (भारत ने 20 भारतीय जवानों की मौत के बारे में बताया है. उन्होंने उनकी फोटो भी जारी की है. हमारे चाइनीज बॉर्डर गार्ड उम्र में काफी जवान हैं, ऐसे में उनके माता-पिता परेशान हैं.

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कुछ चीनी लोगों ने सोशल मीडिया पर भारतीय सैनिकों का मजाक बनाए जाने पर भी ऐतराज़ जताया है. इसी बारे में एक यूजर ने 18 जून को लिखा,

भारत के साथ संघर्ष में सैकड़ों सैनिक शामिल हैं. चाहे जितना कड़ा अनुशासन और मेहनत हो, हम सब अभी नए हैं. ऐसा अनुमान है कि हमारे भी कई सैनिक घायल हुए हैं. हताहत भारतीय सैनिकों का मजाक बनाने और जश्न मनाने वालों को देख रहा हूं. यह देखकर मुझे खुशी और दुख, दोनों हैं. उन सैनिकों के परिवार वाले अभी बहुत परेशान होंगे.

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गलवान घाटी में लड़ाई के दो दिन बाद चीनी जनता में अपने सैनिकों को लेकर चिंताएं बढ़ गईं. ऐसे में वीबो पर इस बारे में पोस्ट भी ज्यादा लिखी जाने लगीं. सैनिकों के परिवारवाले अपनी चिंताओं को ऑनलाइन लिखने लगे. उनका कहना था कि लद्दाख क्षेत्र में तैनात सैनिकों से संपर्क नहीं हो रहा. उदाहरण के लिए 18 जून की ये पोस्ट पढ़िए-

सैनिकों और उनके परिवारों का भी ध्यान रखना जरूरी है. वो परिवार काफी चिंता में होंगे.

सैनिकों को लेकर काफी चिंतित हूं. उनके बारे में कुछ पता नहीं है. परिवार काफी परेशान है.

दोनों तरफ काफी नुकसान हुआ है. हम बिना नुकसान के इतने सैनिकों को नहीं मार सकते. उम्मीद है कि हमारे सैनिक ठीक होंगे.

मेरा भाई वहां तैनात है. हम बहुत चिंतित हैं. कोई खबर नहीं है.

हम नुकसान की जानकारी क्यों नहीं दे रहे हैं? क्या यह बताने के लिए हम जीते हैं? क्या हमारे 40 लोग शहीद हुए हैं?

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कुछ यूजर ने चीनी सरकार और मीडिया पर सूचनाओं को ब्लॉक करने का आरोप लगाते हुए भी पोस्ट लिखीं. इनमें कहा कि मीडिया भारत से संघर्ष मामले में बहुत कम जानकारी दे रहा है. 17 जून की लिखी इन पोस्ट को देखिए. इनमें लिखा है-

चीन में चीनी लोगों की मौत के बारे में क्यों नहीं बताया जा रहा है? लोगों के पास जानने का हक भी नहीं है. क्या कुछ लोगों ने बेकार में अपनी जान दे दी?

भारत में कुछ कट्टरपंथी और कुछ उदार लोग हैं. भारत-चीन के प्रत्येक संघर्ष के बाद भारतीय मीडिया में दो तरह की बातें होती हैं. एक कट्टरपंथियों की होती है, जो कहते हैं भारत को भारी नुकसान हुआ है. चीन को सबक सिखाना चाहिए और 1967 की तरह बदला लेना चाहिए. कुछ लोग ऐसा भी कहते हैं कि चीन हार गया है. उनके भारत से ज्यादा सैनिक मारे गए हैं और भारत जीता है. दूसरी तरफ हमारे यहां सब ठंडा रहता है. कभी-कभार घरेलू मीडिया नुकसान के बारे में बताता है. सामान्य आदमी के लिए चीन के घरेलू मीडिया से सही जानकारी लेना मुश्किल है.

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कोरोना के समय भी जानकारी दबाई गई

वीबो पर जिस तरह की पोस्ट लिखी जा रही हैं, उसे पता चलता है कि चीनी सरकार और मीडिया लोगों को अंधेरे में रखता है. कोरोना वायरस के शुरुआती दिनों में भी ऐसा ही हुआ था. वुहान के एक डॉक्टर ली वेनलियांग ने वायरस को लेकर चेतावनी दी थी. उन्होंने एक प्राइवेट चैट भी शेयर की थी. लेकिन चीन की सरकार ने वायरस पर एक्शन लेने की बजाए डॉक्टर और उसके साथियों पर अफवाहें फैलाने का आरोप लगा दिया था. बाद में फरवरी में वेनलियांग की कोरोना के चलते ही मौत हो गई थी. इसके बाद वीबो पर उनकी याद में कई हैशटैग चले थे. चीन सरकार ने इन हैशटैग को बाद में हटा दिया था.


Video: दुनियादारी: चीन का नाम PLA यानी पीपल्स लिबरेशन आर्मी से क्यों नहीं जुड़ा है?

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