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प्रताप भानु मेहता और अरविंद सुब्रमण्यन के इस्तीफे के बाद अशोका यूनिवर्सिटी ने क्या बयान दिया है?

प्रताप भानु मेहता और अरविंद सुब्रमण्यन के इस्तीफे से शुरू हुए विवाद की देश भर में चर्चा हो रही है. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी इस पूरे मामले को लेकर 3 पन्ने की एक चिट्ठी लिंक्डइन पर शेयर की थी. अब अशोका यूनिवर्सिटी की ओर से एक स्टेटमेंट जारी किया गया है. इस बयान में  यूनिवर्सिटी ने माना है कि कुछ संस्थागत चूक हुई है जिसे सुधार लिया जाएगा.

यूनिवर्सिटी ने क्या बयान जारी किया है?

बयान में कहा गया है कि अशोका यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ के चेयरमैन, कुलपति और उप-कुलपति, प्रोफेसर प्रताप भानु मेहता और प्रोफेसर अरविंद सुब्रमण्यन के इस्तीफे, और हालिया घटनाओं पर गहरा खेद व्यक्त करते हैं. दोनों अशोका विश्वविद्यालय के असाधारण सहयोगी और फैकल्टी मैंबर हैं.

यूनिवर्सिटी को प्रताप का वाइस चांसलर और फिर सीनियर फैकल्टी के रूप में नेतृत्व, मार्गदर्शन और परामर्श मिला. उन्होंने यूनिवर्सिटी को सीखने, सिखाने और रिसर्च के केंद्र के रूप में स्वीकार किए जाने की स्थिति में ले जाने के लिए सालों  फैकल्टी और फाउंडर्स के साथ मिलकर काम किया है.

अरविंद अपने साथ नए विचार और ऊर्जा लेकर आए. वो भारतीय और ग्लोबल इकोनॉमी के प्रमुख विचारकों में से एक हैं. उनके जाने से जो शून्य पैदा हुआ है उसे भरना आसान नहीं होगा.

हम मानते हैं कि संस्थागत प्रक्रियाओं में कुछ खामियां हैं, जिन्हें हम सभी स्टेकहोल्डर्स के परामर्श से सुधारने के लिए काम करेंगे. ये बात एकेडमिक ऑटोनॉमी और फ्रीडम के लिए हमारी कमिटमेंट की पुष्टि करेगा जो हमेशा अशोका यूनिवर्सिटी के आदर्शों के मूल में रहा है.

प्रताप और अरविंद भी इस बात पर जोर देना चाहेंगे कि अशोका यूनिवर्सिटी भारतीय उच्च शिक्षा के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक है. वे अशोका छोड़ने से दुखी हैं, खासतौर पर इसके छात्रों और फैकल्टी को. उनको भरोसा है कि अशोका यूनिवर्सिटी को एकेडमिक फ्रीडम और ऑटोनॉमी के लिए एक उदार दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए. और वो आजीवन संस्थान के दोस्त और वेल-विशर (भला चाहने वाले) बने रहेंगे. वो जहां भी रहें लेकिन संस्थान की तरक्की चाहते रहेंगे.

यही नहीं वे हमेशा भविष्य में भी यूनिवर्सिटी को सलाह और सुझाव देने के लिए उपलब्ध रहेंगे.

क्या है पूरा मामला

हरियाणा के सोनीपत में एक यूनिवर्सिटी है. अशोका यूनिवर्सिटी. बहुत जानी-मानी यूनिवर्सिटी है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, भारत सरकार और हरियाणा सरकार से मान्यता प्राप्त है. अपनी रिसर्च के चलते देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी इस यूनिवर्सिटी का नाम है. इस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और विख्यात राजनीतिक टिप्पणीकार प्रताप भानु मेहता ने 16 मार्च 2021 को इस्तीफा दे दिया था.

इसके बाद 18 मार्च 2021 को अरविंद सुब्रमण्यन ने भी अपना इस्तीफा दे दिया. अरविंद प्रख्यात अर्थशास्त्री और देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे हैं. अरविंद सुब्रमण्यन ने पिछले साल जुलाई में इकनॉमिक्स के प्रोफेसर के रूप में अशोका यूनिवर्सिटी जॉइन की थी. सुब्रमण्यन ने जिन वजहों के चलते अशोका यूनिवर्सिटी छोड़ने की घोषणा की, उनमें से प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे का जिक्र उन्होंने विशेष रूप से अपने त्यागपत्र में किया.

Pratap Bhanu Mehta
प्रताप भानु मेहता. (तस्वीर- इंडिया टुडे)

यूनिवर्सिटी के छात्र हुए नाराज

इन दोनों इस्तीफों के बाद यूनिवर्सिटी के छात्र भी बड़ी संख्या में इन दोनों प्रोफेसरों के समर्थन में आ गए. छात्रों ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन भी किया. यूनिवर्सिटी फैकल्टी ने भी एक लैटर लिखा जिसमें साफ कहा गया कि वो प्रताप भानु मेहता का समर्थन करती है. साथ ही संस्थान से अनुरोध किया गया कि वो प्रोफेसर मेहता से उनका इस्तीफा वापस लेने को कहे.

इस्तीफे की वजह क्या रही?

प्रताप भानु मेहता ने अपने हालिया लेखों में मौजूदा केंद्र सरकार के काम और नीतियों की आलोचना की थी. नए कृषि कानूनों को लेकर भी वो बीजेपी सरकार पर सवाल उठा चुके हैं. हरियाणा सरकार ने हाल ही में जब नई आरक्षण नीति की घोषणा की थी तब भी मेहता ने इसकी आलोचना की थी. अशोका यूनिवर्सिटी के फाउंडर्स और मेहता के बीच एक मीटिंग हुई थी जिसके बाद मेहता ने अपना इस्तीफा दे दिया. उन्होंने लिखा था,

“एक उदार विश्वविद्यालय को आगे बढ़ने के लिए राजनीतिक और सामाजिक रूप से उदार परिस्थितियों की जरूरत होगी. मैं उम्मीद करता हूं कि यूनिवर्सिटी उस माहौल को बचाए रखने में एक भूमिका निभाएगी.”

Pb Mehta Arvind Raghuram Rajan
रघुराम राजन (बीच में) ने पीबी मेहता (बाएं) और अरविंद सुब्रमण्यन (दाएं) के इस्तीफे के बाद लिखा है कि इससे भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा झटका लगा है. (फाइल फोटो)

रघुराम राजन ने क्या लिखा?

इस मामले में RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी एक तीन पन्नों का लैटर लिखा. उन्होंने लिखा कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बड़ा झटका लगा. भारत में राजनीति विज्ञान के सबसे अच्छे प्रोफेसर में से एक प्रोफेसर प्रताप मेहता ने अशोका यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दे दिया. अशोका यूनिवर्सिटी पिछले एक दशक में भारत की कैम्ब्रिज, ऑक्सफर्ड और हार्वर्ड के मुकाबले की यूनिवर्सिटी रही है. दुर्भाग्य से अब इसको झटका लगेगा.


वीडियो- रघुराम राजन ने अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के इस्तीफे के बाद पन्ने भर-भरकर क्या लिख डाला?

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