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इन 3 राज्यों में BSF का क्षेत्राधिकार बढ़ा, एक ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया

केंद्र सरकार ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी BSF के अधिकार क्षेत्र को बढ़ा दिया है. उसे पश्चिम बंगाल, असम और पंजाब में बॉर्डर से 50 किमी के अंदर के दायरे में गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती करने की शक्तियां दी गई हैं. पहले इन तीन राज्यों में BSF का क्षेत्राधिकार 15 किलोमीटर तक सीमित था. अब इसे बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है.

और क्या बदला है?

पंजाब, बंगाल और असम में BSF का क्षेत्राधिकार बढ़ाया गया है तो गुजरात में इसमें कम कर दिया गया है. मतलब 80 किमी से कम कर 50 किमी कर दिया गया है. हालांकि राजस्थान में ये दायरा पहले की तरह ही 50 किलोमीटर रखा गया है. वहीं केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर में मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर जैसे राज्यों के लिए ऐसा कोई दायरा परिभाषित नहीं किया गया है.

BSF अधिनियम, 1968 का सेक्शन 139 केंद्र सरकार को इलाका निर्धारित करने की शक्ति देता है. सोमवार को जारी नए नोटिस में सीमा से लगे इलाकों के ‘शेड्यूल’ को संशोधित किया गया है. अभी तक जुलाई, 2014 में जारी हुए नोटिस के तहत BSF का क्षेत्राधिकार परिभाषित था.

Bsf Patrolling In Jammu
पेट्रोलिंग के दौरान बीएसएफ के जवान. (फाइल फोटो- पीटीआई)

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, BSF के सूत्रों का कहना है कि इससे उनके जवानों को सीमाई इलाकों में ड्रग्स और हथियारों की गैरकानूनी सप्लाई रोकने और घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाने में मदद मिलेगी. हालांकि, कांग्रेस शासित पंजाब और तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल की सरकार गृह मंत्रालय के इस कदम को अपने अधिकारों पर अतिक्रमण बताकर विरोध कर सकती हैं. बल्कि पंजाब की तरफ से तो आपत्ति आ भी गई है.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दरअसल ये साफ नहीं है कि नोटिस जारी करने से पहले इन राज्यों को भरोसे में लिया गया था या नहीं. पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेता सुनील जाखड़ ने तो अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि सीएम चन्नी ने आधा पंजाब केंद्र के हवाले कर दिया है. उन्होंने सीएम चन्नी के एक पुराने ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा,

अपनी बात को लेकर सावधान रहना चाहिए. चरणजीत चन्नी ने अनजाने में पंजाब का आधा हिस्सा केंद्र सरकार को सौंप दिया. कुल 50,000 वर्ग किमी में से 25000 वर्ग किमी अब बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में होगा. पंजाब पुलिस खड़ी है. क्या हम अब भी राज्यों के लिए अधिक स्वायत्तता चाहते हैं?

पंजाब ने विरोध जताया

इस बीच सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की भी प्रतिक्रिया आ गई. उन्होंने ट्विटर के जरिये केंद्र सरकार के फैसला की आलोचना की. ट्वीट में सीएम चन्नी ने कहा,

‘मैं भारत सरकार के इस एकतरफा फैसला का कड़ा विरोध करता हूं. ये संघवाद पर सीधा हमला है. मेरी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील है कि वे इस बेसमझ फैसले को तुरंत वापस लें.’

वहीं पंजाब के उपमुख्यमंत्री एस सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी केंद्र के इस फैसले की आलोचना की है. उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मांग की है कि ये फैसला तुरंत वापस लिया जाए. सुखजिंदर रंधावा के पास पंजाब के गृह विभाग का कार्यभार है. उन्होंने एक बयान में कहा है,

ये अतार्किक निर्णय सीमा सुरक्षा बलों को बढ़ाने की भावना के खिलाफ था, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ध्यान केंद्रित करने और रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में कार्य करने की आवश्यकता है.

डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए जल्दी ही व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे. उन्होंने ये भी कहा कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने न तो इस मुद्दे को केंद्र के सामने उठाया और न ही अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कहा.

 


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