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छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेसियों की इस गुंडई पर चुप क्यों हैं?

छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग. यहां कांकेर ज़िले में पत्रकारों के साथ सरेआम मारपीट हुई. इसके अलावा आदिवासी अधिकारों की बात करने वाले पत्रकार कमल शुक्ला को पीटते हुए सड़क पर घसीटा गया और भद्दी गालियां दी गईं. उनके सिर में गंभीर चोट आई है. आरोप है कि मारपीट करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता और पार्षद हैं. राज्य में कांग्रेस की सरकार है. मुख्यमंत्री हैं भूपेश बघेल. उनके राज में सड़कों पर पत्रकारों के साथ खुलेआम गुंडई चल रही है और साथ में चल रहा है मारपीट का वीडियो. पुलिस का कहना है कि चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

क्या है पूरा मामला

रिपोर्ट के मुताबिक, एक पत्रकार सतीश यादव नगर पालिका के ख़िलाफ ख़बरें छाप रहे थे और RTI आवेदन कर रहे थे. इसे लेकर 26 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे आरोपियों ने पहले संदीप यादव के साथ मारपीट की और थाने तक ले गए. बाद में पत्रकार कमल शुक्ला  पत्रकार सतीश यादव के समर्थन में थाने पहुंचे. थाने के बाहर से कमल शुक्ला ने एक फेसबुक लाइव भी किया. बाद में करीब 30 पत्रकार जमा हो गए और आरोपियों के ख़िलाफ केस दर्ज करने की मांग करने लगे.

सतीश यादव, जिन पर नगरपालिका के ख़िलाफ़ ख़बरें लिखने को लेकर हमला हुआ. फोटो: फेसबुक
सतीश यादव, जिन पर नगरपालिका के ख़िलाफ़ ख़बरें लिखने को लेकर हमला हुआ. फोटो: फेसबुक

विधायक प्रतिनिधि पर थाने में पिस्तौल लहराने का आरोप

कमल शुक्ला का आरोप है कि पुलिस ने कई असामाजिक तत्वों को थाने में घुसने दिया. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि एक विधायक प्रतिनिधि ने थाने में पिस्टल लहराई और जान से मारने की धमकी दी. बाद में थाने से निकलने पर कमल शुक्ला के साथ मारपीट हुई. उनकी शर्ट और सिर दोनों फट गए. इसका वीडियो वायरल हुआ.

पत्रकारों ने राज्यपाल अनुसुईया उइके को पत्र लिख घटना की शिकायत की और कांग्रेसी नेताओं पर जानलेवा हमले के आरोप लगाए. कांकेर थाने में भी केस दर्ज किया गया है. मारपीट करने वालों में विधायक प्रतिनिधि गफ्फार मेमन, गणेश तिवारी, कांग्रेस पार्षद शादाब खान, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जितेंद्र सिंह और वर्तमान अध्यक्ष सरोज सिंह ठाकुर के बेटे का नाम लिया गया है.

पत्रकारों का राज्यपाल के नाम पत्र.
पत्रकारों का राज्यपाल के नाम पत्र.

मैं डरा नहीं हूं: कमल शुक्ला

कमल शुक्ला बस्तर के जाने माने पत्रकार हैं और भूमकाल समाचार के संपादक हैं. वो पत्रकारों की सुरक्षा, मानवाधिकार और आदिवासी अधिकारों के पक्ष में लिखते रहे हैं. उनके खिलाफ इससे पहले राजद्रोह, मानहानि समेत तमाम केस दर्ज किए जा चुके हैं. घटना के बाद मीडिया से बातचीत में कमल शुक्ला ने कहा,

मैं डरा नहीं हूं. हमारे एक पत्रकार को मारते हुए थाने ले गए. नगरपालिका का एक गुंडा रहा है. उसने अपने गुंडे और पार्षद साथियों के साथ हमारे एक पत्रकार साथी को इसलिए पीटा कि वो नगरपालिका के खिलाफ समाचार लिख रहा था और RTI लगा रहा था. उसे थाने तक मारते हुए लाए.

इस घटना के बाद मैं थाने पहुंचा. दूसरे पत्रकार साथी भी पहुंचे. नगर के असामाजिक तत्व वहीं जमा हो गए. विधायक शिशुपाल सोरी के खिलाफ, रेत माफिया के खिलाफ मैं खबर लगा रहा हूं. इस पर विधायक के प्रतिनिधि ने थाने में पिस्तौल लहराई.

इसके अलावा कमल शुक्ला ने थाने से फेसबुक पर कई पोस्ट की. उन्होंने कहा,

कांकेर पुलिस खुद चाहती है कि पत्रकार पीटे जाएं. हम सब पत्रकार थाने में हैं और भारी संख्या में असामाजिक तत्वों को थाने में घुसने दिया जा रहा है.

कमल शुक्ला की फेसबुक पोस्ट
कमल शुक्ला की फेसबुक पोस्ट

एक और पोस्ट में उन्होंने कहा,

”भूपेश बघेल के संरक्षण में कांकेर नगर पालिका के सारे कांग्रेसी पार्षदों ने आज खुलकर की गुंडागर्दी और एक पत्रकार के साथ की पिटाई.”

कमल शुक्ला की फेसबुक पोस्ट.
कमल शुक्ला की फेसबुक पोस्ट.

पुलिस का क्या कहना है? 

कांकेर के एसपी एमआर अहिरे ने ‘दी लल्लनटॉप’ से बातचीत में बताया कि आरोपी गणेश तिवारी नाम का शख्स भी पत्रकार है. मामले में चारों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. थाने में लोगों की भीड़ और पिस्तौल लहराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है.

बस्तर में पिछले कुछ साल में तमाम पत्रकारों के खिलाफ राजद्रोह समेत IPC की अलग-अलग धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं. छत्तीसगढ़ पहले भी पत्रकारों के लिए हॉस्टाइल रहा है और भूपेश बघेल के दौर में भी पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं. देखते हैं, वो अपनी चुप्पी कब तोड़ते हैं?


बस्तर में रिपोर्टिंग के वक्त पत्रकारों को बताई जाती हैं ये सावधानियां

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