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दक्षिण में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ीं, कर्नाटक और केरल में टॉप नेता सवालों में क्यों हैं?

दक्षिण भारत में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं. जहां कर्नाटक में सीएम बीएस येदियुरप्पा को हटाने की मांग जोर पकड़ रही है. वहीं केरल में कथित हवाला के पैसों की लूट को लेकर बीजेपी के बड़े नेताओं को घेरने को कोशिश हो रही है. इसके चलते दोनों राज्यों में पार्टी थोड़ा असहज स्थिति में दिख रही है. मामला केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच गया है.

कर्नाटक : येदियुरप्पा की कुर्सी को खतरा?

पहले बात कर्नाटक की. यहां बीजेपी की सरकार है. येदियुरप्पा सीएम हैं. पिछले काफी वक्त से पार्टी के अंदर ही उनका विरोध हो रहा है. हालात ऐसे बन गए कि रविवार 6 जून को उन्हें कहना पड़ा कि अगर पार्टी चाहेगी तो वह अपना पद छोड़ने को तैयार हैं. येदियुरप्पा ने कहा,

“मैं सीएम पद पर बना रहूंगा. हाईकमान ने मुझ पर भरोसा जताया है. जिस दिन हाईकमान मुझसे इस्तीफा देने के लिए कहेगा, मैं उसी दिन इस्तीफा सौंप दूंगा. लेकिन तब तक मैं ही सीएम रहूंगा. मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि राज्य में मेरा कोई विकल्प नहीं है. मैं तभी तक सीएम हूं, जब तक पार्टी का मुझ पर भरोसा है.”

पिछले साल से ही निशाने पर येदियुरप्पा

आजतक की खबर के मुताबिक,  मौजूदा विवाद की शुरुआत पिछले साल ही हो गई थी. विधानसभाओं में फंड आवंटन को लेकर हुई एक इंटरनल मीटिंग में कुछ बीजेपी विधायकों ने येदियुरप्पा के खिलाफ बातें कही थीं. इसके बाद, कैबिनेट विस्तार को लेकर भी कुछ विधायक बागी मूड में आ गए. हाल ही में बीजेपी विधायक बसनगौड़ा यत्नाल ने पंचामशाली लिंगायतों को आरक्षण के मुद्दे पर येदियुरप्पा को घेरा. इनके अलावा, कई मंत्री और विधायक कोविड मैनेजमेंट को लेकर भी सीएम पर सवाल उठा चुके हैं.

यही नहीं, साल 2018 में जब येदियुरप्पा को सीएम बनाया जा रहा था, तब भी बढ़ती उम्र को लेकर उनका विरोध हुआ था. हालांकि बीजेपी ने इस विरोध को नजरअंदाज कर दिया था. बता दें कि 2018 में शपथग्रहण के बाद फ्लोर टेस्ट से ऐन पहले येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा था. तब जेडीएस और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई थी, और एचडी कुमारस्वामी सीएम बने थे. हालांकि कुछ समय बाद ही दोनों पार्टियों के कुछ विधायक बीजेपी में शामिल हो गए. इसका नतीजा ये हुआ कि 26 जुलाई 2019 को 78 साल के येदियुरप्पा को चौथी बार सीएम पद की शपथ दिला दी गई.

मार्च के महीने में कर्नाटक के ग्रामीण विकास मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने ही येदियुरप्पा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात करके आरोप लगाया था कि सीएम येदियुरप्पा उनकी सहमति और मंजूरी के ही बिना ही उनके मंत्रालय से जुड़े तमाम अहम फैसले ले रहे हैं. ईश्वरप्पा के अलावा विधायक बसनगौड़ा यत्नाल भी सार्वजनिक तौर पर बीएस येदियुरप्पा को पद से हटाने की मांग कर चुके हैं. उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि अगले चुनाव के बाद कर्नाटक में भी पार्टी को सीएम बदलना होगा.

जहां कई विधायक येदियुरप्पा के खिलाफ हैं, वहीं काफी ऐसे भी हैं जो उनके साथ हैं. रेवेन्यू मिनिस्टर आर. अशोक, और डिप्टी सीएम सीएन अश्वतनारायण, मुख्यमंत्री के साथ खड़े दिखते हैं. दोनों ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि येदियुरप्पा पार्टी के सिपाही हैं. और अब लीडरशिप चेंज वाली बात पर पूर्णविराम लगना चाहिए.

केरल: ब्लैकमनी लूट केस की आंच BJP तक

7 अप्रैल 2021. धर्मराजन नाम के एक शख्स ने केरल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि बदमाशों ने उसकी कार से 25 लाख रुपये लूट लिए हैं. पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि लूटी गई रकम 3.5 करोड़ तक हो सकती है. और ये पैसा हवाला लेनदेन का था. ये FIR केरल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के अगले ही दिन हुई. इसके बाद, विरोधी दलों ने आरोप लगाए कि बीजेपी इस पैसे का इस्तेमाल चुनाव में करने वाली थी. बता दें कि केरल के चुनाव में पिनराई विजयन बरसों पुराना रिकॉर्ड तोड़कर एक बार सीएम बने हैं. बीजेपी अपना खाता भी नहीं खोल पाई.

केंद्रीय बीजेपी ने बनाई जांच कमिटी

इस मामले में पुलिस अभी तक 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. केरल बीजेपी के अध्यक्ष के. सुरेंद्रन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. SIT ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के ड्राइवर और निजी सहयोगी से भी पूछताछ कर चुकी है. जांच अधिकारी सुरेंद्रन के बेटे हरिकिशन को समन करने की तैयारी में हैं. हरिकिशन की इस मामले में कथित तौर पर शामिल धर्मराजन के साथ बातचीत के रिकॉर्ड पुलिस को मिले हैं. कांग्रेस पार्टी मामले की न्यायिक जांच की मांग कर रही है.

वहीं, बीजेपी इसे LDF सरकार बदले की राजनीति करार दे रही है. बीजेपी का आरोप है कि राज्य की पुलिस भाकपा के इशारे पर काम कर रही है. इस घटना के आरोपियों के तार वामदलों से जुड़े हैं. केरल बीजेपी अध्यक्ष का कहना है कि राज्य सरकार बीजेपी और उसके नेताओं को अपमानित करने के लिए ये मामला उठा रही है.

बहरहाल, प्रदेश बीजेपी के नेता भले ही इसे लेफ्ट सरकार की बदले की कार्रवाई बता रहे हों लेकिन ये मामला बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंच चुका है. बीजेपी ने असलियत का पता लगाने के लिए एक आंतरिक समिति की गठन किया है. आजतक को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस कमिटी में ई. श्रीधरन, रिटायर IPS जैकब थॉमस और रिटायर IAS सीवी अनादा बोस होंगे. देखना ये है कि इस मामले में आखिर क्या निकलकर आता है.


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